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वंदे मातरम पर घमासान: BJP ने कांग्रेस के फैसले पर उठाए सवाल, 1937 के निर्णय को बताया विभाजन की नींव

वंदे मातरम के गायन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में वंदे मातरम के सम्मान को लेकर प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें केवल दो छंद गाने की बात कही गई है।

संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह रुख इतिहास में लिए गए उन फैसलों से जुड़ा है, जिनके कारण वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर विवाद खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के मूल में देशभक्ति और राष्ट्रभावना है और इसे लेकर किसी तरह का विभाजन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भाजपा प्रवक्ता ने 15 अगस्त 2026 का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर वंदे मातरम के अपमान का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, लाल किले से वंदे मातरम के छह श्लोकों का संपूर्ण गायन हुआ, जबकि कांग्रेस कार्यालय में दो श्लोकों के बाद इसे रोकने का इशारा किए जाने का दावा किया गया। पात्रा ने कहा कि इसके बाद कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में केवल दो छंद गाने का प्रस्ताव सामने आया।

 

संबित पात्रा ने 1937 के कांग्रेस के फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय वंदे मातरम के केवल एक हिस्से को गाने का निर्णय लिया गया था और यही फैसला आगे चलकर तुष्टिकरण की राजनीति से जुड़ गया। भाजपा का आरोप है कि इसी तरह के फैसलों ने देश में विभाजन की राजनीति को बढ़ावा दिया।

पात्रा ने 1923 के कांग्रेस अधिवेशन का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय वंदे मातरम के संपूर्ण गायन को लेकर मतभेद सामने आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में जवाहरलाल नेहरू के समय वंदे मातरम को लेकर ऐसा निर्णय लिया गया, जिसने इसके पूर्ण गायन पर रोक की स्थिति पैदा की।

भाजपा नेता ने कहा कि आजादी से पहले ब्रिटिश शासन वंदे मातरम के गायन को रोकने की कोशिश करता था, जबकि आज कांग्रेस पर वही परंपरा आगे बढ़ाने का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा वंदे मातरम के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगी।

संबित पात्रा ने कांग्रेस के मौजूदा रुख को लेकर राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त की घटना और उसके बाद कांग्रेस कार्य समिति में लिए गए फैसले से पार्टी की सोच सामने आती है। भाजपा का कहना है कि देश की एकता और राष्ट्रभावना से जुड़े प्रतीकों को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

हालांकि, वंदे मातरम के गायन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ रहे हैं। भाजपा जहां कांग्रेस के दो छंद गाने के फैसले को ऐतिहासिक और राजनीतिक मुद्दे से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से भाजपा पर राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीति करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में वंदे मातरम का मुद्दा आने वाले दिनों में भी सियासी बहस का बड़ा केंद्र बना रह सकता है।

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