Sahibzada Ajit Singh Nagar में किसानों को मछली पालन से जोड़ने और इसे आय का बेहतर साधन बनाने के लिए आत्मा योजना के तहत पहल की गई है। योजना के अंतर्गत जिले के चयनित 10 मछली पालकों को मछली बीज उपलब्ध करवाया गया। विभाग की ओर से यह बीज फतेहगढ़ साहिब के गांव बागड़ियां स्थित मछली बीज फार्म से उपलब्ध करवाया गया। इस पहल का उद्देश्य मछली पालकों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करना है। विभाग का मानना है कि सही तकनीक और उचित तालाब प्रबंधन के जरिए मछली उत्पादन को बेहतर किया जा सकता है। इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी मिल सकता है। मछली पालकों के तालाबों में प्रदर्शनियां भी आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के दौरान किसानों को तालाब की देखभाल, पानी की गुणवत्ता बनाए रखने, मछलियों के लिए उचित आहार और उत्पादन बढ़ाने से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी दी गई। इसका मकसद किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक तरीके से नई तकनीकों से परिचित करवाना था। सहायक निदेशक मत्स्य पालन, एसएएस नगर, हरदीप कौर ने बताया कि आत्मा योजना के तहत इस तरह की गतिविधियां मछली पालकों को आधुनिक पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी का सही इस्तेमाल करने से मछली पालन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है और किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मछली पालन को सहायक व्यवसाय के रूप में अपनाने वाले किसानों के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने मछली पालकों से अपील की कि वे मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर इन योजनाओं की जानकारी लें और पात्रता के अनुसार सरकारी सहायता का लाभ उठाएं। जिला प्रशासन ने भी किसानों से कृषि के साथ अन्य सहायक व्यवसायों को अपनाने की अपील की है। मछली पालन जैसी गतिविधियां किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती हैं। सरकारी योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक तरीकों का लाभ उठाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

आत्मा योजना के तहत मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए चयनित मछली पालकों के तालाबों में विशेष प्रदर्शनियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों का उद्देश्य किसानों को मछली पालन की आधुनिक तकनीकों से परिचित करवाना और उन्हें रोजमर्रा के काम में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। मौके पर किसानों को तालाब की देखभाल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। प्रदर्शनियों के दौरान मछली पालकों को पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने, तालाब की साफ-सफाई और मछलियों के लिए उचित वातावरण बनाए रखने के बारे में समझाया गया। अधिकारियों ने बताया कि तालाब में पानी की स्थिति का मछलियों की वृद्धि और स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए समय-समय पर पानी की जांच और आवश्यक प्रबंधन करना जरूरी है। किसानों को मछलियों के आहार को लेकर भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि मछलियों की उम्र और जरूरत के अनुसार संतुलित आहार देना उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही तालाब में मछलियों की संख्या, उनकी वृद्धि और स्वास्थ्य पर नियमित निगरानी रखने की सलाह दी गई, ताकि किसी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके। सहायक निदेशक मत्स्य पालन, एसएएस नगर, हरदीप कौर ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से मछली पालकों को नई तकनीकों को सीधे समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान अपने तालाबों का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं और मछली उत्पादन में सुधार की संभावना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने मछली पालकों से अपील की कि वे केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर न रहें, बल्कि मत्स्य पालन विभाग की ओर से दिए जाने वाले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन का भी लाभ उठाएं। सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी लेकर पात्र किसान उपलब्ध सहायता का इस्तेमाल अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में कर सकते हैं। जिला प्रशासन की ओर से भी किसानों को खेती के साथ मछली पालन जैसे सहायक व्यवसाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों के पास आमदनी का एक अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सकता है। आत्मा योजना के तहत चल रही ये गतिविधियां किसानों को जानकारी, तकनीक और सरकारी सहायता से जोड़ने की दिशा में उपयोगी कदम साबित हो सकती हैं।










