NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जून 2026 में UGC NET की परीक्षा 84 विषयों के लिए आयोजित की थी। लेकिन परीक्षा के दौरान कई तरह की गड़बड़ियों और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। 16 अगस्त 2026 को Answer Key जारी होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया। अब तीन विषयों—अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी—की परीक्षा दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया है।
इन तीनों विषयों की री-एग्जाम परीक्षा 9 और 10 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। NTA के अनुसार, पहले आयोजित की गई परीक्षा को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट के बाद इन तीनों विषयों की पहले हुई परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया।
परीक्षा की तारीख और शिफ्ट की बात करें तो 9 सितंबर 2026 को पहली शिफ्ट में अंग्रेजी और दूसरी शिफ्ट में कॉमर्स का पेपर आयोजित किया जाएगा। वहीं 10 सितंबर 2026 को सोशियोलॉजी की परीक्षा होगी। पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी।
UGC NET की परीक्षा में उम्मीदवारों को कुल तीन घंटे का समय दिया जाता है। इसमें दो पेपर होते हैं। पेपर-1 सभी उम्मीदवारों के लिए सामान्य होता है, जबकि पेपर-2 उम्मीदवार द्वारा चुने गए विषय से संबंधित होता है।NTA ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों को इन तीन विषयों की परीक्षा दोबारा देनी है, उन्हें इसके लिए अलग से कोई परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा।इस पूरे मामले पर विपक्ष की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला सिर्फ एक परीक्षा दोबारा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर सवाल बन गया है।आज देश का युवा सरकार से यह सवाल पूछ रहा है कि अगर एक परीक्षा को भी बिना गड़बड़ी के आयोजित नहीं कराया जा सकता, तो देश की शिक्षा व्यवस्था आखिर किस दिशा में जा रही है?


एक विद्यार्थी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए महीनों और कई बार वर्षों तक मेहनत करता है। वह अपना समय, पैसा, ऊर्जा और मानसिक क्षमता इस उम्मीद के साथ लगाता है कि परीक्षा के माध्यम से उसे अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। लेकिन अगर परीक्षा में ही गड़बड़ियां सामने आ जाएं और उसे दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़े, तो उस विद्यार्थी की मेहनत और उसके समय का जिम्मेदार कौन होगा?
उन युवाओं की मेहनत का क्या, जिन्होंने इस परीक्षा के लिए दिन-रात पढ़ाई की? उनके समय का क्या, जो दोबारा उसी परीक्षा की तैयारी में लगाना पड़ेगा? यह सिर्फ तीन विषयों के विद्यार्थियों का सवाल नहीं है। यह देश के हर उस युवा का सवाल है जो मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है।
सरकार और परीक्षा कराने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी है कि परीक्षाएं पारदर्शी, निष्पक्ष और बिना किसी गड़बड़ी के आयोजित हों। अगर किसी स्तर पर गलती हुई है, तो उसे स्वीकार करके उसका समाधान करना जरूरी है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।आज देश का युवा सिर्फ जवाब नहीं, बल्कि एक भरोसा चाहता है—क्या उसकी मेहनत, उसका समय और उसका भविष्य सुरक्षित हाथों में है?यही सवाल आज का युवा अपनी सरकार और देश की शिक्षा व्यवस्था से पूछ रहा है।










