अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने परमाणु हथियारों के नियंत्रण से जुड़ी न्यू स्टार्ट (New START) संधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाने की बात कही थी। यह संधि 5 फरवरी को समाप्त हो गई।
क्या है न्यू स्टार्ट संधि?
अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों के नियंत्रण को लेकर सबसे पहले स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (START) पर वर्ष 1991 में हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद 2010 में न्यू स्टार्ट समझौता अस्तित्व में आया।
इस संधि के तहत अधिकतम 700 डिलीवरी सिस्टम (मिसाइल, लड़ाकू विमान और पनडुब्बियां)और 1550 रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती की सीमा तय की गई थी।
ट्रंप ने क्यों किया प्रस्ताव खारिज?
राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा,
“न्यू स्टार्ट का विस्तार करने के बजाय हमें अपने परमाणु विशेषज्ञों को एक नई, बेहतर और आधुनिक संधि पर काम करने देना चाहिए, जो भविष्य में लंबे समय तक प्रभावी रहे।”
ट्रंप का यह बयान रूस द्वारा 2010 के न्यू स्टार्ट समझौते को एक साल तक बढ़ाने के प्रस्ताव के जवाब में आया है।

अमेरिका की आपत्ति क्या है?
शुक्रवार को जिनेवा में आयोजित एक सम्मेलन में अमेरिकी हथियार नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उपमंत्री थॉमस डिनाने ने कहा कि न्यू स्टार्ट को बढ़ाने से न तो अमेरिका और न ही दुनिया को कोई खास फायदा होगा।
उन्होंने कहा इस संधि में कई कमियां हैं इसमें चीन शामिल नहीं है….मौजूदा वैश्विक सुरक्षा हालात को देखते हुए एक नई हथियार नियंत्रण संधि की जरूरत हैन्यू स्टार्ट संधि के समाप्त होने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि इससे परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है वैश्विक रणनीतिक स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता है….अमेरिका और रूस के बीच पारदर्शिता और भरोसा कम हो सकता है
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और रूस भविष्य में किस तरह की नई परमाणु हथियार नियंत्रण संधि पर सहमत होते हैं और क्या इसमें चीन जैसे अन्य परमाणु शक्तियों को भी शामिल किया जाएगा।