कनाडा सरकार ने देश में अस्थायी रूप से रह रहे लोगों की संख्या कम करने की दिशा में अपनी इमीग्रेशन नीति को और सख्त कर दिया है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक देश की कुल आबादी में गैर-स्थायी निवासियों की हिस्सेदारी को पांच फीसदी से नीचे लाना है। कनाडा के इस फैसले से पढ़ाई और काम के लिए वहां गए पंजाब के हजारों युवाओं की चिंता बढ़ गई है।
कनाडा की 2026-2028 इमीग्रेशन योजना में अस्थायी आबादी को टिकाऊ स्तर पर लाने को प्राथमिकता दी गई है। इसका सीधा असर उन छात्रों और कामगारों पर पड़ सकता है, जिनकी स्टडी परमिट या वर्क परमिट की अवधि जल्द समाप्त होने वाली है।
हालांकि, अगर कोई व्यक्ति अपनी वर्क परमिट की अवधि खत्म होने से पहले उसे बढ़ाने के लिए आवेदन कर देता है, तो आवेदन पर फैसला आने तक वह कनाडा में रह सकता है। वहीं, वैध इमीग्रेशन स्टेटस के बिना कनाडा में रहना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
पंजाब के युवाओं पर क्या पड़ेगा असर?
कनाडा की सख्त होती इमीग्रेशन व्यवस्था का असर पंजाब में भी दिखाई देने लगा है। अगस्त 2026 में पंजाब सरकार की ओर से बताया गया था कि करीब 1,500 पंजाबी विद्यार्थी वर्क परमिट नहीं मिलने के कारण प्रभावित हुए हैं।
बताया गया कि कई विद्यार्थियों ने ऐसे कोर्स का चुनाव किया था, जो बाद में वर्क परमिट के लिए योग्य नहीं पाए गए। इसके चलते कुछ विद्यार्थियों को कनाडा छोड़ने के लिए भी मजबूर होना पड़ा।
परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा
कनाडा की बदलती इमीग्रेशन नीति का असर केवल वहां रह रहे छात्रों और कामगारों तक सीमित नहीं है। पंजाब के कई परिवारों ने अपने बच्चों को कनाडा भेजने के लिए लाखों रुपये खर्च किए हैं।
पंजाब सरकार के अनुसार, कई परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई और कनाडा भेजने की प्रक्रिया में करीब 20 लाख रुपये तक खर्च किए हैं। अब वर्क परमिट और इमीग्रेशन से जुड़े फैसलों के कारण कई परिवार आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
एजेंटों की भूमिका पर भी सवाल
बदलती इमीग्रेशन नीति के बीच उन एजेंटों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन्होंने विद्यार्थियों को कनाडा में स्थायी निवास हासिल करने का आसान रास्ता बताए जाने के आरोप हैं।
ऐसे में पंजाब से कनाडा जाने वाले युवाओं के लिए जरूरी है कि वे किसी भी कोर्स या इमीग्रेशन प्रक्रिया का चुनाव करने से पहले उसकी पात्रता, वर्क परमिट से जुड़े नियम और इमीग्रेशन की शर्तों की अच्छी तरह जांच करें।
साथ ही, अपनी परमिट की अवधि और इमीग्रेशन स्टेटस पर लगातार नजर रखना भी बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।










