संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार अपने लंबित विधायी कामकाज को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेंगे। इनमें केरल के नाम में बदलाव से जुड़ा विधेयक और नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में संशोधन से संबंधित बिल शामिल है। राज्यसभा में पेश होने वाले केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 के जरिए राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। इस बदलाव को लेकर केरल विधानसभा पहले ही अपनी मंजूरी दे चुकी है। विधानसभा में इस प्रस्ताव से जुड़ी सभी धाराओं को सर्वसम्मति से पारित किया गया था। अब इस प्रक्रिया को संसद के स्तर पर आगे बढ़ाया जाना है। केरल के नाम में बदलाव की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत होती है। केंद्र सरकार की ओर से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति ने इस मामले में राज्य विधानसभा से राय मांगी थी। राज्य विधानसभा की सहमति के बाद अब संसद में विधेयक के जरिए आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 भी राज्यसभा में आगे बढ़ाया जाएगा। यह विधेयक लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है। अब उच्च सदन में इसकी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। सहकारी क्षेत्र से जुड़े इस विधेयक को सरकार के मौजूदा विधायी एजेंडे में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा के आज के कामकाज पर इसलिए भी नजर रहेगी क्योंकि मॉनसून सत्र अब समाप्ति की ओर है। ऐसे में सरकार की कोशिश महत्वपूर्ण विधेयकों को समय रहते आगे बढ़ाने की होगी। वहीं विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकता है। खास तौर पर FCRA संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई है और इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने की मांग पर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है।
FCRA बिल पर भी नजर
FCRA संशोधन बिल, 2026 को लेकर संसद में सियासी हलचल तेज बनी हुई है। विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्ष की प्रमुख मांग है कि विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय इसकी विस्तृत समीक्षा की जाए। कई विपक्षी दलों ने इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित प्रावधानों के संभावित प्रभावों पर अलग-अलग पक्षों से विचार किया जाना जरूरी है। वहीं, सरकार की ओर से विधेयक को लेकर आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है। यदि इसे JPC के पास भेजने का फैसला होता है, तो समिति को इसके विभिन्न प्रावधानों की जांच करने और संबंधित पक्षों से राय लेने का अवसर मिल सकता है। इससे विधेयक पर संसद में आगे की प्रक्रिया के लिए विस्तृत आधार तैयार हो सकता है। FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act विदेशी स्रोतों से मिलने वाले अंशदान और उसके इस्तेमाल से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसमें होने वाला कोई भी बदलाव गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं के कामकाज पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि विधेयक के प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा बनी हुई है। सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि विधेयक JPC को भेजा जाता है तो इसकी समीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जबकि विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां और मांगें सदन में उठाई जा सकती हैं। मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में FCRA बिल पर होने वाली चर्चा संसद के भीतर एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।

विपक्ष के सवालों का क्या होगा?
संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर खींचतान बनी हुई है। छात्रों के आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है। वहीं सरकार ने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए सहमति जताई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी संकेत दिया है कि सरकार छात्रों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है। इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब देने की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में नजर बनी हुई है। विपक्ष की ओर से छात्रों की मांगों और प्रदर्शन के दौरान हुई कथित कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। ऐसे में सदन के भीतर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। इसी बीच राज्यसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इनमें केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 शामिल है। राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत तय प्रक्रिया का हिस्सा है। केरल विधानसभा इस प्रस्ताव को पहले ही सर्वसम्मति से मंजूरी दे चुकी है, जिसके बाद अब संसद के स्तर पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दूसरी ओर, नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 भी राज्यसभा के एजेंडे में है। यह विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है और अब उच्च सदन में इसकी प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके जरिए सहकारी क्षेत्र से जुड़े संस्थागत ढांचे और नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से संबंधित प्रावधानों में बदलाव का रास्ता तैयार किया जा रहा है। इन विधेयकों के साथ-साथ FCRA संशोधन बिल, 2026 भी राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा में है। विदेशी अंशदान से जुड़े इस प्रस्तावित कानून को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष की मांग है कि विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय वापस लिया जाए या फिर विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC को भेजा जाए। मॉनसून सत्र अब समाप्ति की ओर है, इसलिए सरकार की कोशिश अपने लंबित विधायी एजेंडे को पूरा करने की होगी। दूसरी तरफ विपक्ष छात्रों से जुड़े मुद्दों, FCRA बिल और अन्य विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में राज्यसभा का आज का कामकाज विधायी फैसलों के साथ-साथ राजनीतिक बहस के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दौर में राज्यसभा का माहौल आज काफी गरम रहने की संभावना है। FCRA संशोधन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद पहले से ही बने हुए हैं। यदि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने पर चर्चा आगे बढ़ती है, तो विपक्ष इसके प्रावधानों को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख सकता है। विपक्षी दलों की ओर से लगातार यह मांग उठाई जा रही है कि FCRA बिल पर जल्दबाजी में फैसला न लिया जाए। विपक्ष का तर्क है कि विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में बदलाव का व्यापक असर हो सकता है, इसलिए विधेयक के हर प्रावधान की गहराई से समीक्षा जरूरी है। दूसरी ओर, सरकार अपनी ओर से इस कानून में प्रस्तावित बदलावों की जरूरत और उद्देश्य को सदन के सामने रखने की कोशिश कर सकती है। संसद में छात्रों से जुड़े आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है। सरकार ने सदन में चर्चा के लिए सहमति जताई है और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार चर्चा के लिए तैयार है। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संभावित जवाब पर भी सांसदों की नजर रहेगी। विपक्ष की ओर से छात्रों की मांगों, प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। वहीं सरकार की कोशिश अपने पक्ष को स्पष्ट करने और पूरे मामले पर अपनी स्थिति सदन के सामने रखने की होगी। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस की स्थिति बन सकती है। मॉनसून सत्र अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और सरकार के सामने लंबित विधायी एजेंडे को पूरा करने की चुनौती है। लोकसभा में कई विधेयक पारित होने के बाद अब राज्यसभा में भी महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में आज का दिन सिर्फ विधायी कामकाज तक सीमित नहीं रहने वाला है। FCRA बिल, छात्रों से जुड़े मुद्दे और सरकार से जवाब की मांग जैसे विषय राज्यसभा में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं। सरकार जहां अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहेगा।










