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Twisha Sharma मामला सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और CBI जांच की संभावना

Twisha Sharma की मौत से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए सभी पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस संवेदनशील मामले में जल्दबाजी में किसी भी तरह के बयान देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच को एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है। पीठ ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जल्द ही इस केस को अपने हाथ में लेकर गहन और निष्पक्ष जांच करेगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्यायिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे। अदालत ने दोनों पक्षों को सख्त निर्देश दिए कि वे मीडिया में किसी भी प्रकार के सार्वजनिक बयान देने से बचें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच जारी रहने के दौरान किसी भी प्रकार की टिप्पणी या आरोप-प्रत्यारोप से मामले की गंभीरता प्रभावित हो सकती है और इससे न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी की और कहा कि पत्रकारों को संवेदनशील मामलों में रिपोर्टिंग करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अदालत ने मीडिया से आग्रह किया कि वह केवल तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग करे और पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान बनाए रखे। इस मामले में वरिष्ठ वकील तुषार मेहता की ओर से भी पक्ष रखा गया, जिसमें उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ लोग जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि न्याय प्रक्रिया सर्वोपरि है और किसी भी तरह की जल्दबाजी या दबाव से बचना चाहिए। अदालत ने कहा कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है, और सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए।

CJI ने क्या कहा?

हमें दुख है जैसे मामले को हैंडल किया, हम अपने मीडिया दोस्तों से अनुरोध करेंगे कि वो घरवालों के बयानों के आधार पर मामले को तय ना करें, किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए, ऐसा प्रोजेक्ट किया जा रहा है जैसे न्यायपालिका मामले में दखल दे रही है, आरोपियों का इंटरव्यू क्यों किया जा रहा है, हम पुलिस का मोरल डाउन नहीं करना चाहते, राज्य ने सीबीआई जांच की मांग की है, हम खुद सीबीआई जांच के आदेश नहीं देना चाहते, यह आवश्यक है कि स्वयं जल्दी पहल की जाए।

मीडिया में बयान देने से बचें।

ट्विशा शर्मा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। अदालत को बताया गया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जल्द ही इस मामले की जांच अपने हाथ में ले सकती है। इस जानकारी को अदालत ने रिकॉर्ड में शामिल करते हुए मामले की गंभीरता को दोहराया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि जांच प्रक्रिया अब सीबीआई के अधीन जाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक है, ताकि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच हो सके। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि अदालत को भरोसा है कि सीबीआई जल्द ही जांच अपने हाथ में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी की भूमिका बेहद अहम है। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को सख्त निर्देश दिए कि वे मीडिया में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से बचें। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की संवेदनशील जांच के दौरान सार्वजनिक बयानबाजी से केस की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है और इससे न्याय प्रक्रिया पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी पक्षों को केवल जांच एजेंसी के समक्ष ही अपने बयान प्रस्तुत करने चाहिए। संभावित गवाहों और संबंधित व्यक्तियों को मीडिया से दूरी बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अटकलों से बचने की सख्त सलाह दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य सच्चाई तक पहुंचना है और इसके लिए सभी को सीबीआई पर भरोसा रखना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष परिणाम तभी संभव है जब सभी पक्ष संयम बरतें और जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करें।

न्यायपालिका के खिलाफ सवाल उठाना अनुचित है

ट्विशा शर्मा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग और सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चल रही जांच और संभावित मुकदमे पर किसी भी प्रकार का बाहरी प्रभाव स्वीकार्य नहीं होगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि मीडिया को संभावित गवाहों और अभियुक्तों के बयानों को बढ़ावा देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों को संयम रखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की टिप्पणियों और अटकलों से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं, जो एक गंभीर स्थिति है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं किसी भी पूर्व निर्धारित राय के आधार पर कार्य नहीं कर रही है और केवल तथ्यों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने अफसोस जताया कि इस मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक दबाव उत्पन्न हो रहा है। अदालत ने कहा कि इस तरह का माहौल न्याय के हित में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय केवल साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाएगा। इसलिए पहले से कोई राय बनाना या अनुमान लगाना उचित नहीं है और इससे बचना चाहिए।

सीबीआई की तरफ से तुषार मेहता पेश कर रहे हैं तर्क

ट्विशा शर्मा के परिवार ने मानसिक अत्याचार, दहेज की मांग और मामले को छिपाने के आरोप लगाए हैं। CJI सूर्य कांत ने इस मामले में रजिस्ट्री से रिपोर्ट की मांग की थी। मीडिया रिपोर्ट्स में उठते इन सवालों को लेकर रजिस्ट्री ने नोट CJI के सामने प्रस्तुत किया था। इसके संकेत पर CJI ने स्वयं संज्ञान लेकर पीठ बनाने का निर्णय लिया है। सीबीआई की तरफ से SG तुषार मेहता न्यायालय में उपस्थित हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आज सीबीआई मुकदमा दर्ज कर सकती है। DoPT से सूचना प्राप्त होते ही मामला दर्ज किया जाएगा।

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