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‘लाल डायरी’ पर सियासी घमासान, 2027 से पहले खुलेंगे राज?

फिर सुर्खियों में आई ‘लाल डायरी’ सरकारें ED और CBI का निजी कामों के लिए करती हैं इस्तेमाल चुनाव से पहले लोगों को दिया जाता है लालच कई कथित भ्रष्ट नेताओं के नाम सामने आने का दावा दर्शकों को हम बताना चाहते हैं कि किसी भी राज्य में जब चुनाव होते हैं, तो सरकारें ED और CBI का इस्तेमाल करती हैं और करती रही हैं। इससे जनता के पैसे का भी नुकसान होता है। जहां बीजेपी या केंद्र की सरकार होती है, वहां ED और CBI को अपने निजी कामों के लिए इस्तेमाल करने के आरोप लगते हैं। वहीं, जहां केंद्र की सरकार नहीं होती, वहां विजिलेंस और पुलिस विभाग के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इन सभी चीजों के चलते दबे-कुचले लोग कई बार डर के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाते। हालांकि, चुनाव से पहले लोगों को सूट, बूट और दूसरी कई चीजों का लालच दिया जाता है। बड़े-बड़े निजी चैनलों पर जो प्रवक्ता बैठते हैं, जिन पार्टियों की सरकार होती है, वे अक्सर उन्हीं के साथ खड़े नजर आते हैं।
ये सभी मौसमी मेंढक हैं, जो मौसम की तरह बदलते रहते हैं। ये लोग अपने निजी फायदे, MLA की टिकट या किसी दूसरे लाभ के लिए तरह-तरह के आरोप लगाते हैं।
जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी। जो राजनीतिक पार्टियां ऐसे कथित भ्रष्ट लोगों को अपने साथ शामिल करती हैं, उन्हें भी सोचना चाहिए कि इस तरह भोले-भाले लोगों को हमेशा बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता।

अगर युवा पीढ़ी इनके सामने आकर खड़ी हो गई, तो राजनीतिक पार्टियों के तख्ते पलट सकती है।  आज के वक़्त में पॉलिटिक्स में पोलिटिकल लीडर्स से ज़्यादा मशहूर सेलिब्रिटी और कारोबारी है जितनी भी पार्टियों में मनोरंजन जगत, बिजनेसमैन या दूसरे क्षेत्रों से लोग राजनीति में आते हैं, उन पर भी सवाल उठते हैं कि क्या वे वास्तव में जनता की सेवा के लिए राजनीति में आते हैं या सुरक्षा, प्रभाव और राजनीतिक पहुंच के लिए? कंगना रनौत, हेमा मालिनी और सनी देओल जैसे अभिनेताओं का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, किसी भी सेलिब्रिटी का राजनीति में आना अपने आप में गलत नहीं है। असली सवाल उनकी राजनीतिक समझ, काम और जनता के प्रति जवाबदेही का है।

हमने पहले भी कई बार इसका ज़िक्र किया है।

राघव चड्ढा और संदीप पाठक के पास कथित तौर पर एक ‘लाल डायरी’ है, जिसमें कई IAS, IPS अधिकारियों और कथित भ्रष्ट नेताओं के नाम शामिल हैं और आने वाले दिनों में ये नाम सामने आ सकते हैं और उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है.. यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह एक राजनीतिक दावा है। किसी कथित डायरी के अस्तित्व या उसमें दर्ज नामों की स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि के बिना इसे तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। यह भी दावा किया गया है कि जब भी किसी राज्य में चुनाव होते हैं, तो राघव चड्ढा और संदीप पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका देखने को मिलती है। साथ ही आपने देखा होगा राजनीति में परिवारवाद भी देखने को मिलता है..राजनीति अब इतनी धुंधली हो गई है कि होनहार और समझदार युवाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया जाता। राजनीतिक परिवार नहीं चाहते कि उनके परिवार के बाहर का कोई व्यक्ति राजनीति में आगे आए। रैलियों में आम युवा और गरीब लोग लाठियां खाते हैं और घायल होते हैं, जबकि राजनीतिक नेताओं के परिवारों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। राजनीतिक नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ाई और आराम की जिंदगी जीते हैं।

युवाओं को लेकर अपील

Day to day news  bharat कि टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर जानकारी जुटाई है हमारा लक्ष्य युवाओं को सही रास्ते पर लाने तथा उन्हें नशे से दूर रखना है और जो उनपर झुठे परचे हो रहे ..उससे बचाना वही हम हमेशा लोगो से यही कहते आए है..उनके आसपास भी ऐसी कोई घटना होती है, तो संबंधित टीम को सूचना दें। इसी के साथ आपको बता दे कि .बिक्रम सिंह मजीठिया जो लगतार बयानबाजी करते है. aap के खिलाफ निशाना साधते ..शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने नितिन गोयल और मुख्यमंत्री कार्यालय  पर पंजाब सरकार में भ्रष्टाचार, नीतियों में हेरफेर और ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। अब देखना अहम रहेगा ..2027 चुनाव से पहले लाल डायरी से कौन कौन से नाम सामने आते

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