भारत की रक्षा क्षेत्र की कंपनी पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने अमेरिकी कंपनी Powerus से जुड़ी Guardian-1 एंटी-ड्रोन तकनीक के लिए एक अहम लाइसेंसिंग समझौता किया है। यह करार 30 जून 2026 को Powerus की सहायक कंपनी Tandem Defense LLC के साथ किया गया। इसके तहत पारस डिफेंस को भारत में Guardian-1 इंटरसेप्टर तकनीक के इस्तेमाल का विशेष अधिकार मिला है। समझौते के मुताबिक पारस डिफेंस इस तकनीक से जुड़े उत्पादों का भारत में निर्माण और व्यावसायीकरण कर सकेगी। लाइसेंस को विशेष अधिकार के तौर पर दिया गया है और इसे किसी अन्य पक्ष को ट्रांसफर या सब-लाइसेंस नहीं किया जा सकता। इस व्यवस्था से भारत में काउंटर-ड्रोन सिस्टम के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। Guardian-1 को हाई-स्पीड और बैटरी से संचालित काउंटर-ड्रोन इंटरसेप्टर के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य कम लागत वाले ड्रोन से उत्पन्न हवाई खतरों से निपटना है। मौजूदा समय में सुरक्षा और सैन्य अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ने के कारण उन्हें रोकने वाली तकनीकों की जरूरत भी बढ़ रही है। इस डील का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विदेशी तकनीक को लाइसेंस के जरिए भारत में लाकर उसके उत्पादन की जिम्मेदारी भारतीय कंपनी संभालेगी। इससे भविष्य में स्थानीय स्तर पर निर्माण क्षमता विकसित करने और काउंटर-ड्रोन क्षेत्र में भारतीय रक्षा उद्योग की भागीदारी बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। Powerus का नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़े निवेश के कारण भी चर्चा में रहा है। हालांकि Guardian-1 का भारत में लाइसेंसिंग समझौता जून 2026 में हुआ था। ऐसे में इस डील का मुख्य फोकस भारत में तकनीक के निर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल के अधिकार पर है।
समझौते की अवधि और उद्देश्य
पारस डिफेंस और Powerus के बीच हुआ यह लाइसेंसिंग समझौता शुरुआती तौर पर 12 महीने के लिए है। हालांकि, दोनों कंपनियों की सहमति होने पर इसकी अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस व्यवस्था के तहत भारत में Guardian-1 से जुड़े उत्पादों के निर्माण और उन्हें बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पारस डिफेंस की होगी। इस करार का एक अहम पहलू विदेशी तकनीक को भारतीय विनिर्माण क्षमता से जोड़ना है। लाइसेंस के आधार पर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए देश में उत्पादन शुरू होने से काउंटर-ड्रोन सिस्टम के घरेलू इकोसिस्टम को विकसित करने में मदद मिल सकती है। इससे रक्षा क्षेत्र में स्थानीय कंपनियों की भूमिका भी बढ़ सकती है। Guardian-1 की खासियत इसकी तेज गति और बैटरी आधारित संचालन व्यवस्था बताई गई है। यह सिस्टम ऐसे ड्रोन से निपटने के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें कम लागत में इस्तेमाल किया जा सकता है। ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उन्हें रोकने वाले इंटरसेप्टर सिस्टम सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। भारत में इस तकनीक का निर्माण होने से स्थानीय स्तर पर उत्पादन, तकनीकी विशेषज्ञता और सप्लाई चेन से जुड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा, भविष्य में इस तरह की प्रणालियों की मांग बढ़ने पर भारतीय कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में अपनी क्षमताएं विकसित करने का अवसर भी मिल सकता है। सीमा क्षेत्रों, संवेदनशील प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा में काउंटर-ड्रोन तकनीक की उपयोगिता बढ़ रही है। ऐसे में Guardian-1 को भारत में बनाने की योजना रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखी जा सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव उत्पादन क्षमता, तकनीकी एकीकरण और घरेलू मांग के आधार पर सामने आएगा।

पाकिस्तान से जुड़े समझौते का संदर्भ
भारत और पाकिस्तान से जुड़े Powerus के दोनों घटनाक्रम अलग-अलग समय पर सामने आए हैं। भारत के साथ Guardian-1 तकनीक का विशेष लाइसेंसिंग समझौता जून 2026 में हुआ था, जबकि सितंबर में Powerus का पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग सामने आया। पाकिस्तान से संबंधित समझौते में मानवरहित हवाई प्रणालियों को लेकर सहयोग और शुरुआती ऑर्डर की जानकारी दी गई है, हालांकि इसकी वित्तीय कीमत और उपकरणों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। दोनों मामलों के बीच समय का अंतर भी ध्यान देने योग्य है। पहले भारत में Guardian-1 इंटरसेप्टर तकनीक के लिए पारस डिफेंस को विशेष अधिकार मिला और बाद में पाकिस्तान के साथ Powerus का अलग समझौता सामने आया। अलग-अलग देशों के साथ इस तरह के रक्षा करार कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय कारोबारी गतिविधियों और मानवरहित तकनीक की बढ़ती मांग से जुड़े हो सकते हैं। भारत के लिए Guardian-1 समझौते की खास बात यह है कि इस तकनीक के इस्तेमाल का विशेष अधिकार देश में पारस डिफेंस के पास है। कंपनी भारत में इसके निर्माण और व्यावसायिक उपयोग की दिशा में काम करेगी। इससे विदेशी तकनीक को स्थानीय उत्पादन से जोड़ने का अवसर मिलता है और घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता को विकसित करने में मदद मिल सकती है। काउंटर-ड्रोन सिस्टम की जरूरत ऐसे समय में बढ़ रही है जब सुरक्षा और सैन्य क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल लगातार विस्तार पा रहा है। कम लागत वाले ड्रोन से निपटने के लिए इंटरसेप्टर और अन्य एंटी-ड्रोन तकनीकों की मांग बढ़ी है। इसी वजह से भारत सहित कई देशों में इस क्षेत्र में नई तकनीकों और स्थानीय उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। पारस डिफेंस के लिए आगे की चुनौती तकनीक को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी ढंग से उत्पादन और बाजार तक पहुंचाने की होगी। उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता मानकों, तकनीकी एकीकरण और संभावित ग्राहकों की मांग जैसे कारक इस परियोजना के परिणाम को प्रभावित करेंगे। ऐसे में यह समझौता भारतीय काउंटर-ड्रोन उद्योग में एक नई तकनीकी साझेदारी की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है।
इस पूरे मामले की चर्चा सितंबर 2026 में उस समय तेज हुई, जब Powerus ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक शुरुआती ऑर्डर की जानकारी दी। कंपनी के अनुसार, यह ऑर्डर मानवरहित हवाई प्रणालियों और उनसे संबंधित सेवाओं के लिए है। हालांकि, इस सौदे की कुल कीमत, उपकरणों की संख्या और विस्तृत शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके अलावा Powerus और पाकिस्तान के बीच एक अलग रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) भी हुआ है। कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य भविष्य में मानवरहित और स्वायत्त रक्षा तकनीकों को लेकर सहयोग की संभावनाएं तलाशना है। यह MoU अपने आप में किसी बड़े अंतिम रक्षा सौदे की पुष्टि नहीं करता, बल्कि आगे की बातचीत और संभावित सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करता है। भारत से जुड़ा Guardian-1 समझौता इससे पहले जून 2026 में हुआ था। पारस डिफेंस को भारत में इस तकनीक के इस्तेमाल, निर्माण और व्यावसायीकरण से जुड़े विशेष अधिकार दिए गए हैं। इसलिए भारत और पाकिस्तान से संबंधित दोनों घटनाक्रमों को अलग-अलग समझौतों के रूप में देखना जरूरी है, क्योंकि इनके उद्देश्य, समय और शर्तें अलग हैं। Powerus का नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़े निवेश के कारण भी चर्चा में रहा है। सितंबर में सामने आई जानकारी के मुताबिक, Donald Trump Jr. और Eric Trump कंपनी के निवेशकों में शामिल हैं। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका निवेश निष्क्रिय प्रकृति का है और वे कंपनी के रोजमर्रा के संचालन या कारोबारी फैसलों में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं निभाते। भारत के लिहाज से Guardian-1 डील का प्रमुख पहलू तकनीक के स्थानीय उत्पादन का अधिकार है। विदेशी तकनीक को लाइसेंस के माध्यम से भारत में लाकर पारस डिफेंस इसके निर्माण और बाजार में उतारने की दिशा में काम करेगी। इससे घरेलू काउंटर-ड्रोन क्षेत्र में विनिर्माण और तकनीकी क्षमता विकसित करने का अवसर मिल सकता है। आने वाले समय में इस समझौते का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पारस डिफेंस Guardian-1 तकनीक को कितनी प्रभावी ढंग से भारतीय उत्पादन व्यवस्था में शामिल करती है। उत्पादन क्षमता, तकनीकी एकीकरण, गुणवत्ता और संभावित बाजार मांग इसके महत्वपूर्ण पहलू होंगे। वहीं, Powerus के पाकिस्तान के साथ हुए अलग समझौते का वास्तविक दायरा भी आगे मिलने वाली आधिकारिक जानकारी से और स्पष्ट हो सकता है।









