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बिहार में बारिश का कहर! स्कूलों में घुसा पानी, गांवों का टूटा संपर्क

बिहार में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इसका असर अब रिहायशी इलाकों के साथ-साथ स्कूलों, सड़कों और खेतों पर भी दिखाई देने लगा है।बेगूसराय से लेकर गया और सारण तक बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। कहीं गंगा का पानी सरकारी स्कूलों के परिसर तक पहुंच गया है, तो कहीं नदी का पानी सड़क के ऊपर से बह रहा है। हालात ये हैं कि गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है और लोगों के सामने आने-जाने से लेकर राशन, दवा और इलाज तक की परेशानी खड़ी हो गई है।बसे पहले बात करते हैं बेगूसराय के मटिहानी प्रखंड की, जहां गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। यहां बाढ़ का पानी अब 17 सरकारी विद्यालयों तक पहुंच गया है। स्कूल परिसरों में पानी भरने के कारण पठन-पाठन प्रभावित हुआ है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को रोकने की प्रक्रिया अपनाई गई है।बाढ़ प्रभावित स्कूलों में प्राथमिक विद्यालय कासिमपुर बलुआही, नव प्राथमिक विद्यालय महेंद्रपुर टोला, प्राथमिक विद्यालय महेंद्रपुर, मध्य विद्यालय बलहपुर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिंहपुर, कन्या प्राथमिक विद्यालय छितरौर, नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रविदास टोला छितरौर, मध्य विद्यालय छितरौर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिहमा दियारा, उच्च माध्यमिक विद्यालय सिहमा दियारा समेत कई विद्यालय शामिल हैं।

हालात को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रभावित स्कूलों के शिक्षकों को आसपास के दूसरे विद्यालयों में टैग कर दिया है, ताकि बच्चों की पढ़ाई भले प्रभावित हुई हो, लेकिन शिक्षकों की सेवाओं का इस्तेमाल दूसरे स्कूलों में किया जा सके।

अब बात गया जिले की, जहां लगातार बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में भी परेशानी बढ़ गई है। मानपुर प्रखंड के सोहेलपुर पंचायत स्थित अमरी गांव का मुख्य संपर्क मार्ग पेमार नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गया है। सड़क के ऊपर से नदी का पानी बह रहा है, जिसके चलते अमरी और बरसाना गांव का संपर्क लगभग पूरी तरह प्रभावित हो गया है।ग्रामीणों के लिए बाजार, अस्पताल और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। पानी के तेज बहाव के चलते अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं और विद्यार्थियों की उपस्थिति में भी काफी गिरावट आई है।वहीं ग्रामीणों के सामने राशन और दवाइयों की समस्या भी खड़ी हो गई है। परोरिया बाजार रोजमर्रा की जरूरतों का मुख्य केंद्र है, लेकिन सड़क पर पानी बहने के कारण लोगों के लिए वहां पहुंचना मुश्किल हो गया है। बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।इतना ही नहीं, खेतों में जलभराव से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। धान की खड़ी फसल पर संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर जल्द पानी नहीं निकला तो फसल खराब हो सकती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।जलभराव के कारण सांप और दूसरे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं पुरानी बाढ़ की यादें ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ साल पहले आई भीषण बाढ़ में कई घर बह गए थे और लोगों को अपना गांव तक छोड़ना पड़ा था।उधर सारण जिले में भी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर अधिकारियों की टीमें लगातार प्रभावित और संभावित बाढ़ क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं।छपरा सदर, दिघवारा, गरखा, रिविलगंज और सोनपुर समेत कई इलाकों में अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। खास तौर पर सोनपुर प्रखंड को संवेदनशील मानते हुए कई ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।सोनपुर में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।प्रशासन की ओर से संभावित आपदा से निपटने के लिए राहत और बचाव सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सोनपुर अंचलाधिकारी को 1,000 पॉलीथिन शीट और दिघवारा अंचलाधिकारी को 500 पॉलीथिन शीट दी गई हैं। इसके साथ ही लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय और अन्य बचाव संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं।कई इलाकों में जरूरत के मुताबिक नावों का संचालन भी शुरू किया गया है, ताकि बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और जरूरी सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।फिलहाल बिहार के कई जिलों में बारिश और बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ लोगों को बाढ़ की चिंता सता रही है, तो दूसरी तरफ प्रशासन राहत और बचाव की तैयारियों में जुटा हुआ है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा और नदियों का जलस्तर और बढ़ा, तो हालात कितने गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल प्रशासन की नजर नदियों के जलस्तर, तटबंधों की स्थिति और संवेदनशील इलाकों पर बनी हुई है

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