पंजाब से इस वक्त एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है…मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम में काले झंडे दिखाने के बाद सिख युवक मोहनजीत सिंह के साथ कथित पुलिस प्रताड़ना का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है।जिस मामले में पहले मोहनजीत सिंह ने पंजाब पुलिस पर मारपीट और हिरासत में प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए थे… अब उसी मामले में पुलिस प्रशासन की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई है।दरअसल, एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट मोहनजीत सिंह, जिन्हें हंजित शेरों के नाम से भी जाना जाता है, ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के दौरान वह पंजाब में नशे के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर सवाल पूछना चाहते थे। लेकिन उन्हें सवाल पूछने का मौका नहीं मिला।इसके बाद उन्होंने अपने घर की छत पर चढ़कर काला झंडा दिखाते हुए विरोध जताया था।मोहनजीत सिंह का आरोप है कि इसके बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर गई और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और प्रताड़ना की गई।उन्होंने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।
मोहंजीत का दावा है कि उन्हें एक कमरे में ले जाकर पीटा गया… बाद में थाने में भी उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बालों के साथ बदसलूकी की गई, उन्हें ब्लेड से चोट पहुंचाई गई और कथित तौर पर घावों पर नमक तक डाला गया।हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।लेकिन अब इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा अपडेट सामने आया है…

पंजाब सरकार ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामले को लेकर हो रही लगातार आलोचना के बीच सुनाम के डीएसपी हरविंदर सिंह का तबादला कर दिया गया है।उन्हें सुनाम के डीएसपी पद से हटाकर प्रथम कमांडो बटालियन, बहादुरगढ़, पटियाला में डीएसपी के पद पर भेजा गया है।डीजीपी पंजाब की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, उन्हें नई पोस्टिंग पर 6 सितंबर तक रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।लेकिन कार्रवाई सिर्फ डीएसपी तक सीमित नहीं रही…संगरूर के एसएसपी की तरफ से जारी आदेश के तहत सिटी सुनाम के थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रतीक जिंदल, चीमा थाना प्रभारी एसआई बलजीत सिंह और सिटी सुनाम चौकी प्रभारी एएसआई हरप्रीत सिंह को भी उनके मौजूदा पदों से हटाकर संगरूर पुलिस लाइंस में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।यानी एक तरफ मोहनजीत सिंह पुलिस पर हिरासत में कथित प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगा रहे हैं…और दूसरी तरफ अब इस मामले में पुलिस प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है।इस पूरे विवाद ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इस पर धार्मिक और राजनीतिक स्तर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने भी मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कथित तौर पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।वहीं, यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC तक भी पहुंच चुका है।इस बीच मोहनजीत सिंह अस्पताल में भर्ती हैं और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच का मुद्दा अब केंद्र में आ गया है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या पुलिसकर्मियों के तबादले के बाद इस मामले में आगे और कार्रवाई होगी?
क्या कथित हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?क्या इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज होती है या जांच कमेटी गठित की जाती है?और सबसे अहम…
मोहनजीत सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच में आखिर सच्चाई क्या सामने आती है?फिलहाल सरकार और पुलिस प्रशासन की तरफ से हुई यह कार्रवाई इस पूरे मामले में एक बड़ा अपडेट जरूर है… लेकिन अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी








