देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से एक चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित नर्मदा जल पीने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1000 से अधिक लोग बीमार बताए जा रहे हैं। इनमें से 66 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, कई की हालत गंभीर बनी हुई है।घटना के बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया है और इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शुरुआती लक्षणों को समझने में हुई देरी
शुरुआत में लोगों को लगा कि यह सामान्य पेट दर्द या मौसमी बीमारी है, लेकिन जब एक ही इलाके से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, कमजोरी और बुखार के लगातार मामले सामने आने लगे, तब स्थिति की गंभीरता समझ में आई।बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
कैसे फैला संक्रमण?
नगर निगम की जांच में खुलासा हुआ कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के टॉयलेट के नीचे नर्मदा जल की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज था।इस लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया, जिसे लोग अनजाने में पीते रहे और बड़ी संख्या में बीमार पड़ गए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देर रात कार्रवाई करते हुए जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियर (PHE) योगेश जोशी को निलंबित कर दिया।इसके अलावा 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है।मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई है।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, घर-घर सर्वे
25-30 मेडिकल टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं।अब तक 1100 से ज्यादा घरों की जांच की जा चुकी है।प्रभावित इलाके की जल सप्लाई बंद की जा चुकी है।लोगों को टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति दी जा रही है।लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है।पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट 48 घंटे में आने की उम्मीद है।
स्वच्छता रैंकिंग पर बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ भागीरथपुरा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इंदौर की जल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।विशेषज्ञों का कहना है कि अब पूरी नर्मदा जल सप्लाई लाइन का ऑडिट ,सीवेज और पानी की लाइनों की संयुक्त जांच और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।वरना भविष्य में ऐसी त्रासदी किसी और इलाके में भी दोहराई जा सकती है।
