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Nitish का दांव श्रवण कुमार बने जेडीयू नेता

नीतीश ने श्रवण कुमार पर विश्वास जताया, जेडीयू विधायक दल का प्रमुख बनाकर कई रणनीतियों को साधा। जेडीयू विधायक दल का प्रमुख श्रवण कुमार को नियुक्त किया गया है, जिनका नाम नीतीश कुमार ने स्वयं घोषित किया है। नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद विधानमंडल के नेता चुनाव होना था, जिसका नाम तय हो गया है. नीतीश कुमार ने भले ही मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन वे बिहार की राजनीति में अपनी प्रभावशाली भूमिका बनाए रखना चाहते हैं। इसी कारण नीतीश कुमार ने श्रवण कुमार को, जो उनके सबसे निकट और विश्वसनीय माने जाते हैं, जेडीयू विधायक दल का नेता बनाया है। श्रवण कुमार के माध्यम से नीतीश कुमार ने एक ही तीर से कई समीकरणों को साधने का प्रयास किया है. बिहार की राजनीति में श्रवण कुमार एक स्थिर पहचान रखते हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर पांच दशक पहले नीतीश कुमार के साथ आरंभ किया था. नीतीश का गृह जिला नालंदा है और वह कुर्मी जाति से संबंध रखते हैं। नीतीश कुमार ने दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यसभा में जाने का निर्णय लिया। बीजेपी नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जेडीयू के हिस्से से दो डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव नियुक्त किए गए हैं। इस स्थिति में नीतीश कुमार ने श्रवण कुमार को जेडीयू विधायक दल का नेता बनाकर एक बड़ा कदम उठाया है।

श्रवण कुमार जेडीयू विधायकों के दल के नेता नियुक्त हुए।

जेडीयू के विधायकों की सोमवार को पटना में नीतीश कुमार के घर पर बैठक आयोजित की गई थी. इस दौरान जेडीयू के सभी विधायकों ने संयुक्त रूप से विधायक दल के नेता चुनने का कार्य नीतीश कुमार को सौंप दिया था. इसके बाद सभी की उत्सुकता थी कि नीतीश कुमार द्वारा चुना गया नेता कौन होगा? नीतीश कुमार के विधान परिषद और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जेडीयू विधानमंडल दल का नेता पद रिक्त हो गया है। इस स्थिति में कई नामों पर चर्चा चल रही थी, लेकिन नीतीश कुमार ने अपने पुराने साथी और करीबी नेता श्रवण कुमार को जेडीयू विधायक दल का नेता नियुक्त कर दिया है। नीतीश कुमार के सबसे विश्वसनीय नेता श्रवण कुमार माने जाते हैं।

श्रवण कुमार कौन हैं जो जेडीयू में दूसरे स्थान पर आए हैं?

श्रवण कुमार बिहार की राजनीति में एक पहचान बनाने वाला चेहरा हैं और जेडीयू के वयोवृद्ध नेताओं में से एक हैं. श्रवण कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पचास साल पहले की थी। श्रवण कुमार की राजनीतिक यात्रा 1974 में जयप्रकाश नारायण के निर्देशन में चले जेपी आंदोलन से आरंभ हुई, जिसमें नीतीश कुमार भी मुख्य रूप से भागीदार थे। इसके बाद नीतीश श्रवण कुमार के राजनीतिक संबंध काफी सुदृढ़ हो गए, जो अभी भी कायम हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निकटतम और विश्वसनीय जदयू नेताओं में से एक हैं। श्रवण कुमार 1995 से नालंदा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक हैं और वे ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री रह चुके हैं। नीतीश कुमार के दृढ़ समर्थक के रूप में, उन्होंने बिहार में जदयू के संगठन को सुदृढ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समता पार्टी के समय से ही वो नीतीश कुमार के साथ मिलकर राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने 1995 से अब तक नालंदा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक पद प्राप्त किया है, जो उनकी मजबूत स्थानीय पकड़ को दर्शाता है।

नीतीश कुमार ने कुर्मी समुदाय को भेजा संदेश

नीतीश कुमार कुर्मी समुदाय से हैं, जिसे जेडीयू का मुख्य वोटबैंक माना जाता है। नीतीश कुमार कुर्मी वोटों के सहारे दो दशकों तक सत्ता में रहे, लेकिन अब वे राज्यसभा के लिए चयनित हो गए हैं। इस स्थिति में उन्होंने जेडीयू के हिस्से से जिन दो नेताओं को डिप्टीसीएम नियुक्त किया है, उनमें से एक यादव और दूसरा भूमिहार समुदाय से है. इस परिस्थिति में कुर्मी वोटों को सुरक्षित रखने के लिए नीतीश कुमार ने श्रवण कुमार पर विश्वास किया है, जो उनके सबसे नजदीकी और विश्वासपात्र माने जाते हैं। श्रवण कुमार केवल नीतीश कुमार के सामुदायिक नहीं बल्कि नालंदा जिले से भी संबंध रखते हैं। 2005 में नीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद श्रवण कुमार जेडीयू के प्रमुख सचेतक बने रहे हैं। उन्हें 2005 में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला, और 2014 में जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने, तब भी उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। इस पर नाराज श्रवण कुमार ने सरकारी गाड़ी वापस कर दी थी। बाद में जब मांझी ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, तो उन्हें मंत्री नियुक्त किया गया। उन्हें ग्रामीण कार्य, ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य मंत्रालय सौंपा गया। उन्होंने मंत्री बनने के बाद अपने विभाग में इतने विकास कार्य किए कि बजट की सारी राशि समाप्त हो गई। इसके बाद नीतीश का विश्वास हमेशा बना रहा, जिसका परिणाम है कि उन्होंने जेडीयू में महत्वपूर्ण भूमिका दी है।

 

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