George Kurian ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने मंजूरी दी

PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी प्रदान कर दी है। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह फैसला सामने आया है। जॉर्ज कुरियन लंबे समय से सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे थे और उनके इस्तीफे के बाद मंत्रालय से जुड़े कार्यों के पुनर्गठन की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रपति ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है. राज्यसभा का कार्यकाल उनका खत्म हो गया है और बीजेपी ने उन्हें एक और मौका नहीं दिया . मोदी सरकार में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया है, जिसके चलते उन्होंने मंत्रिपरिषद छोड़ दिया है. राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुरियन का इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है. बीजेपी ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में जॉर्ज कुरियन को फिर से मौका नहीं दिया. यही वजह है कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक मामलों के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री का पद भी संभाल रहे थे. जॉर्ज कुरियन केरल से आते हैं और केंद्र की मोदी सरकार में अकेले ऐसे मंत्री थे जो ईसाई समुदाय से थे. कुरियन का राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो गया. इसीलिए उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला लिया और कार्यकाल खत्म होने के दूसरे ही दिन मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल खत्म हो गया है. कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे तो रखनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा सदस्य थे. बीजेपी ने अपने इन दोनों नेताओं को राज्यसभा का अतरिक्त कार्यकाल नहीं दिया, जिसके चलते जॉर्ज कुरियन ने मंत्री से इस्तीफा दे दिया है जबकि रवनीत बिट्टू अभी बने हुए हैं. 1960 में केरल के कोट्टायम में जन्मे कुरियन सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं. 1980 में पार्टी बनने के बाद से बीजेपी के कार्यकर्ता रहे हैं, और उन्होंने पहले नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज के वाइस चेयरमैन के तौर पर काम किया और उसके बाद मोदी सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था.

जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव हुआ है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होनेे बद उन्होंने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उनके इस्तीफे को प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने तुरंत मंजूरी दे दी। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जॉर्ज कुरियन कफिर से उम्मीदवार नहीं बनाया था। इस वजह से उनका संसदीय कार्यकाल समाप्त होते ही उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का निर्णय किया। जॉर्ज कुरियन केवल अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री नहीं, बल्कि मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में भी कार्यरत थे। उनके इस्तीफे के बाद इन विभागों में कार्यभार पुनर्व्यवस्थित किया जाएगा। कुरियन केरल से आते हैं और केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में एक महत्वपूर्ण चेहरा माने जाते थे। उनके इस्तीफे को राजनीतिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। 21 जून को उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हुआ, जिसके अगले दिन उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। इससे पहले वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे। जॉर्ज कुरियन लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं और 1980 के दशक से पार्टी के कार्यकर्ता हैं। वे कानून के पेशे से भी जुड़े रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर चुके हैं। मंत्री बनने से पहले उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। उनके प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव को सरकार में महत्वपूर्ण माना गया है। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।
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