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दिल्ली ब्लास्ट: पाकिस्तान से डॉक्टर को ऑनलाइन बम ट्रेनिंग

दिल्ली ब्लास्ट केस में आज जांच एजेंसियों ने सबसे बड़ा खुलासा किया है। पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर ने भारत में बैठे आरोपी डॉक्टर को बम बनाने की पूरी ट्रेनिंग ऑनलाइन दी थी। पाकिस्तान में बैठे जैश हैंडलर हंजुल्ला ने दिल्ली धमाके के मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनई को बम बनाने के चालीस वीडियो भेजे थे, जिनमें विस्फोटक तैयार करने की तकनीक, केमिकल प्रोसेसिंग, टाइमिंग सेट करना और ब्लास्ट की क्षमता बढ़ाने तक की जानकारी दी गई थी
ये खुलासा दिखाता है कि दिल्ली ब्लास्ट कोई छोटी स्थानीय साजिश नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान से सीधी निगरानी में एक हाई-टेक आतंकी प्लान बनाया जा रहा था।
इस मॉड्यूल को जोड़ने का काम शोपियां (कश्मीर) के मौलवी इरफान अहमद ने किया था। उसने पाकिस्तान के हैंडलर और भारतीय डॉक्टर को मिलाकर पूरे नेटवर्क की शुरुआत करवाई।
इस मॉड्यूल की खास बात यह है कि इसमें आतंकवादी कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा प्राप्त डॉक्टर शामिल थे—
यानी वही लोग जो लोगों की जान बचाते हैं, वे यहां बम बनाने की ट्रेनिंग ले रहे थे।
जांच में पता चला कि इस पूरे मॉड्यूल का आधा ऑपरेशन फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज से चलता था।
जांच में पता चला है कि इस मॉड्यूल का आधा संचालन फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज से होता था। यहाँ से—केमिकल चोरी किए जाते थे  छात्रों को बरगलाया जाता था   फंडिंग का इंतजाम होता थानए लोगों की भर्ती की जाती थी

इस मॉड्यूल की तीन मुख्य कड़ियां थीं

1. डॉ. मुजम्मिल – भर्ती करता था, कमजोर लोगों को फंसाता था
2. डॉ. शाहीन सईद – ब्रेनवॉश, पैसों का वितरण, महिला टीम बनाने की कोशिश
3. डॉ. उमर नबी – ब्लास्ट प्लानर, बम बनाने का मास्टरमाइंड (धमाके में मारा गया)
टैक्सी ड्राइवर कैसे फंसा मॉड्यूल में?
जांच एजेंसियां हैरान हैं कि एक टैक्सी ड्राइवर भी इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया।
• उसका बेटा अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से इलाज करवा रहा था  इसी दौरान मुजम्मिल से दोस्ती हुई  डॉक्टर ने उसे भरोसे में लिया
• और फिर उसके घर मॉड्यूल की मशीनें छिपा दी गईं
• ड्राइवर को कहा गया कि यह “बहन के दहेज का सामान” है
ड्राइवर खुद नहीं जानता था कि उसके घर में बम बनाने की मशीन रखी गई
डॉ. शाहीन की महिला आतंकी टीम
NIA को शाहीन की डायरी मिली है जिसमें—
कई लड़कियों के नाम
उनका बैकग्राउंड कैसे उन्हें आतंकी मॉड्यूल में शामिल करना है    सब लिखा हुआ था।
शाहीन खुद टीम नहीं बना पाई, इसलिए उसने जिम्मेदारी डॉ. मुजम्मिल को दे दी    अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर सख्त नज़र
इस यूनिवर्सिटी के करीब 200 डॉक्टर और स्टाफ अब जांच के घेरे में हैं।
पंजाब पुलिस भी जांच में शामिल हो गई है क्योंकि पठानकोट से पकड़ा गया एक डॉक्टर भी इसी यूनिवर्सिटी से जुड़ा है।
क्या बताता है यह पूरा मामला?
यह केस सिर्फ एक धमाके की जांच नहीं है। यह दिखाता है कि—आतंक का तरीका बदल चुका है दुश्मन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है   पाकिस्तान सीधे लाइव वीडियो से ट्रेनिंग दे रहा है आतंकी अब डॉक्टर, लैब, कॉलेज और अस्पतालों में छुप रहे हैं      यानी आने वाले समय में सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती और भी बड़ी होगी।

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