अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के अवसर पर अंबाला में भाजपा जिलाध्यक्ष मनदीप राणा का एक अनोखा और सादगी भरा अंदाज देखने को मिला, जिसने सभी कार्यकर्ताओं का दिल जीत लिया। आमतौर पर राजनीतिक बैठकों और व्यस्त कार्यक्रमों में रहने वाले जिलाध्यक्ष का यह व्यवहार सभी के लिए एक सुखद आश्चर्य साबित हुआ। भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित इस मौके पर मनदीप राणा ने खुद ही चाय बनाने की जिम्मेदारी संभाल ली। जैसे ही वह कार्यालय की रसोई में पहुंचे, उन्होंने देखा कि वहां मौजूद कर्मचारी अवकाश पर हैं। इसके बाद उन्होंने बिना किसी झिझक के चाय बनाने का निर्णय लिया। जिलाध्यक्ष ने स्वयं गैस स्टोव जलाया, चायपत्ती और दूध मिलाया और पूरे मन से चाय तैयार करना शुरू किया। यह दृश्य देखकर कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ता हैरान रह गए और धीरे-धीरे वहां लोगों की भीड़ इकट्ठा होने लगी इस दौरान मनदीप राणा ने कार्यकर्ताओं के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत भी की और माहौल को पूरी तरह आत्मीय और पारिवारिक बना दिया। रसोई का माहौल किसी औपचारिक कार्यक्रम जैसा नहीं बल्कि एक परिवार के मिलन जैसा प्रतीत हो रहा था। चाय तैयार होने के बाद जिलाध्यक्ष ने स्वयं अपने हाथों से सभी कार्यकर्ताओं को चाय परोसी। उन्होंने हर एक कार्यकर्ता को मुस्कुराते हुए चाय का कप दिया, जिससे सभी बेहद प्रभावित हुए। कार्यकर्ताओं ने भी उनके इस व्यवहार की जमकर सराहना की।
इस मौके पर मनदीप राणा ने कहा कि चाय सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं है, बल्कि यह लोगों को जोड़ने का एक माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि चाय के साथ बातचीत का माहौल बनता है और आपसी संबंध और मजबूत होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाने का यह तरीका उन्हें अचानक ही सूझा, लेकिन इसका उद्देश्य यही था कि कार्यकर्ताओं के साथ एक आत्मीय पल साझा किया जाए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि इतने बड़े पद पर होने के बावजूद जिलाध्यक्ष का इतना सरल और जमीन से जुड़ा व्यवहार उनकी सबसे बड़ी पहचान है। उनके इस कदम ने सभी के बीच सकारात्मक संदेश दिया। पूरे दिन इस घटना की चर्चा भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच होती रही। कई लोगों ने इसे नेतृत्व का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया, जिसमें पद से अधिक अपनापन और मानवीयता को महत्व दिया गया। मनदीप राणा रोजाना की तरह भाजपा जिला कार्यालय पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि वह सीधे अपने कार्यालय कक्ष में जाएंगे, लेकिन इस बार उनका कदम कार्यालय की रसोई की ओर बढ़ गया। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि रसोई में कार्यरत कर्मचारी आज अवकाश पर है। ऐसे में उन्होंने बिना देर किए खुद ही जिम्मेदारी संभाल ली।













