बांग्लादेश में कल होने वाला राष्ट्रीय चुनाव सिर्फ सरकार बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है। इस चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले 15 साल से सत्ता में रही प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग इस बार चुनावी मैदान में नहीं हैं। यही वजह है कि देश में राजनीतिक अनिश्चितता, तनाव और अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी काफी बढ़ गई है।
तनावपूर्ण माहौल, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चुनाव से पहले बांग्लादेश की सड़कों पर तनाव का माहौल है। आधे से ज्यादा मतदान केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है। जगह-जगह सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। हाल के दिनों में राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई लोग घायल हुए हैं। अल्पसंख्यक समुदायों में डर का माहौल है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण मतदान कराना बड़ी चुनौती बन गया है।

BNP सबसे मजबूत दावेदार
इस चुनाव में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को देखा जा रहा है। पार्टी का नेतृत्व तारिक रहमान कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में BNP का मजबूत नेटवर्क है और अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के कारण इसका वोट बेस और मजबूत हुआ है।
BNP अपने अभियान में लोकतंत्र की बहाली, प्रशासनिक सुधार और भारत के साथ बराबरी के आधार पर रिश्ते तय करने की बात कर रही है। पार्टी यह भी संकेत दे चुकी है कि सत्ता में आने पर शेख हसीना के मुद्दे को भारत के सामने उठाया जाएगा। यही वजह है कि भारत के लिए यह चुनाव बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
जमात-ए-इस्लामी का अहम रोल
BNP के साथ जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन चुनावी समीकरण को और मजबूत बना रहा है। जमात का असर खासतौर पर ग्रामीण इलाकों, मदरसों और धार्मिक संगठनों में ज्यादा है। हालांकि, इस पार्टी को लेकर महिलाओं के अधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं भी जताई जाती रही हैं। इसके बावजूद चुनावी गणित में जमात की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।
नई पार्टी NCP भी मैदान में
नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) एक नई और उभरती राजनीतिक ताकत है, जो युवा नेतृत्व और सुधारवादी एजेंडे के साथ मैदान में उतरी है। यह पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय व्यवस्था और संविधान सुधार जैसे मुद्दों पर जोर दे रही है। शहरी युवाओं में इसे समर्थन मिल रहा है, लेकिन जमीनी संगठन की कमजोरी के कारण इसे तीसरी ताकत के रूप में देखा जा रहा है।
अवामी लीग की गैरमौजूदगी और शेख हसीना का मुद्दा
अवामी लीग बांग्लादेश की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक पार्टी है, जिसने देश की आजादी से लेकर अब तक राजनीति में अहम भूमिका निभाई है। शेख हसीना के नेतृत्व में पार्टी ने 15 साल तक शासन किया। इस दौरान आर्थिक विकास और भारत के साथ मजबूत रिश्ते बने, लेकिन विपक्ष को दबाने और लोकतंत्र कमजोर करने के आरोप भी लगे।
इस बार अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने से पूरा राजनीतिक संतुलन बदल गया है। शेख हसीना का भारत में होना भी BNP के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है।
चीन और पाकिस्तान की बढ़ती दिलचस्पी
इस चुनाव में चीन और पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है। चीन बांग्लादेश में निवेश और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, जबकि पाकिस्तान इस्लामी विचारधारा से जुड़े राजनीतिक दलों के उभार को अवसर के रूप में देख रहा है।
चुनाव परिणाम क्यों हैं अहम?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर BNP-जमात गठबंधन सत्ता में आता है, तो भारत-बांग्लादेश रिश्तों में बदलाव देखने को मिल सकता है। चीन का प्रभाव बढ़ सकता है और घरेलू राजनीति में धार्मिक झुकाव भी बढ़ने की आशंका है।
यह चुनाव न केवल बांग्लादेश की दिशा तय करेगा, बल्कि दक्षिण एशिया के राजनीतिक और रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित करेगा। इसलिए पूरे क्षेत्र की नजरें इस चुनाव के नतीजों पर टिकी हुई हैं।