भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस B.R. गवई को निशाना बनाने वाली आपत्तिजनक और अवैध सोशल मीडिया सामग्री पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस ने राज्यभर में 100 से अधिक सोशल मीडिया खातों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि इन पोस्ट और वीडियो में जातिवादी टिप्पणियां और घृणा फैलाने वाले संदेश थे, जिनका उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना और न्यायपालिका के प्रति सम्मान को कम करना था।
CJI पर जूता फेंकने की कोशिश से जुड़ा मामला
6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने CJI की ओर जूता फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि, सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे काबू कर लिया और घटना को टाल दिया। इस घटना के बाद से सोशल मीडिया पर न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी।

सूत्रों के मुताबिक, वकील खजुराहो के जावरी मंदिर में विष्णु प्रतिमा की पुनर्स्थापना को लेकर CJI की टिप्पणी से नाराज़ था। CJI गवई ने याचिका को “पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन” बताते हुए खारिज कर दिया था और कहा था कि “अगर आप भगवान विष्णु के इतने बड़े भक्त हैं, तो प्रार्थना करें और उन्हीं से समाधान मांगें।”
पंजाब सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस घटना को दलित समुदाय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों पर हमला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा “दलित विरोधी माहौल” बना रही है और यह स्थिति उसी का परिणाम है। पुलिस ने सोशल मीडिया सामग्री को सांविधानिक प्राधिकरण पर हमला, जाति-आधारित दुर्भावना और उकसावा, और लोक-दुराचार के रूप में चिह्नित किया है।
CJI गवई की मां कमल गवई ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि विरोध हमेशा शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में होना चाहिए।
CJI गवई की बहन कीर्ति गवई ने कहा,
यह घटना देश पर कलंक है और एक जहरीली विचारधारा की निशानी है। विरोध हमेशा शांतिपूर्ण और संविधान के मुताबिक होना चाहिए, ताकि बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों को ठेस न पहुंचे।
वकील पर कार्रवाई
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने आरोपी वकील राकेश किशोर का लाइसेंस रद्द कर दिया और उसे निलंबित कर दिया। BCI ने 15 दिनों के भीतर शो-कॉज नोटिस जारी करने की बात कही है।इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से आरोपी वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है।
पुलिस ने दर्ज की धाराएं
पुलिस ने दर्ज FIR में हिंसा भड़काने, संवैधानिक पद के प्रति असम्मान, अनुसूचित जाति के सदस्यों का अपमान, जातिगत नफरत फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसी गंभीर धाराएं शामिल की हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की आगे जांच जारी है और दोषियों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।