Aam Aadmi Party (AAP) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का फैसला किया। उनके इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। स्वाति मालीवाल ने अपने बयान में दावा किया कि यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया, बल्कि लंबे समय से चल रहे घटनाक्रम और व्यक्तिगत अनुभवों के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि 2006 से वह अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ी थीं और उन्होंने अपना घर, नौकरी और कई वर्षों का व्यक्तिगत जीवन पार्टी के लिए समर्पित कर दिया था, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल गईं। स्वाति मालीवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और जब उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की तो उन्हें नजरअंदाज किया गया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर उनकी आवाज को दबाया गया और संसद में भी उन्हें अपने विचार रखने का अवसर सीमित कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने कुछ घटनाओं पर आपत्ति जताई, तो उन्हें मानसिक रूप से दबाव में रखने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों पर पार्टी की ओर से अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



आम आदमी पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल समेत कई नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल दिल्ली की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज कर दी है। अपने बयान में स्वाति मालीवाल ने पार्टी नेतृत्व, खासकर अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी और आंदोलन के लिए समर्पण के साथ काम किया, यहां तक कि व्यक्तिगत जीवन में भी कई त्याग किए, लेकिन बदले में उन्हें अपमान और कथित प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर अब लोकतांत्रिक मूल्यों की जगह एक केंद्रीकृत नियंत्रण ने ले ली है, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाया जाता है। मालीवाल ने यह भी कहा कि जब उन्होंने अपने साथ हुए व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें डराने और चुप कराने की कोशिश की गई, जिससे वे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगीं। इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया, जिसे उन्होंने अपने आत्मसम्मान और राजनीतिक भविष्य के लिए जरूरी बताया। उन्होंने भाजपा में शामिल होने को एक वैचारिक निर्णय बताते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास और स्थिरता पर विश्वास रखती हैं। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसे विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं आने वाले समय में इसके व्यापक राजनीतिक प्रभावों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
स्वाती मालीवाल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल महिलाओं के खिलाफ हैं।
राज्यसभा सांसद Swati Maliwal ने अपने बयान में Arvind Kejriwal और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जब पार्टी के भीतर कथित गलतियों और अपने साथ हुए व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें दबाने, डराने और धमकाने की कोशिश की गई। मालीवाल का कहना है कि पिछले दो वर्षों में उन्हें संसद में बोलने का एक भी अवसर नहीं दिया गया, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी के अंदर असहमति के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने केजरीवाल को महिला विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि पार्टी का नेतृत्व अब पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों से दूर हो गया है और सत्ता के केंद्रीकरण की ओर बढ़ गया है। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब की राजनीति को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि राज्य की सरकार पर रिमोट कंट्रोल की तरह नियंत्रण रखा जा रहा है, जिससे शासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मालीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में भ्रष्टाचार, अवैध गतिविधियां और नशे से जुड़े मुद्दे बढ़ रहे हैं, जिन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है, जहां एक ओर इन आरोपों को लेकर बहस तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर इसके दूरगामी राजनीतिक असर को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
मैं मजबूरी में BJP में नहीं जा रहा हूं – अरविंद केजरीवाल
आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए राज्यसभा सांसद Swati Maliwal ने आरोप लगाया कि पंजाब में अवैध रेत खनन और नशीली दवाओं का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और इन सब पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा, जिससे शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर कई बार आवाज उठाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई, जिससे उनका भरोसा पार्टी से धीरे-धीरे खत्म होता गया। मालीवाल ने अपने राजनीतिक फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना उनकी मजबूरी नहीं बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया वैचारिक निर्णय है। उन्होंने Narendra Modi के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली नेता बताया और कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने कई बड़े फैसले और बदलाव देखे हैं, जिनमें महिला सशक्तिकरण से जुड़े कदम और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े प्रयास शामिल हैं। मालीवाल के अनुसार, वे ऐसे नेतृत्व का हिस्सा बनना चाहती हैं जो विकास, स्थिरता और मजबूत नीतियों पर काम करता हो, और इसी विश्वास के चलते उन्होंने भाजपा का दामन थामा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है और इसे लेकर विभिन्न दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।










