मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लखनऊ, कोलकाता और देहरादून समेत कई जगहों पर पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर नजर आए।दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई। वहीं जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए बैनर दिखाए। विधायकों ने ‘वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ और ‘निष्पक्ष चुनाव के बिना लोकतंत्र नहीं’ जैसे नारे लगाए।
कई राज्यों में प्रदर्शन
चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पंजाब कांग्रेस ने भी चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। उत्तराखंड के देहरादून में कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।असम में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गौरव गोगोई को हिरासत में लिया।हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यालय के बाहर लगे आधिकारिक बोर्ड पर कालिख पोतने की घटना भी सामने आई।

आखिर SIR को लेकर विवाद क्या है?
कांग्रेस के इन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में SIR से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी।रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया और मतदाता सूची के डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
वहीं चुनाव आयोग ने इन खबरों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है।आयोग के मुताबिक, उसके सभी आदेशों को कानूनी समर्थन प्राप्त है और उन्हें निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किया गया है। आयोग ने यह भी कहा कि केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनाव प्रणाली में सुधार को लेकर अपने सुझाव देने के लिए अधिकृत है।यानी SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस जहां चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों पर सवाल उठा रही है, वहीं आयोग अपने आदेशों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाने की बात कह रहा है।









