बात करते हैं दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी SRCC से सामने आई उस बड़ी खबर की, जिसने अब राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में पहुंचे थे। यहां उन्होंने कॉलेज के छात्रों को संबोधित किया और अपने पुराने SRCC दौरे को भी याद किया। लेकिन प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए एक शब्द ने अब विवाद खड़ा कर दिया है।ये शब्द है—‘दिमागी नक्सल’।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए अपने संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का दोबारा जिक्र किया।पीएम मोदी ने कहा कि जब उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किया था, तो इसके बाद उनके द्वारा आलोचना किए गए विचारों का समर्थन करने वाले लोग सामने आने लगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जनता अब ऐसे लोगों का असली रंग देख रही है।

लेकिन प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के प्रमुख कॉलेजों में से एक में पढ़ने वाली सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी को इस तरह का लेबल देना सही नहीं है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को युवाओं को उम्मीद देनी चाहिए, न कि उन्हें किसी तरह के लेबल से जोड़ना चाहिए।CJP का कहना है कि आज देश के युवाओं के सामने कई बड़े सवाल हैं। इनमें शिक्षा, रोजगार, छात्र कल्याण और भविष्य से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।सौरव दास ने कहा कि SRCC जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रधानमंत्री युवाओं से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर बात कर सकते थे।उन्होंने कॉलेज के शिक्षकों की मेडिकल और चाइल्डकेयर लीव से जुड़ी चिंताओं का भी जिक्र किया। इसके अलावा कॉलेज के बुनियादी ढांचे की स्थिति और छात्रों पर बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव जैसे मुद्दों को भी उठाया गया।

यानी एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषण में देश की बदलती नीतियों और विकास की बात कर रहे थे, तो दूसरी तरफ CJP ने उनके भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सवाल खड़े कर दिए।अब इस पूरे मामले में CJP के एक और सह-संयोजक आशुतोष रांका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।शुतोष रांका ने कहा कि SRCC जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार और छात्रों के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद थी।उनके मुताबिक, छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात करने के बजाय प्रधानमंत्री के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ का मुद्दा चर्चा में आ गया।CJP नेताओं का कहना है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई की जगह नहीं हैं, बल्कि यहां से देश का भविष्य तैयार होता है। ऐसे में युवाओं की चिंताओं और उनके सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में सिर्फ इस विवादित शब्द का जिक्र ही नहीं किया, बल्कि अपने 2013 के SRCC दौरे को भी याद किया।पीएम मोदी ने 2013 के दौर की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय देश कई चुनौतियों से गुजर रहा था।उन्होंने महंगाई, भ्रष्टाचार और कम विकास दर जैसे मुद्दों का जिक्र किया और कहा कि भारत अब ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से आगे बढ़कर ‘पॉलिसी डायनेमिज्म’ की दिशा में आगे बढ़ चुका है।यानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के जरिए 2013 के भारत और मौजूदा भारत के बीच तुलना भी की।लेकिन अब सवाल यही है कि आखिर ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर इतना विवाद क्यों खड़ा हुआ?दरअसल, CJP का आरोप है कि युवाओं और सवाल पूछने वाले लोगों को इस तरह के शब्दों से संबोधित करने के बजाय उनके सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में इस शब्द का इस्तेमाल उन विचारों और लोगों के संदर्भ में किया, जिनकी वह आलोचना कर रहे थे।यही वजह है कि अब इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी का बयान है, जिसमें उन्होंने अपने पिछले भाषण के संदर्भ को दोहराया।दूसरी तरफ CJP की प्रतिक्रिया है, जिसमें संगठन ने कहा है कि युवाओं को लेबल करने के बजाय उन्हें शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीद दी जानी चाहिए।
इस पूरे विवाद में एक बात साफ है कि SRCC का यह कार्यक्रम अब सिर्फ कॉलेज के शताब्दी समारोह तक सीमित नहीं रह गया है।प्रधानमंत्री मोदी का भाषण और उसमें इस्तेमाल किया गया ‘दिमागी नक्सल’ शब्द अब चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है।CJP की तरफ से प्रधानमंत्री पर निशाना साधे जाने के बाद इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।फिलहाल, इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हो रही है कि देश के युवाओं के बीच प्रधानमंत्री का संदेश क्या होना चाहिए—क्या युवाओं के सवालों पर सीधी बात होनी चाहिए, या फिर विचारधारा से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए?अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस बयान पर प्रधानमंत्री या सरकार की तरफ से कोई और प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।फिलहाल इतना जरूर है कि SRCC के मंच से निकला ‘दिमागी नक्सल’ वाला बयान अब सियासी बहस का नया मुद्दा बन गया है।









