पाकिस्तान में एक ऐतिहासिक और रणनीतिक बदलाव करते हुए फील्ड मार्शल असीम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नियुक्त कर दिया गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सिफारिश पर इस निर्णय पर मुहर लगाई।हाल ही में पास हुए 27वें संविधान संशोधन के तहत बनाया गया CDF का पद अब देश की तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना का सर्वोच्च कमांडर होगा। इस पद के गठन के साथ ही ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) को समाप्त कर दिया गया है।

असीम मुनीर अब दोहरी भूमिका में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) यानि कि दोनों ताकतवर पदों के एक साथ मिलने के बाद असीम मुनीर अब पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली सैन्य अधिकारी बन गए हैं।CDF बनने के बाद असीम मुनीर नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड की निगरानी भी करेंगे, जो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और मिसाइल प्रणाली का संचालन करती है। यह पहली बार है जब पाकिस्तान का परमाणु कंट्रोल पूरी तरह एक व्यक्ति के अधीन आ गया है।यह फैसला भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक रणनीतिक चिंता का विषय माना जा रहा है।
राष्ट्रपति जरदारी ने मुनीर को पांच साल के कार्यकाल के लिए CDF नियुक्त किया है। इस पद के साथ उन्हें राष्ट्रपति जैसी कानूनी छूट भी मिलेगी। यानी अपने कार्यकाल में उन पर किसी भी कानूनी कार्रवाई की अनुमति नहीं होगी।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मुनीर आगे बढ़कर दूसरा कार्यकाल चाहते हैं, तो उनकी मांग को नकारा जाना मुश्किल होगा।
असीम मुनीर पाकिस्तान के इतिहास में दूसरे अधिकारी हैं जिन्हें फील्ड मार्शल की पांच-सितारा रैंक मिली है।पहले फील्ड मार्शल अयूब खान थे, जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध में कमान संभाली थी।असीम मुनीर को मिली यह अत्यधिक शक्ति देश की राजनीति,सुरक्षा ढांचे और सैन्य निर्णय लेने की प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित करेगी।सभी सैन्य कमान एक हाथ में आने से फैसले तेज होंगे, लेकिन साथ ही सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं।