नई दिल्ली: ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हमामी को लेकर सामने आई जानकारी ने एविएशन सिक्योरिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब तीन साल पहले उसके कट्टरपंथी समूहों से प्रभावित होने के संकेत मिले थे। इसके बाद उसकी फ्लाइट ट्रेनिंग रोक दी गई थी। हालांकि, बाद में वह दोबारा एविएशन सेक्टर में काम करने लगा और सह-पायलट तक पहुंच गया।
अब कथित सोशल मीडिया पोस्ट और अलकायदा से जुड़े संकेतों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उसके बारे में पहले ही चिंताजनक संकेत सामने आ चुके थे, तो बाद में उसे कॉकपिट तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली?
तीन साल पहले रोकी गई थी फ्लाइट ट्रेनिंग
रिपोर्ट के मुताबिक, 29 वर्षीय हमाम अल-हमामी ने 2024 में ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन के साथ प्रशिक्षु के तौर पर काम किया था। सीरिया में बिताए समय के दौरान उसके कट्टरपंथी समूहों से प्रभावित होने को लेकर चिंताएं सामने आई थीं।इसके बाद उसे उड़ान से जुड़ी ट्रेनिंग से हटा दिया गया और प्रशासनिक काम में स्थानांतरित कर दिया गया।यहीं से सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर उस समय उसके बारे में कट्टरपंथ से जुड़े संकेत मिले थे, तो बाद में उसकी दोबारा जांच किस स्तर पर हुई?
सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई चिंता
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, हमले के करीब नौ घंटे बाद हमाम की पहचान से मेल खाने वाले एक लिंक्डइन पेज पर कुछ पोस्ट किए गए।इनमें बोइंग 737 मैक्स विमान के कॉकपिट से बनाए गए वीडियो शामिल थे। एक वीडियो में दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इजरायली एयरलाइन एल अल के विमान को दिखाए जाने का दावा किया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य क्लिप में एल अल के दूसरे विमानों के साथ इजरायली एयरलाइन आर्किया का विमान भी दिखाई दिया।इन पोस्ट्स में अलकायदा के पूर्व नेता अयमान अल-जवाहिरी से जुड़ी तस्वीर भी दिखाई गई थी। इन गतिविधियों को लेकर अब हमाम के कथित आतंकी कनेक्शन की जांच पर सवाल उठ रहे हैं।
फ्लाईदुबई की सुरक्षा जांच पर भी सवाल
रिपोर्ट में एक खाड़ी राजनयिक के हवाले से बताया गया है कि फ्लाईदुबई में नौकरी देने से पहले हमाम की सामान्य सुरक्षा जांच की गई थी।हालांकि, दावा है कि यह जांच मुख्य रूप से आपराधिक रिकॉर्ड पर केंद्रित थी और कट्टरपंथ के संकेतों की गहराई से पड़ताल नहीं की गई।यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि एविएशन सेक्टर में भर्ती के दौरान सुरक्षा जांच का दायरा कितना व्यापक होना चाहिए।
मेडे कॉल को लेकर भी सामने आई जानकारी
रिपोर्ट में एक व्यक्ति के हवाले से बताया गया है कि घटना के दौरान पायलट की आवाज में घबराहट थी और उसने मेडे कॉल के जरिए विमान के अपहरण की बात कही थी।रिपोर्ट के अनुसार, विमान को लैंड कराने को लेकर सऊदी अरब और जॉर्डन से संपर्क किया गया, लेकिन उसे वहां उतरने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद विमान को वापस सऊदी अरब की ओर ले जाया गया।इस पूरे घटनाक्रम ने विमान सुरक्षा और आपात स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
ब्रिटेन से एविएशन मैनेजमेंट की पढ़ाई
हमाम अल-हमामी ने ब्रिटेन की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से तीन साल का डिस्टेंस-लर्निंग कोर्स किया था। उसने 2023 में एविएशन मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की थी।अब उसकी शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि के साथ-साथ कथित कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर भी जांच के सवाल उठ रहे हैं।इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि अगर हमाम के बारे में पहले ही सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आ गई थीं, तो उसके बाद की जांच में क्या हुआ?क्या अलग-अलग एजेंसियों के बीच जानकारी साझा नहीं हुई?क्या शुरुआती चेतावनियों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया?या फिर सुरक्षा जांच की प्रक्रिया में कोई कमी रह गई?फिलहाल, सामने आई रिपोर्ट्स के आधार पर इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। मामले की पूरी तस्वीर आधिकारिक











