पंजाब पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के पूर्व AIG और SSP रह चुके रछपाल सिंह को आखिरकार आठ साल पुराने फर्जी हेरोइन केस में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई जालंधर STF की ओर से की गई है। रछपाल सिंह को मंगलवार को अमृतसर के थाना सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में बंद किया गया और बुधवार सुबह उन्हें कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया।यह मामला साल 2017 का है, जब अमृतसर के रहने वाले बलविंदर सिंह को 3 अगस्त को सिविल अस्पताल पट्टी से STF टीम ने गिरफ्तार में लिया था। आरोप है कि उस पर एक किलो हेरोइन डालकर झूठा NDPS केस दर्ज किया गया था। बलविंदर पर पाकिस्तान से हेरोइन मंगवाने के आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस ने तीन अन्य लोगों को भी इस मामले में शामिल कर लिया था।

CBI की जांच में सामने आई साजिश
बलविंदर सिंह ने इस कार्रवाई को झूठा बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने नवंबर 2019 में जांच की जिम्मेदारी DGP डायरेक्टर ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन प्रमोद बान को सौंपी थी।जांच के दौरान कॉल डिटेल्स, CCTV फुटेज और लोकेशन डेटा से कई बातें सामने आईं। यह सामने आया कि असली आरोपी गुरजंट सिंह उर्फ सोनू से बरामद एक किलो हेरोइन को बलविंदर सिंह के नाम पर दिखा दिया गया, जबकि गुरजंट सिंह को छोड़ दिया गया।जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर जनवरी 2021 में हाईकोर्ट ने यह मामला CBI को सौंप दिया।
CBI की चार्जशीट में 10 पुलिसकर्मी नामजद
CBI ने नशा तस्करी से जुड़े इस फर्जी केस में जांच के बाद स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।चार्जशीट में पूर्व AIG रछपाल सिंह समेत कुल 10 पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह ,सब इंस्पेक्टर प्रभजीत सिंह,बलविंदर सिंह (पुलिस कर्मी) ,थानेदार कुलविंदर सिंह,थानेदार सुरजीत सिंह समेत 10 पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल किए गए थे।CBI की रिपोर्ट में बताया गया कि फर्जी केस बनाने के लिए साजिश रची गई थी, ताकि गुरजंट सिंह को बचाया जा सके।
पुलिस जांच में करोड़ों का कथित लेनदेन
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में करीब ₹1.75 करोड़ के कथित लेनदेन का जिक्र भी सामने आया था।बताया जा रहा है कि रछपाल सिंह को कई राजनीतिक और पुलिस अधिकारियों का संरक्षण भी मिला हुआ था, जिसके कारण कार्रवाई में देर हुई।यह पहली बार नहीं है जब रछपाल सिंह का नाम विवादों में आया हो।कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उन्हें कोरोना काल के दौरान बटाला का SSP नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे 5वीं IRB बटालियन अमृतसर में कमांडेंट रहे। दो साल पहले वे सेवा से रिटायर हो चुके हैं।
फर्जी बरामदगी की कहानी
2017 में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, रछपाल सिंह की टीम ने आरोपी भौर सिंह के खेतों से 4 किलो 530 ग्राम हेरोइन, एक पिस्टल, तीन मैगजीन और 56 कारतूस बरामद करने का दावा किया था।
बाद में बलविंदर सिंह, मेजर सिंह और भौर सिंह के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन इसमें गुरजंट सिंह का नाम गायब था। यही बात पूरे केस की जांच का आधार बनी।
फिलहाल रछपाल सिंह को थाना सिविल लाइन, अमृतसर की हवालात में रखा गया है। पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड हासिल कर लिया है। CBI इस केस में पहले से ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, और अब पंजाब पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
पुलिस ने बयान जारी कर कहा है कि “मुकदमा नंबर 34, तारीख 11 फरवरी 2019, धारा 21, 29, 58 NDPS एक्ट के तहत थाना सिविल लाइन अमृतसर में दर्ज केस की जांच SIT द्वारा की जा रही थी। चार आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब रिटायर्ड AIG रछपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया है।”