BREAKING

AMERICAIranWorld News

Iran पर दबाव के बीच अमेरिका का बड़ा एक्शन चीन की रिफाइनरी और 40 शिपिंग कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध

ईरान से जंग के बीच अमेरिका का बड़ा एक्शन, चीन की रिफाइनरी पर लगाया प्रतिबंध, डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों लिया ये फैसला? ईरान पर दबाव बढ़ाने की मुहिम के बीच अमेरिका ने चीन में स्थित एक रिफाइनरी और ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. आगे भी इसी तरह की कार्रवाई की बात कही गई है. ईरान से जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाड़ सख्त एक्शन लिया है. अमेरिका ने चीन में स्थित एक रिफाइनरी और ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. इसका मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है. अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने कहा कि उसके ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) ने ‘हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी कंपनी लिमिटेड’ पर कार्रवाई की है साल 2026 में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव एक नए स्तर पर पहुंच चुका है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक दबाव और तेज करते हुए चीन में स्थित एक बड़ी रिफाइनरी और ईरानी तेल व्यापार से जुड़े लगभग 40 शिपिंग कंपनियों व जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इन संस्थाओं पर आरोप है कि वे ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को खरीदकर वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही थीं, जिससे ईरान को अरबों डॉलर की आय प्राप्त हो रही थी।

ईरान के तेल नेटवर्क पर अमेरिका का बड़ा वार चीन की रिफाइनरी और शैडो फ्लीट पर सख्त प्रतिबंध

अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य ईरान के उस वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करना है, जिससे वह अपने सैन्य और क्षेत्रीय गतिविधियों को संचालित करता है। विशेष रूप से चीन की “टीपॉट रिफाइनरियों” पर कार्रवाई को एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि ये कंपनियां सस्ते ईरानी तेल की प्रमुख खरीदार रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक प्रमुख चीनी रिफाइनरी ने पिछले कुछ वर्षों में ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता मिली। इसके अलावा अमेरिका ने उन लगभग 19 जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाया है, जिन्हें ईरान के “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माना जाता है। ये जहाज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तेल और गैस की आपूर्ति करते हैं और अक्सर अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने के लिए गुप्त तरीकों का उपयोग करते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क ईरान को प्रतिबंधों के बावजूद अपनी ऊर्जा निर्यात गतिविधियां जारी रखने में मदद करता है।

ईरान के तेल नेटवर्क पर अमेरिका की सख्ती 40 शिपिंग कंपनियों और शैडो फ्लीट पर बड़ा एक्शन

विभाग के अनुसार, यह कंपनी ईरान से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वालों में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, आर्थिक सख्ती ईरानी शासन पर वित्तीय शिकंजा कस रही है, मध्य पूर्व में उसकी आक्रामकता को रोक रही है और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाने में मदद कर रही है. इस कार्रवाई में करीब 40 शिपिंग कंपनियों और जहाजों को भी निशाना बनाया गया है, जो ईरान के तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माने जाते हैं. अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल आर्थिक दबाव बनाना नहीं है, बल्कि ईरान के उस पूरे नेटवर्क को कमजोर करना है जो प्रतिबंधों के बावजूद तेल निर्यात को जारी रखने में मदद करता है। इस कार्रवाई के तहत संबंधित कंपनियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां फ्रीज कर दी जाती हैं और अमेरिकी नागरिकों या कंपनियों के साथ व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाता है। साथ ही, जो विदेशी संस्थाएं इन गतिविधियों में सहयोग करती हैं, उन्हें भी द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनका वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने क्या बताया?

अमेरिका का कहना है कि ईरान से जुड़े कई जहाज और नेटवर्क तेल तथा पेट्रोकेमिकल उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाकर वहां की सरकार को वित्तीय लाभ पहुंचा रहे हैं। इसी पर कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया है कि डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ऐसे सभी जहाजों, बिचौलियों और खरीदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे जो ईरानी तेल को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद करते हैं। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति या जहाज को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।

19 और जहाजों पर लगा प्रतिबंध 

ट्रेजरी अधिकारियों ने बताया कि चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स के नाम से जाना जाता है, ईरान के कच्चे तेल का अधिकांश हिस्सा खरीदती हैं. इनमें हेंगली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है, जिसने ईरान से अरबों डॉलर का तेल खरीदा है. बयान में कहा गया है कि हेंगली ने ‘सेपेहर एनर्जी जहान नामा पार्स कंपनी’ के ज़रिए प्रतिबंधित जहाजों और ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ से जुड़े शिपमेंट प्राप्त किए हैं, जिससे ईरानी सेना के लिए करोड़ों डॉलर का राजस्व उत्पन्न हुआ है. इसके अलावा, अमेरिका ने 19 और जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं. इन पर आरोप है कि ये जहाज ईरान का कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाते थे.

क्या होता है अमेरिकी प्रतिबंध?

अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के अनुसार, फरवरी 2025 से अब तक ईरान से जुड़े 1,000 से अधिक व्यक्तियों, संस्थाओं, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। इन प्रतिबंधों के तहत जिन भी इकाइयों को सूची में शामिल किया जाता है, उनकी अमेरिका में मौजूद संपत्तियां तुरंत फ्रीज कर दी जाती हैं। साथ ही अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए उनके साथ किसी भी प्रकार का वित्तीय या व्यावसायिक लेन-देन करना प्रतिबंधित हो जाता है। इसके अलावा, यदि कोई विदेशी कंपनी या संस्था इन गतिविधियों में सहयोग करती है, तो उसे भी कड़े द्वितीयक प्रतिबंधों और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

Subscribe to Our Newsletter!

This will close in 0 seconds