Mumbai में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच मुलाकात हुई। शाह के एशियाटिक सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचने से पहले शिंदे ने सह्याद्रि गेस्ट हाउस में उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद अमित शाह और एकनाथ शिंदे एक ही कार से एशियाटिक सोसाइटी के कार्यक्रम के लिए रवाना हुए। दोनों नेताओं की साथ में सामने आई तस्वीर के बाद इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस कार्यक्रम में सीधे पहुंचे। वहीं, अमित शाह के साथ शिंदे की बैठक को उनके मुंबई दौरे का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। शाह तीन दिवसीय मुंबई दौरे पर हैं, जिसके दौरान उनका कई कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। एशियाटिक सोसाइटी में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने भारतीय ज्ञान परंपरा और देश की सांस्कृतिक विरासत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह यहां केवल गृह मंत्री के तौर पर नहीं आए हैं, बल्कि भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पहुंचे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि एशियाटिक सोसाइटी इस विरासत को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी। शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी राष्ट्र की असली ताकत उसकी ज्ञान परंपरा और विरासत को सुरक्षित रखने से जुड़ी होती है। उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि देश लंबे समय तक गुलामी में रहा, लेकिन उसकी ज्ञान परंपरा को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका। नालंदा विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी इमारत को नष्ट किया जा सकता है, लेकिन लोगों के मन में मौजूद ज्ञान को समाप्त करना संभव नहीं है। इस दौरान एशियाटिक सोसाइटी में भारतीय विरासत से जुड़ी पांडुलिपियों की विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। अमित शाह ने ‘श्री गणेश ध्यानारती’ नाम की पांडुलिपियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। वह सोसाइटी की लाइब्रेरी और पांडुलिपि संरक्षण प्रयोगशाला का भी दौरा करेंगे। वहीं, शिंदे के साथ हुई मुलाकात ने शाह के मुंबई दौरे को राजनीतिक नजरिए से भी खास बना दिया है।
शाह तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं मुंबई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय मुंबई दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। दौरे में सांस्कृतिक विरासत, हिंदी भाषा और व्यापार से जुड़े कई कार्यक्रम शामिल हैं। शाह अपने दौरे की शुरुआत एशियाटिक सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम से कर रहे हैं। एशियाटिक सोसाइटी में अमित शाह विशेष रूप से भारतीय ज्ञान और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह ‘श्री गणेश ध्यानारती’ नाम की पांडुलिपियों की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके जरिए प्राचीन भारतीय साहित्य और ज्ञान से जुड़ी धरोहर को लोगों के सामने लाने की कोशिश की जा रही है। गृह मंत्री एशियाटिक सोसाइटी की लाइब्रेरी का भी दौरा करेंगे। इसके साथ ही वह पांडुलिपि संरक्षण प्रयोगशाला के कामकाज को करीब से देखेंगे और वहां किए जा रहे संरक्षण कार्यों की जानकारी लेंगे। इसके बाद अमित शाह कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित भी करेंगे। मुंबई दौरे के दौरान शाह बांद्रा में आयोजित रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के पुरस्कार समारोह में भी हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में रत्न और आभूषण क्षेत्र से जुड़े लोगों और संस्थानों को सम्मानित किया जाएगा। शाह की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम को भी खास महत्व दिया जा रहा है। दौरे के अगले चरण में अमित शाह नवी मुंबई के वाशी स्थित सिडको प्रदर्शनी केंद्र पहुंचेंगे। यहां हिंदी पर केंद्रित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में वह सहभागिता करेंगे। सम्मेलन का मुख्य फोकस हिंदी भाषा के उपयोग और उसके व्यापक प्रसार से जुड़े विषयों पर रहेगा। अपने मुंबई प्रवास के दौरान अमित शाह धार्मिक स्थल पर भी जाएंगे। उनके लालबागचा राजा के दर्शन करने का कार्यक्रम है। इस तरह उनका तीन दिवसीय दौरा सरकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। अमित शाह के इस दौरे में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कार्यक्रमों को जगह दी गई है। एक ओर वह भारतीय पांडुलिपियों और ज्ञान परंपरा से जुड़े कार्यों को देखेंगे, वहीं दूसरी ओर राजभाषा सम्मेलन और रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उनके व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए मुंबई में कई स्तरों पर तैयारियां की गई हैं।

एशियाटिक सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनका यहां आना केवल गृह मंत्री के तौर पर नहीं है, बल्कि वह भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यहां पहुंचे हैं। अमित शाह ने एशियाटिक सोसाइटी की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संस्था आने वाले समय में भारतीय ज्ञान और विरासत को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। उनके मुताबिक, किसी देश की पहचान केवल उसकी आर्थिक और राजनीतिक ताकत से नहीं होती, बल्कि उसकी ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत भी उतनी ही अहम होती है। अपने संबोधन में गृह मंत्री ने ज्ञान की परंपरा को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने अपनी विरासत और ज्ञान को संभालकर रखा, उनकी पहचान लंबे समय तक बनी रही। भारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लंबे विदेशी शासन के बावजूद देश की मूल ज्ञान परंपरा को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका। शाह ने नालंदा विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ऐतिहासिक इमारत या संस्थान को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन लोगों के मन में मौजूद ज्ञान और विचारों को मिटाना आसान नहीं है। उन्होंने भारतीय समाज में पीढ़ियों से चली आ रही ज्ञान की परंपरा को देश की महत्वपूर्ण ताकतों में से एक बताया। अमित शाह इस समय तीन दिवसीय मुंबई दौरे पर हैं। एशियाटिक सोसाइटी में उन्होंने ‘श्री गणेश ध्यानारती’ नामक पांडुलिपियों की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही वह सोसाइटी की लाइब्रेरी और पांडुलिपि संरक्षण प्रयोगशाला का भी निरीक्षण करेंगे, जहां पुरानी धरोहरों को सुरक्षित रखने से जुड़े काम किए जाते हैं। मुंबई प्रवास के दौरान गृह मंत्री कई अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। वह बांद्रा में रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के पुरस्कार समारोह में शामिल होंगे। इसके अलावा नवी मुंबई के वाशी स्थित सिडको प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में भी उनकी भागीदारी होगी। अमित शाह के दौरे में धार्मिक कार्यक्रम भी शामिल है। वह मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन करने जाएंगे। इस तरह उनका मुंबई दौरा प्रशासनिक और आधिकारिक बैठकों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, भाषा और धार्मिक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों से भी जुड़ा हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ अमित शाह की करीब आधे घंटे की मुलाकात ने उनके मुंबई दौरे को राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा में ला दिया है। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद वे एक साथ एशियाटिक सोसाइटी के कार्यक्रम में पहुंचे। हालांकि, बैठक में किन विषयों पर बातचीत हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।









