रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने अपने संबोधन में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए आतंकवाद को सबसे बड़ी चुनौती बताया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने पहलगाम का उल्लेख करते हुए हाल की घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि ऐसे हमले न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा हैं। उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बैठक में कई देशों के रक्षा मंत्री मौजूद थे, जिनमें चीन के रक्षा मंत्री भी शामिल थे। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का आतंकवाद या उसे समर्थन देने वाली गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं और इनके खिलाफ कठोर कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने SCO सदस्य देशों से अपील की कि वे सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति अपनाएं और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करें, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में सदस्य देशों के रक्षा मंत्री शामिल होकर क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इस बैठक में भारत, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, चीन, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सभी देश आपसी सुरक्षा चुनौतियों और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। बैठक का मुख्य फोकस आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर है। सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने और साझा खतरों से निपटने के लिए समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। इसलिए SCO मंच पर लिए गए निर्णय आने वाले समय में सदस्य देशों की सुरक्षा नीति और सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।


किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी भी तरह की “राजनीतिक स्वीकार्यता” नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवादी संगठनों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करना और सीमा पार आतंकवाद पर सख्त कार्रवाई करना समय की जरूरत है। राजनाथ सिंह ने बिना किसी देश का नाम लिए संकेतों में पाकिस्तान को समर्थन देने को लेकर चीन की भूमिका पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्थन से क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित होती है और इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर ठोस कदम उठाएं, ताकि SCO क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों का महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस बैठक में भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस के रक्षा मंत्री शामिल हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी सहयोग और वैश्विक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है। सभी सदस्य देश अपने-अपने दृष्टिकोण साझा कर रहे हैं ताकि साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान निकाला जा सके। इस मौके पर भारतीय रक्षा मंत्री ने कहा कि SCO दुनिया की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मंच को केवल क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी काम करना चाहिए। उन्होंने सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे मिलकर शांति, सुरक्षा और आपसी विश्वास को मजबूत करें, ताकि भविष्य में एक स्थिर और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय वातावरण बनाया जा सके।
SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर कड़ी टिप्पणी की।
पाकिस्तान की मौजूदगी में आयोजित SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है और इससे निपटने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है। अपने संबोधन में उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए हाल की सुरक्षा चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति और कार्रवाई को भी सामने रखा। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत की आतंकवाद नीति “जीरो टॉलरेंस” पर आधारित है, यानी आतंकवाद के किसी भी रूप को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ कोई समझौता संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि SCO हमेशा से आतंकवाद की कड़ी आलोचना करता आया है और अब समय आ गया है कि सदस्य देश मिलकर इस खतरे के खिलाफ और मजबूत, ठोस और संयुक्त कदम उठाएं ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित हो सके।
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ बैठक में आतंकवाद के खिलाफ संगठन की मूल भावना को दोहराते हुए कहा कि इसका बुनियादी सिद्धांत ही आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष पर आधारित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मंच का उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एससीओ के सदस्य देशों ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ मजबूत और स्पष्ट स्थिति को देखा है। भारत हमेशा इस मुद्दे पर निर्णायक और कठोर रुख अपनाता रहा है और आगे भी इसी नीति पर कायम रहेगा। अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के पीड़ितों को हम सभी ने श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि यह हमला बेहद दुखद और निंदनीय था। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल किसी एक देश या क्षेत्र को नहीं, बल्कि पूरी मानवता को प्रभावित करती हैं। इसलिए आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट होकर सख्त कार्रवाई करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
राजनाथ सिंह ने SCO में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा की।
भारतीय रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा “ऑपरेशन सिंदूर के समय हमने बताया था कि आतंकवाद के स्रोत अब किसी भी स्थिति में दंड से नहीं बच सकते। आतंकवाद और उसके समर्थकों के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस नीति का यह प्रमाण है जिसे इस प्रतिष्ठित मंच ने भी स्वीकार किया है। लेकिन यह विश्वसनीयता तभी सिद्ध होती है जब आतंकवाद के खिलाफ हमारी कार्रवाई निरंतर जारी रहे।” राजनाथ सिंह ने आगे कहा “हमें यह याद रखना चाहिए कि आतंकवाद का न तो कोई देश है और न ही कोई धर्म। मानव जीवन को नुकसान पहुंचाने के लिए कोई भी कारण, चाहे वह सच्चा हो या काल्पनिक, मान्य नहीं है।”