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Karnataka MLC चुनाव में क्रॉस वोटिंग के संकेत, सियासी हलचल तेज

Karnataka में विधान परिषद (MLC) की 7 सीटों के लिए जारी मतदान के दौरान सियासी हलचल तेज हो गई है, जहां भाजपा के दो विधायक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ एक तस्वीर में नजर आए। इस तस्वीर के सामने आने के बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका और राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। बताया जा रहा है कि मतदान के दिन भाजपा विधायक एसटी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार का मुख्यमंत्री के साथ दिखना विपक्षी खेमे के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। इस घटनाक्रम को लेकर यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस इस समीकरण का फायदा उठाकर काउंसिल में अपनी एक अतिरिक्त सीट सुरक्षित करने की कोशिश में जुटी है, जिससे चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।

डीके के सीएम बनने के बाद यह पहली चुनावी लड़ाई

कर्नाटक में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पदभार संभालने के बाद यह चुनाव सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। इस बीच विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए विधानसभा के सदस्य विधान सौध में मतदान कर रहे हैं। मतदान प्रक्रिया के दौरान भाजपा के दो विधायकों का मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ एक साथ नजर आना राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। इस तस्वीर को लेकर क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं और बदलते सियासी समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

 

हर उम्मीदवार को जीत के लिए चाहिए 28 विधायक

मतदान प्रक्रिया सुबह 9 बजे शुरू हुई और शाम 4 बजे तक जारी रहेगी जिसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी प्रत्येक उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए कम से कम 28 विधायकों के वोट प्राप्त करना आवश्यक है मौजूदा विधानसभा में दलों की संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस चार चार और दो सीटें जीतने की संभावना मजबूत मानी जा रही है क्रॉस वोटिंग और बदलते राजनीतिक समीकरण इस पूरे चुनाव को और अधिक अनिश्चित और दिलचस्प बना रहे हैं |

डीके ने पांचवीं सीट जीतने की जुगत लगा ली

कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों को लेकर सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां सातवीं सीट पर सबसे ज्यादा टकराव देखने को मिल सकता है। इस सीट पर कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे मुकाबला और अधिक जटिल हो गया है। किसी भी एक पार्टी के पास इस सीट पर स्पष्ट बहुमत नहीं है, जिसके चलते परिणाम काफी हद तक क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर निर्भर कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में सत्तारूढ़ कांग्रेस इस चुनाव को बेहद रणनीतिक तरीके से लड़ रही है और अतिरिक्त सीट हासिल करने की कोशिश में जुटी है। पार्टी का फोकस निर्दलीय विधायकों और भाजपा से असंतुष्ट नेताओं के समर्थन को अपने पक्ष में करने पर है, ताकि सात में से पांच सीटों तक पहुंच बनाई जा सके। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और भी रोमांचक बना दिया है, जहां हर वोट और हर राजनीतिक गठजोड़ निर्णायक साबित हो सकता है।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के उम्मीदवार

चुनावी क्षेत्र में कांग्रेस के टी. कामकनूर, पी वी मोहन, बी.के. हरिप्रसाद (प्रदेश अध्यक्ष), शिवन्ना बी.एस. एवं विनय कार्तिक प्रकाश मौजूद हैं. भाजपा की तरफ से लिंगराज पाटिल और रघु आर तथा जद(एस) की ओर से गोविंदराजू चुनाव में हैं. कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 134, भाजपा के 62 और जद(एस) के 18 विधायक हैं। इसके अतिरिक्त कल्याण राज्य प्रगति पक्ष और सर्वोदय कर्नाटक पक्ष का एक-एक सदस्य, दो निर्दलीय, तीन असंबद्ध सदस्य और अध्यक्ष मौजूद हैं। दो सीटें खाली हैं। कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों के लिए 8 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं और मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। मतदान सुबह 9 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक चलेगा, जबकि मतगणना शाम 5 बजे से प्रारंभ होगी। इस चुनाव पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें केंद्रित हैं। हर उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 28 विधायकों के वोट की जरुरत होगी। विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा को क्रमशः चार-चार सीटें मिलने की संभावना पहले से थी, लेकिन अब समीकरण में बदलाव देखने को मिल रहा है। सबसे अधिक चर्चा सातवीं सीट को लेकर है, जहां मुकाबला बेहद कड़ा बताया गया है। कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने अपने-अपने उम्मीदवार पेश किए हैं, लेकिन किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत न होने के कारण यह सीट निर्णायक बन गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस ने इस चुनाव को अपनी पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा है। हाल में सत्ता परिवर्तन के बाद यह चुनाव सरकार की मजबूती का संकेत भी माना जा रहा है।
कांग्रेस ने निर्दलीय और असंतुष्ट विधायकों को एकजुट करने की योजना बनाई है, ताकि अतिरिक्त सीट पर जीत हासिल की जा सके। माना जा रहा है कि क्रॉस वोटिंग इस योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भाजपा में इस स्थिति के सामने आने के बाद हलचल बढ़ गई है और पार्टी नेतृत्व अपने विधायकों के एकजुटता को लेकर सतर्क हो गया है। दो विधायकों का मुख्यमंत्री के साथ होने से विपक्ष के लिए असहजता बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि क्रॉस वोटिंग होती है, तो इसका असर राज्य की राजनीति पर भविष्य में भी पड़ सकता है। इस उच्च-दाब चुनावी मुकाबले ने कर्नाटक की राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है, जहां हर वोट और हर विधायक की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।

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