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गुरदासपुर में शिक्षक की हैवानियत, 9 साल के छात्र को प्लास्टिक विकेटों से पीटने का आरोप

पंजाब के गुरदासपुर जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर 5वीं कक्षा में पढ़ने वाले 9 साल के छात्र को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। परिवार का आरोप है कि शिक्षक ने बच्चे को प्लास्टिक की विकेटों से मारा, जिससे उसकी पीठ और शरीर पर कई चोटों के निशान पड़ गए।

घटना का खुलासा उस समय हुआ जब बच्चा स्कूल से घर लौटने के बाद कपड़े बदल रहा था। तभी उसकी मां की नजर उसकी पीठ पर पड़े नीले निशानों पर पड़ी। पहले तो बच्चा डर के कारण चुप रहा, लेकिन बाद में मां के पूछने पर उसने पूरी घटना बताई।

जानकारी के अनुसार पीड़ित छात्र गुरदासपुर जिले के कस्बा दोरांगला के गांव गंजी स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है। वह 5वीं कक्षा का छात्र है। परिवार के मुताबिक स्कूल के बाहर कुछ बच्चे खेलते समय शरारत कर रहे थे। इसी दौरान एक महिला टीचर ने बच्चों को देख लिया और इसकी शिकायत शिक्षक संदीप से कर दी।

आरोप है कि इसके बाद शिक्षक संदीप ने बच्चे को बुलाया और सजा देने के नाम पर उसे प्लास्टिक की क्रिकेट विकेटों से पीटना शुरू कर दिया। इससे बच्चे की पीठ, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। बच्चे की पीठ पर पड़े नीले निशान साफ दिखाई दे रहे थे।

परिवार का कहना है कि बच्चा घटना के बाद बेहद डरा हुआ घर पहुंचा और उसने किसी को कुछ नहीं बताया। बच्चे की मां जसमीत ने बताया कि उनका बेटा घर आने के बाद काफी सहमा हुआ लग रहा था और सामान्य दिनों की तरह बात नहीं कर रहा था।

जब रात को उन्होंने बच्चे के कपड़े बदले, तब उन्हें पीठ पर कई जगह चोट के निशान दिखाई दिए। पूछने पर बच्चा पहले कुछ नहीं बोला, लेकिन बाद में रोते हुए उसने बताया कि स्कूल में शिक्षक ने उसे पीटा है।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि शिक्षक ने बच्चे को धमकी दी थी कि अगर उसने घर जाकर किसी को कुछ बताया तो उसका नाम स्कूल से काट दिया जाएगा। इसी डर की वजह से बच्चा घर में चुप रहा।

बच्चे की मां ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब शिक्षक ने उनके बेटे को मारा हो। उनका कहना है कि इससे पहले भी इसी शिक्षक ने बच्चे की पिटाई की थी, जिससे उसकी आंख और कान के पास चोट लगी थी। उस समय शिक्षक ने माफी मांग ली थी, इसलिए परिवार ने मामला आगे नहीं बढ़ाया था।

लेकिन अब दोबारा गंभीर मारपीट की घटना सामने आने के बाद परिवार ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद परिवार और गांव के कुछ लोग स्कूल पहुंचे, लेकिन आरोपी शिक्षक वहां नहीं मिला। बताया जा रहा है कि शिकायत की जानकारी मिलते ही वह स्कूल से गायब हो गया।

गांव के लोगों और समाजसेवियों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि अगर बच्चा शरारत कर रहा था तो स्कूल प्रशासन को परिवार को बुलाकर बात करनी चाहिए थी। बच्चों को इस तरह पीटना किसी भी हालत में सही नहीं है।

परिवार बच्चे को साथ लेकर बाल विकास विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पहुंचा, जहां लिखित शिकायत दी गई। अधिकारियों को बच्चे की चोटें भी दिखाई गईं।

बाल विकास विभाग के अधिकारी रतन लाल ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी और स्कूल प्रबंधन से भी जवाब मांगा जाएगा।

जिला शिक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग स्कूल प्रशासन से रिपोर्ट मांगेगा और आरोपी शिक्षक का पक्ष भी सुना जाएगा। यदि आरोप सही पाए गए तो शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन या नौकरी से हटाने तक की कार्रवाई हो सकती है।

गौरतलब है कि स्कूलों में बच्चों को शारीरिक सजा देने पर पहले से रोक है। कानून के अनुसार किसी भी शिक्षक को बच्चे को मारने, डराने या मानसिक प्रताड़ना देने का अधिकार नहीं है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की मारपीट बच्चों के मानसिक विकास पर गहरा असर डालती है। बच्चा स्कूल जाने से डर सकता है, पढ़ाई से दूरी बना सकता है और मानसिक तनाव का शिकार हो सकता है।परिवार ने मांग की है कि आरोपी शिक्षक को तुरंत नौकरी से हटाया जाए और बच्चे को न्याय दिलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे के साथ ऐसी घटना न हो।अब इस मामले में सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है कि आरोपी शिक्षक पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित बच्चे को कब न्याय मिलता है।

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