हिमाचल प्रदेश का बद्दी देश के प्रमुख फार्मा हब में शामिल है। बद्दी और आसपास के BBN क्षेत्र में बड़ी संख्या में फार्मा यूनिट काम करती हैं और यहां तैयार होने वाली दवाओं की सप्लाई देश के अलग-अलग हिस्सों में होती है। ऐसे में यहां बनने वाली दवाओं की गुणवत्ता की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।दवाओं के इन सैंपलों को NSQ यानी Not of Standard Quality पाया गया। आसान भाषा में इसका मतलब है कि जांच के दौरान संबंधित सैंपल तय गुणवत्ता मानकों में से किसी एक या उससे अधिक टेस्ट में निर्धारित मानक पर खरा नहीं उतरा।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि किसी दवा के एक सैंपल या बैच के NSQ पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि उस कंपनी की हर दवा खराब है। जांच किसी विशेष सैंपल और संबंधित बैच की गुणवत्ता को लेकर होती है।
क्या होता है NSQ?
NSQ यानी Not of Standard Quality का मतलब है कि किसी दवा का जांच किया गया सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।दवा की जांच में अलग-अलग पैरामीटर देखे जा सकते हैं। इनमें दवा में मौजूद सक्रिय घटक की मात्रा, घुलने की क्षमता, pH, साफ-सफाई और पार्टिकुलेट मैटर जैसे मानक शामिल हो सकते हैं।उदाहरण के तौर पर CDSCO की सार्वजनिक NSQ रिपोर्ट में बद्दी की कुछ दवाओं के लिए Assay, pH, Dissolution, Clarity of Solution और Particulate Matter जैसी कमियां दर्ज की गई हैं।

इनमें Martin & Brown Bio Sciences की Rabeprazole Sodium Injection का मामला भी सामने आया है। CDSCO की पिछली NSQ रिपोर्टों में बद्दी स्थित इस कंपनी की Rabeprazole Sodium Injection के अलग-अलग बैचों में गुणवत्ता संबंधी कमियां दर्ज की गई हैं। उदाहरण के तौर पर अप्रैल 2025 की CDSCO NSQ रिपोर्ट में एक बैच के लिए pH, Particulate Matter, Clarity of Solution और Assay से संबंधित परीक्षणों में कमी दर्ज थी।CDSCO की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट में भी इसी कंपनी की Rabeprazole Sodium Injection के एक बैच के संबंध में pH, Water, Clarity of Solution, Particulate Matter और Assay से जुड़ी कमियां दर्ज की गई थीं।इससे यह स्पष्ट होता है कि दवा के अलग-अलग बैचों की गुणवत्ता अलग-अलग जांची जाती है और रिपोर्ट में संबंधित बैच तथा उसमें पाई गई कमी का उल्लेख किया जाता है।
बद्दी से जुड़ी दवाओं में पैरासिटामोल के सैंपलों का मामला भी महत्वपूर्ण है। आपके उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Healers Lab की पैरासिटामोल दवाओं के कई बैच जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान जांच में सबस्टैंडर्ड पाए गए।पैरासिटामोल का इस्तेमाल आम तौर पर बुखार और दर्द जैसी समस्याओं में किया जाता है, इसलिए इससे जुड़े गुणवत्ता मानकों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।हालांकि, किसी एक बैच के सैंपल के फेल होने के आधार पर कंपनी की सभी पैरासिटामोल दवाओं को खराब नहीं माना जा सकता। हर जांच संबंधित सैंपल और बैच के आधार पर होती है।बद्दी देश के प्रमुख फार्मा उत्पादन केंद्रों में से एक है और यहां बनने वाली दवाएं देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती हैं। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता की नियमित जांच और NSQ पाए जाने पर समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।जनवरी से अगस्त 2026 के बीच बद्दी से जुड़े 237 सैंपलों के फेल होने का दावा सामने आया है। अब सबसे महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित बैचों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, कितने बैच बाजार से वापस लिए गए और बार-बार सैंपल फेल होने की स्थिति में नियामक विभाग ने क्या कदम उठाए।दवा सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है, इसलिए गुणवत्ता जांच, पारदर्शिता और समय पर नियामक कार्रवाई इस पूरे मामले के सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं।









