पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में शिक्षा सुधार और बढ़ती फीस को लेकर जेनरेशन Z यानी युवा छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया है। यह आंदोलन 4 नवंबर को मुजफ्फराबाद के “यूनिवर्सिटी ऑफ आज़ाद जम्मू और कश्मीर” से शुरू हुआ और जल्द ही मीरपुर, कोटली, रावलकोट और नीलम वैली तक फैल गया। प्रदर्शन की वजह से पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया है और आम लोग भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। प्रारंभ में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, जिसमें छात्रों ने सेमेस्टर फीस में भारी बढ़ोतरी और ई-मार्किंग प्रणाली की खामियों के खिलाफ विरोध किया। इंटरमीडिएट (11वीं-12वीं) के छात्र भी इसमें शामिल हुए। हालांकि, स्थिति तब बिगड़ी जब एक अज्ञात बंदूकधारी ने छात्रों पर फायरिंग की और एक छात्र घायल हो गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दिखाया गया कि छात्र पुलिस की मौजूदगी में भयभीत होकर इधर-उधर भाग रहे थे।इसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया। छात्रों ने टायर जलाए, आगजनी और तोड़फोड़ की, और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जैसे “आजादी चाहिए” और “खून का हिसाब दो, कातिलों जवाब दो।” विरोध के बढ़ते दबाव के चलते प्रशासन ने विश्वविद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें
ई-मार्किंग प्रणाली को तुरंत बंद किया जाए।री-चेकिंग फीस जो प्रति विषय 1,500 रुपये है, को माफ किया जाए।सात विषयों के लिए 10,500 रुपये की री-चेकिंग फीस गरीब छात्रों के लिए बोझिल है।स्कूल और कॉलेजों में बेहतर इमारतें, लाइब्रेरी और लैब बनाई जाए।अस्पतालों में दवाओं और डॉक्टरों की कमी दूर की जाए। आम जनता के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ाया जाए।भ्रष्टाचार और सेना के अत्याचारों पर रोक लगाई जाए।30 अक्टूबर को इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर के रिज़ल्ट छह महीने की देरी के बाद जारी किए गए थे, जिसमें कई छात्रों को कम अंक दिए गए। कुछ मामलों में तो छात्रों को उन विषयों में भी पास कर दिया गया जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं थी। इस वजह से छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया।पिछले महीने, POK में हुए विरोध प्रदर्शन में 12 लोग मारे गए और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। उन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से बिजली बिल, आटे की सब्सिडी और विकास कार्यों की मांग थी।

इस बार छात्रों ने शिक्षा सुधार और आर्थिक राहत को लेकर विरोध शुरू किया, जो जल्द ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया।मुजफ्फराबाद में करीब 500 जेनरेशन Z छात्र प्रशासन भवन की ओर मार्च करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से कुल 38 मांगें रखी, जिनमें POK विधानसभा की 12 रिज़र्व सीटें खत्म करने की मांग भी शामिल थी। सरकार ने 21 मांगें मान लीं, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ।पाकिस्तान सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए POK में सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की।