Chandigarh कूच पर अड़े किसान, मांगों को लेकर बढ़ा दबाव

पंजाब के किसानों का मोहाली से चंडीगढ़ की ओर मार्च: बुड़ैल जेल के पास सीमा बंद, डल्लेवाल ने कहा- पहले टेंट लगाने दो, फिर मीटिंग के लिए जाएंगे। पंजाब के किसानों ने सोमवार को मोहाली से चंडीगढ़ की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है। किसान फोर्टिस अस्पताल के निकट बुड़ैल जेल की दिशामें बढ़ रहे हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने शहर के प्रवेश मार्ग और सीमा क्षेत्रों को बंद कर दिया है। किसान ट्रैक्टरों और पैदल मार्च के माध्यम से सेक्टर-17 तक पहुंचने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें रोका गया, तो वे वहीं पक्का मोर्चा लगाकर प्रदर्शन शुरू कर देंगे। वर्तमान में मोहाली और चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारी किसानों को समझाने में लगे हुए हैं। डल्लेवाल ने कहा कि मैं अपने किसानों को धूप में नहीं छोड़ सकता। पहले हमें टेंट लगाने दो, फिर मीटिंग के लिए जाएंगे। अन्यथा पुलिस के पास डंडे चलाने का विकल्प सही रहेगा। यह आंदोलन किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में हो रहा है। स्थिति को ध्यान में रखते हुए पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और हालात पर नजर रखे हुए हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से इलाके में पुलिस बल की उपलब्धता भी बढ़ा दी गई है। पंजाब के विभिन्न जिलों से आए किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर फिर से प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान मोहाली में इकट्ठा होकर चंडीगढ़ की तरफ बढ़ गए। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
किसानों का समूह ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और पैदल मार्च के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। आंदोलनकारियों नकहा है कि यदि चंडीगढ़ में उन्हें रोका गया, तो वे वहीं धरना देकर स्थायी मोर्चा स्थापित कर सकते हैं। किसानों के इस घोषणा के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। चंडीगढ़ पुलिस और पंजाब पुलिस ने सुरक्षा को सख्त कर दिया है। शहर में प्रवेश करने वाले मुख्य मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाकर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेताओं का कहना है कि वे अपने मामलों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। उनका आरोप है कि किसानों से संबंधित कई मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। किसानों की मुख्य शिकायत बैंकिंग प्रक्रियाओं और कर्ज से संबंधित मामलों के बारे में है। उनका कहना है कि कई किसानों ने कर्ज चुकता कर दिया है, लेकिन फिर भी संबंधित दस्तावेज और सुरक्षा चेक वापस नहीं किए गए। इससे किसानों को आर्थिक और कानूनी कठिनाइयोंा सामना करना पड़ रहा है। किसान संगठनों का दावा है कि इस आंदोलन में पंजाब के कई जिलों से बड़ी संख्या में प्रभावित किसान शामिल हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे केवल अपने अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे हैं और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए।
प्रशासन किसानों को बातचीत के जरिए हल निकालने के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों के साथ संपर्क कायम रखा है ताकि टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो और शांतिपूर्ण माहौल बना रहे। किसान नेताओं ने कहा कि वे बातचीत के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पहले आंदोलन में शामिल किसानों की बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम होना चाहिए। उनका कहना है कि धरना स्थल पर व्यवस्था सुनिश्चित होने के बाद ही वे औपचारिक बैठकों में भाग लेने पर विचार करेंगे। मोहाली और चंडीगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर प्रशासन की गहरी नजर बनी हुई है। किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि सरकार और प्रशासन बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

कर्ज लौटाने के बाद भी चेक न वापस करने के आरोप

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान मोहाली में एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि कृषि ऋण लेने के दौरान उनसे सुरक्षा के तौर पर चेक लिए जाते हैं, लेकिन कर्ज की पूरी राशि चुकाने के बाद भी कई मामलों में ये चेक समय पर वापस नहीं किए जाते। किसानों का मानना है कि इससे भविष्य में विवाद और आर्थिक नुकसान की स्थिति पैदा हो सकती है। आंदोलन में शामिल किसानों ने कहा कि इस समस्या के कारण कई परिवार लंबे समय से परेशान हैं। उनका दावा है कि बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता है, ताकि किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सके। इसी मुद्दे को लेकर किसान चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित सरकारी कार्यालयों तक पहुंचकर संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रखना चाहते थे। उनका उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है, ताकि जल्द समाधान निकल सके।

12 जिलों के 1300 पीड़ित किसान पहुंचे

किसानों का कहना है कि वे अपनी लंबित मांगों के समाधान की उम्मीद लेकर चंडीगढ़ पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य सरकार और संबंधित विभागों के सामने अपनी समस्याओं को सीधे तौर पर रखना है, ताकि वर्षों से लंबित मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जा सके। किसान नेताओं के अनुसार इस आंदोलन में पंजाब के करीब 12 जिलों से लगभग 1300 किसान शामिल हुए हैं। बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी यह दर्शाती है कि बैंकिंग और कृषि ऋण से जुड़े मुद्दे राज्य के कई इलाकों में किसानों को प्रभावित कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग खेतीबाड़ी विकास बैंक से संबंधित मामलों के लिए प्रभावी सेटलमेंट स्कीम लागू करने की है। किसानों का कहना है कि ऐसी योजना लागू होने से आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों को राहत मिल सकती है और बकाया मामलों का समाधान आसान हो सकता है। किसान संगठनों का दावा है कि आंदोलन में शामिल अधिकांश लोग बैंकिंग प्रक्रियाओं और ऋण संबंधी विवादों से प्रभावित हैं। उनका मानना है कि सरकार को इन मामलों पर विशेष ध्यान देकर किसानों के हित में ठोस कदम उठाने चाहिए। किसान नेताओं ने सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाती और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाता, तो आंदोलन की स्थिति से बचा जा सकता था। अब किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द सकारात्मक पहल करते हुए उनकी मांगों पर विचार करेगी।

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