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Supriya Sule की बेटी के रिसेप्शन में सियासी दिग्गजों का जमावड़ा

Delhi में एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले और सारंग लखानी के वेडिंग रिसेप्शन में राजनीति के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आए। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा। यह कार्यक्रम भले ही पारिवारिक था, लेकिन इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं के पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा होने लगी। रिसेप्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की मुलाकात भी देखने को मिली। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में दोनों नेता साथ बैठकर बातचीत करते नजर आए। पीएम मोदी ने शरद पवार से मुलाकात के अलावा नवविवाहित रेवती और सारंग को शुभकामनाएं भी दीं। समारोह में उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों और वहां मौजूद मेहमानों से भी मुलाकात की। इस समारोह की खास बात यह रही कि इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के कई प्रमुख नेता पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी रिसेप्शन में शामिल हुईं। ऐसे में कार्यक्रम में राजनीतिक विचारधाराओं के अलग-अलग खेमों से जुड़े नेताओं की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया। हालांकि सभी नेता एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से सामने आईं। रेवती सुले, सुप्रिया सुले की बेटी और शरद पवार की नातिन हैं। उनकी शादी सारंग लखानी के साथ हुई है। रिसेप्शन में शरद पवार मेहमानों का स्वागत करते दिखाई दिए। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में पहले से चल रही चर्चाओं को एक बार फिर हवा दे दी। दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषण भी शुरू हो गया, हालांकि यह मुलाकात एक पारिवारिक आयोजन के दौरान हुई थी। दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शरद पवार की मुलाकातें महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय रही हैं। ऐसे में एक ही कार्यक्रम में पीएम मोदी, शरद पवार, अमित शाह और गांधी परिवार के प्रमुख सदस्यों की मौजूदगी ने समारोह को और भी खास बना दिया। फिलहाल इस मुलाकात को किसी नए राजनीतिक समीकरण से जोड़ना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि रिसेप्शन की तस्वीरों ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

पीएम मोदी से आठ सदस्यों के साथ मिली थीं सुप्रिया सुले

रेवती सुले और सारंग लखानी की शादी के बाद दिल्ली में आयोजित रिसेप्शन में देश की राजनीति के कई बड़े चेहरे शामिल हुए। शरद पवार ने खुद मेहमानों का स्वागत किया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई प्रमुख हस्तियां पहुंचीं। एक ही समारोह में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। रिसेप्शन से पहले सुप्रिया सुले ने एनसीपी (एसपी) के आठ सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। यह बैठक करीब 20 मिनट चली। मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं, खासकर परिसीमन से जुड़े संभावित विधेयक को लेकर। हालांकि, बैठक में परिसीमन के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई और सांसदों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों तथा जनहित के विषय प्रधानमंत्री के सामने रखे। बीड से एनसीपी (एसपी) सांसद बजरंग सोनवणे ने सोलापुर के उजनी बांध से बीड जिले तक पानी पहुंचाने का मुद्दा उठाया। वहीं शिरूर के सांसद अमोल कोल्हे ने नासिक-पुणे रेलवे लाइन से संबंधित विषय प्रधानमंत्री के सामने रखा। भिवंडी के सांसद बालू मामा म्हात्रे ने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम स्थानीय नेता डीबी पाटील के नाम पर रखने की मांग रखी। सांसदों ने किसानों और अपने क्षेत्रों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी प्रधानमंत्री से बातचीत की। परिसीमन को लेकर एनसीपी (एसपी) का रुख पहले से स्पष्ट रहा है। सुप्रिया सुले कई मौकों पर कह चुकी हैं कि उनकी पार्टी किसी भी परिसीमन विधेयक का समर्थन तभी करेगी, जब उनकी जरूरी मांगों को प्रस्तावित कानून के मसौदे में शामिल किया जाएगा। यही वजह है कि प्रधानमंत्री के साथ हुई सांसदों की बैठक को लेकर विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि बैठक में इस विषय पर बातचीत नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद तस्वीर फिलहाल अलग नजर आ रही है। एक तरफ प्रधानमंत्री से एनसीपी (एसपी) सांसदों की मुलाकात और दूसरी तरफ सुप्रिया सुले की बेटी के रिसेप्शन में प्रधानमंत्री मोदी तथा शरद पवार की आमने-सामने मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति को चर्चा का नया विषय दे दिया है। समारोह में अलग-अलग दलों के नेताओं की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि इन मुलाकातों को फिलहाल पारिवारिक और संसदीय संवाद के तौर पर ही देखा जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में इनके राजनीतिक मायने को लेकर चर्चाएं जारी रह सकती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुप्रिया सुले और एनसीपी (एसपी) के सांसदों की मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। बैठक को लेकर सत्ता पक्ष ने इसे सामान्य संसदीय संवाद बताया, जबकि विपक्षी नेताओं ने इस मुलाकात के राजनीतिक पहलुओं पर सवाल उठाए। इस बीच अलग-अलग दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सुप्रिया सुले और उनकी पार्टी के सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में किसी भी पार्टी के सांसद अगर अपने क्षेत्र या जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर उनसे मुलाकात करते हैं, तो इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस मुलाकात को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि सांसदों को प्रधानमंत्री से अलग से मुलाकात करने की जरूरत इसलिए महसूस हो रही है क्योंकि संसद के भीतर उनसे संवाद करना आसान नहीं है। राउत ने इस मुद्दे को संसद में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने बैठक को लेकर अलग दावा किया। उनका कहना है कि एनसीपी (एसपी) के सांसदों ने प्रधानमंत्री के सामने परिसीमन विधेयक को लेकर अपनी चिंताएं और आपत्तियां रखी होंगी। हालांकि इस दावे की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बैठक में सांसदों ने मुख्य रूप से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े विकास और जनहित के मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखा। दरअसल, परिसीमन को लेकर एनसीपी (एसपी) का रुख पहले से ही चर्चा में रहा है। सुप्रिया सुले पार्टी की शर्तों और चिंताओं को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ हुई इस बैठक को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने नजरिए से इसकी व्याख्या कर रहे हैं। फिलहाल मुलाकात को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है और महाराष्ट्र की राजनीति में इसके संभावित असर पर सभी की नजर बनी हुई है।

एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित FCRA बिल को लेकर अपनी पार्टी का रुख एक बार फिर साफ किया है। उन्होंने बिल का विरोध करते हुए इसे वापस लेने या संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग दोहराई है। इस मुद्दे पर उनका बयान ऐसे समय आया है, जब उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच दिल्ली में सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के रिसेप्शन में देश की राजनीति के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी समारोह में पहुंचीं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने पारिवारिक कार्यक्रम को राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा में ला दिया, हालांकि सभी नेता शादी के समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। रिसेप्शन से पहले सुप्रिया सुले ने एनसीपी (एसपी) के आठ सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। करीब 20 मिनट चली इस बैठक के बाद परिसीमन को लेकर पार्टी के रुख पर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि सुप्रिया सुले ने साफ किया कि बैठक में परिसीमन का मुद्दा नहीं उठाया गया। सांसदों ने प्रधानमंत्री के सामने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को रखा। बैठक में बीड के सांसद बजरंग सोनवणे ने उजनी बांध से बीड जिले तक पानी पहुंचाने की मांग रखी। शिरूर के सांसद अमोल कोल्हे ने नासिक-पुणे रेलवे लाइन से जुड़े विषय को प्रधानमंत्री के सामने उठाया। वहीं भिवंडी के सांसद बालू मामा म्हात्रे ने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम स्थानीय नेता डीबी पाटील के नाम पर रखने की मांग की। इसके अलावा किसानों और स्थानीय विकास से जुड़े अन्य विषयों पर भी बातचीत हुई। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे सामान्य लोकतांत्रिक और संसदीय प्रक्रिया बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और किसी भी दल के सांसद उनसे मुलाकात कर सकते हैं। वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधते हुए संसद के भीतर प्रधानमंत्री और विपक्ष के बीच संवाद को लेकर सवाल उठाए। इस तरह एक तरफ पारिवारिक समारोह में दिग्गज नेताओं की मुलाकात और दूसरी तरफ पीएम मोदी के साथ एनसीपी (एसपी) सांसदों की बैठक ने महाराष्ट्र की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एनसीपी (एसपी) सांसदों की मुलाकात के बाद परिसीमन को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने दावा किया कि बैठक के दौरान एनसीपी (एसपी) सांसदों ने परिसीमन से जुड़ी अपनी चिंताओं को प्रधानमंत्री के सामने रखा होगा। हालांकि, इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और बैठक को लेकर सामने आई जानकारी में क्षेत्रीय तथा जनहित से जुड़े मुद्दों का ही उल्लेख किया गया है।

परिसीमन के मुद्दे पर सुप्रिया सुले अपनी पार्टी की स्थिति पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं। उनका कहना है कि एनसीपी (एसपी) किसी भी प्रस्तावित परिसीमन व्यवस्था का समर्थन करने से पहले अपनी प्रमुख मांगों और चिंताओं को उसमें शामिल किए जाने को अहम मानेगी। इसी वजह से प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक को लेकर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है और अलग-अलग नेता इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों को अपने नजरिए से देख रहे हैं। दूसरी ओर, विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले प्रस्तावित FCRA बिल पर भी सुप्रिया सुले ने अपनी आपत्ति दोहराई है। उन्होंने सरकार से इस प्रस्ताव को वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की है। इस मुद्दे पर एनसीपी (एसपी) का विरोध ऐसे समय सामने आया है, जब संसद में कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी है। एक ही दिन प्रधानमंत्री मोदी से एनसीपी (एसपी) सांसदों की बैठक और बाद में सुप्रिया सुले की बेटी के रिसेप्शन में प्रधानमंत्री, शरद पवार सहित सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। समारोह में अमित शाह, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी जैसे प्रमुख नेताओं के पहुंचने से कार्यक्रम की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं। इन मुलाकातों और एक ही समारोह में अलग-अलग दलों के नेताओं की मौजूदगी को फिलहाल किसी नए राजनीतिक गठजोड़ या समीकरण का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। शादी जैसे पारिवारिक आयोजन में नेताओं का एक साथ आना अलग बात है, जबकि संसद और नीतिगत मुद्दों पर उनकी राजनीतिक स्थिति अलग हो सकती है। आने वाले दिनों में परिसीमन और FCRA बिल पर सामने आने वाले बयानों से ही यह स्पष्ट होगा कि इन मुद्दों पर महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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