पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ को लेकर पंजाब और हरियाणा माननीय हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई। योजना के तहत पंजाब की पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, अब इस योजना के नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर माननीय हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है।मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की बेंच के सामने हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से योजना की शुरुआत और इसमें रखी गई कुछ शर्तों को लेकर सवाल उठाए गए। खास तौर पर योजना का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य किए जाने का मुद्दा अदालत के सामने रखा गया।
क्या है मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना?
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना के तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।याचिका में दी गई जानकारी के अनुसार, योजना के तहत:एससी वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माहअन्य पात्र महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माहकी आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।योजना को लेकर अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में योजना के नोटिफिकेशन और इसकी कुछ शर्तों को चुनौती दी गई है।
किसने दायर की जनहित याचिका?
पारदर्शिता और जनहित के लिए काम करने वाली संस्था ‘हरबख्श चैरिटेबल सोसाइटी’ की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में योजना के उद्देश्य और इसे लागू करने के तरीके को लेकर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता के वकील वरुण दत्ता और करण भारद्वाज ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं।याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि सरकार ने यह योजना 2 अप्रैल को जारी की थी और इसका उद्देश्य सत्ताधारी पक्ष के समर्थन में वोट हासिल करना है।हालांकि, यह याचिकाकर्ता की ओर से लगाया गया आरोप है। पंजाब सरकार की ओर से इन दावों का विरोध किया गया है और मामले में सरकार का पक्ष अभी अदालत के सामने विस्तार से आना बाकी है।
वोटर आईडी कार्ड को लेकर क्यों उठे सवाल?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा योजना का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य किए जाने को लेकर है।याचिका में योजना की धारा 9 का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, योजना का लाभ लेने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी पंजाब राज्य का वोटर आईडी कार्ड जरूरी किया गया है।याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य सरकारी दस्तावेज जैसे पहचान पत्र उपलब्ध हैं। ऐसे में केवल वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य करने पर सवाल उठाया गया है।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य किए जाने से यह सवाल उठता है कि क्या योजना के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।हालांकि, इस मामले में अभी अदालत की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल अदालत में पेश हुए। सरकार की ओर से याचिकाकर्ता के आरोपों का विरोध किया गया।सरकार ने अदालत से जवाब देने के लिए समय मांगा, ताकि संबंधित विभाग और अधिकारियों से आवश्यक निर्देश प्राप्त किए जा सकें।सरकार की ओर से विशेष रूप से यह स्पष्ट करने के लिए समय मांगा गया कि योजना का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य क्यों किया गया है।हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की ओर से समय मांगे जाने की मांग को स्वीकार कर लिया।माननीय हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।अब अगली सुनवाई में पंजाब सरकार की ओर से वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य करने की वजह और योजना से जुड़े अन्य सवालों पर अपना पक्ष रखा जा सकता है।इसके बाद अदालत याचिकाकर्ता की दलीलों और सरकार के जवाब पर विचार करेगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने इस योजना पर रोक लगाने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत में योजना के नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई जारी है।इसलिए योजना को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई और उसके आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में पंजाब सरकार की ओर से योजना की शर्तों और विशेष रूप से वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य किए जाने के संबंध में अपना पक्ष रखा जा सकता है।इसके बाद हाईकोर्ट मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा। फिलहाल मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना को लेकर कानूनी मामला अदालत में विचाराधीन है और इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।पंजाब सरकार की मावां धीयां सत्कार योजना को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अगली तारीख 5 अक्टूबर तय की गई है। याचिका में योजना के उद्देश्य और लाभ लेने के लिए वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य करने पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि पंजाब सरकार ने इन दलीलों का विरोध किया है और इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। अब सभी की नजरें 5 अक्टूबर की अगली सुनवाई पर रहेंगी।









