स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम में तिरंगा फहराने के बाद वंदे मातरम् का गायन हुआ, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि गीत के दौरान इसे आगे गाने से रोकने की कोशिश की गई। इस मामले में सोनिया गांधी का नाम सामने आने के बाद सियासी बहस तेज हो गई। बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के दौरान सोनिया गांधी ने कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को गीत रोकने के लिए कहा। बीजेपी नेता ने इस दावे के आधार पर कांग्रेस से सवाल पूछे और इसे देशभक्ति से जुड़े मुद्दे के रूप में उठाया। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी इस मामले को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उनका दावा है कि वंदे मातरम् के शुरुआती हिस्से के बाद इसे आगे जारी रखने को लेकर आपत्ति जताई गई। उन्होंने राहुल गांधी के कथित इशारे का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि गीत को रोकने की कोशिश की गई। कांग्रेस ने बीजेपी के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के दौरान कोई व्यवधान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की एक ऐतिहासिक परंपरा रही है और इस गीत को लेकर पार्टी के भीतर कोई विवाद नहीं है। जयराम रमेश ने वंदे मातरम् से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई थी। उनके मुताबिक, उस बैठक में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। कांग्रेस का कहना है कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद गीत की शुरुआती पंक्तियों के इस्तेमाल की परंपरा अपनाई गई थी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी तरह की रुकावट नहीं हुई। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पार्टी का बचाव करते हुए कहा कि वंदे मातरम् को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। विवाद का एक दूसरा पहलू 2026 में सामने आए नए प्रोटोकॉल से जुड़ा है। वंदे मातरम् के छह अंतरे हैं और अब इन्हें लेकर सरकारी कार्यक्रमों में नए निर्देशों की चर्चा हो रही है। इसी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस की ओर से अलग-अलग राजनीतिक तर्क सामने आ रहे हैं। बीजेपी अपने आरोपों पर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम में गीत को रोकने जैसा कोई घटनाक्रम हुआ ही नहीं। ऐसे में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि को लेकर दोनों दलों के दावे आमने-सामने हैं। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मामले को लेकर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

कांग्रेस ने बीजेपी के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी तरह का व्यवधान नहीं हुआ। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की अपनी एक ऐतिहासिक परंपरा रही है और इस गीत को लेकर कोई विवाद नहीं है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस पूरे मामले पर पार्टी का पक्ष रखते हुए इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम् को लेकर चर्चा हुई थी। उस समय महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और अन्य प्रमुख नेता इस चर्चा का हिस्सा थे। जयराम रमेश ने कहा कि उस दौर में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह को भी ध्यान में रखा गया था। कांग्रेस का कहना है कि इसके बाद से पार्टी के विभिन्न अधिवेशनों और कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियों को गाने की परंपरा चली आ रही है। पार्टी ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर बीजेपी के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी कार्यक्रम के दौरान किसी तरह के व्यवधान की बात से इनकार किया। उनका कहना है कि कांग्रेस मुख्यालय में कार्यक्रम सामान्य तरीके से हुआ और वंदे मातरम् के गायन में किसी ने रुकावट नहीं डाली। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इसी तरह कांग्रेस का बचाव किया और कहा कि गीत को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वंदे मातरम् को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी नए प्रोटोकॉल का मुद्दा भी सामने आया है। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी लंबे समय से वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियों का इस्तेमाल करती रही है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस गीत को लेकर इतिहास, परंपरा और प्रोटोकॉल को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। इस पूरे मामले में दोनों दलों के बयान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। बीजेपी इसे राष्ट्रगान-सम्मान और देशभक्ति से जोड़कर कांग्रेस पर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस आरोपों को खारिज करते हुए अपनी ऐतिहासिक परंपरा का हवाला दे रही है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। वंदे मातरम् से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक मंचों पर और जोर पकड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है और इसी वजह से विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है।










