भारत-चीन के रिश्ते में सुधार
भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत का सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है। बीते दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों को इसी बदलते माहौल के तौर पर देखा जा रहा है। अब लगातार तीसरे साल दोनों नेताओं की बैठक होने जा रही है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। साल 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। इसके बाद वर्ष 2025 में तियानजिन में हुए SCO सम्मेलन में भी दोनों नेताओं ने आमने-सामने बातचीत की। इन बैठकों के बाद भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संवाद बनाए रखने की कोशिशें जारी रही हैं। आगामी बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के बीच दोनों देशों के नेतृत्व के बीच सीधे संवाद की निरंतरता बनी हुई है। लगातार तीसरी मुलाकात से दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ और भरोसे को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। इसी बीच चीन ने भारत की BRICS अध्यक्षता और सम्मेलन की मेजबानी को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया है। चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि उनका देश BRICS सहयोग को महत्व देता है और भारत की ओर से आयोजित किए जा रहे इस साल के शिखर सम्मेलन की सफलता का समर्थन करता है। चीन का यह रुख भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BRICS का दायरा लगातार बढ़ रहा है और मंच पर आर्थिक सहयोग के साथ वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होती है। ऐसे में भारत और चीन के बीच संवाद और सहयोग का बढ़ना इस समूह की भूमिका के लिहाज से भी अहम हो सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका के साथ व्यापार और टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव के बीच भारत और चीन के बीच बेहतर होते संपर्क पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच दोनों बड़े एशियाई देशों का एक-दूसरे के साथ संवाद बढ़ाना वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें मोदी-जिनपिंग की आगामी बैठक पर हैं। दोनों नेताओं की बातचीत से यह संकेत मिल सकता है कि भारत और चीन अपने पुराने मतभेदों के बीच सहयोग के लिए कितनी नई संभावनाएं तलाशते हैं और आने वाले समय में द्विपक्षीय रिश्तों को किस दिशा में ले जाने की कोशिश की जाती है।

भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संवाद एक बार फिर चर्चा में है। BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक से पहले चीन की ओर से आए बयान ने यह संकेत दिया है कि बीजिंग भारत के साथ बातचीत और सहयोग को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है। 2024 में कजान में हुए BRICS सम्मेलन और 2025 में तियानजिन में आयोजित SCO बैठक के दौरान मोदी और शी जिनपिंग के बीच बातचीत हुई थी। अब तीसरे लगातार साल दोनों नेताओं की मुलाकात होने जा रही है, इसलिए इस बैठक को रिश्तों में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और चीन के बीच अभी भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर दोनों देशों की स्थिति अलग-अलग रही है। इसके बावजूद उच्चस्तरीय बातचीत जारी रहना इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष मतभेदों के साथ-साथ सहयोग की संभावनाओं पर भी ध्यान दे रहे हैं। चीन के राजदूत शू फेइहोंग का बयान भी इसी दिशा में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और संवाद बढ़ाने पर जोर दिया। BRICS के स्तर पर भी चीन ने भारत के प्रति समर्थन का संदेश दिया है। चीन ने भारत की ओर से इस वर्ष BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी किए जाने का स्वागत किया है। बीजिंग का कहना है कि वह BRICS सहयोग को महत्व देता है और भारत द्वारा आयोजित सम्मेलन की सफलता का समर्थन करता है। BRICS की बढ़ती वैश्विक भूमिका को देखते हुए भारत और चीन के बीच बेहतर तालमेल का असर इस समूह की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। यह मंच अब केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यवस्था, विकासशील देशों के हितों और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर चर्चा के लिए भी महत्वपूर्ण हो चुका है। वहीं, वैश्विक स्तर पर बदलते समीकरणों के बीच भारत और चीन के बीच बढ़ता संवाद भी अहम है। अमेरिका के साथ व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव के बीच दोनों एशियाई देशों के शीर्ष नेतृत्व का संपर्क अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अलग संदेश दे सकता है। खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों की नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देश किस तरह अपने साझा हितों को आगे बढ़ाते हैं। मोदी-जिनपिंग बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा व्यापार, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय परिस्थितियों जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि बैठक का वास्तविक एजेंडा और बातचीत के नतीजे सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश किन क्षेत्रों में आगे बढ़ने पर सहमत होते हैं। चीन के बयान और दोनों नेताओं की लगातार बैठकों को भारत-चीन संबंधों में संवाद की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। BRICS Summit 2026 के मंच पर होने वाली यह मुलाकात आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मोदी और जिनपिंग की बातचीत के बाद रिश्तों को लेकर क्या नया संदेश सामने आता है।









