Ram Mandir मुद्दे पर सुक्खू का BJP पर निशाना

Himachal Pradesh के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला स्थित राम मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर एकत्र किए गए दान और चढ़ावे से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए, क्योंकि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों और कांग्रेस नेताओं के साथ मंदिर पहुंचे थे। यहां उन्होंने भगवान श्रीराम के दर्शन किए, पूजा की और धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना भी की। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे। मीडिया से बातचीत करते हुए सुक्खू ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया था। ऐसे में यदि चढ़ावे या दान को लेकर किसी प्रकार के सवाल उठते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास कायम रहे। उन्होंने कहा कि भगवान राम सत्य, मर्यादा और न्याय के प्रतीक हैं। समाज और राजनीति से जुड़े लोगों को भी इन्हीं मूल्यों का पालन करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना हर व्यक्ति और संस्था की जिम्मेदारी है। सुक्खू ने यह भी कहा कि उनकी सरकार जनसेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर काम कर रही है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि धार्मिक विषयों को विवाद का कारण बनाने के बजाय समाज में सौहार्द और विश्वास का वातावरण मजबूत करने के लिए मिलकर प्रयास किए जाएं।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर सरकार ने एक दिन का किया था घोषित अवकाश

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि भगवान श्रीराम केवल एक धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे आदर्श शासन, सत्य, मर्यादा और जनसेवा के प्रेरणास्रोत भी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार श्रीराम के मूल्यों को प्रशासनिक व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में चंदा संग्रह अभियान चलाया गया था, तब उन्होंने भी एक विधायक के रूप में अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया था। उनका कहना था कि यह अभियान करोड़ों लोगों की भावनाओं और आस्था से जुड़ा हुआ था, जिसमें समाज के हर वर्ग ने भागीदारी निभाई। सुक्खू ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस ऐतिहासिक अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। यह निर्णय प्रदेशवासियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और इस महत्वपूर्ण अवसर में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा सभी धर्मों और समुदायों के प्रति सम्मान का भाव सिखाती है। भगवान राम का जीवन भी समाज में समानता, करुणा और सद्भाव का संदेश देता है। इसलिए हर व्यक्ति को उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग वास्तव में भगवान राम के अनुयायी हैं, वे उनके नाम पर विवाद या राजनीति करने के बजाय उनके बताए सत्य, सेवा और त्याग के मार्ग पर चलते हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि समाज और राजनीति दोनों क्षेत्रों में राम के आदर्शों को अपनाकर ही बेहतर और समावेशी व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।

राम के नाम पर राजनीति और चंदे में गड़बड़ी करने वालों को मिले सद्बुद्धि 

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भगवान राम के प्रति देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। राम मंदिर निर्माण और धार्मिक कार्यों के लिए लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार धन, आभूषण और अन्य चढ़ावे अर्पित किए हैं, इसलिए इनसे जुड़े किसी भी मामले को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि चढ़ावे या दान के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो यह केवल वित्तीय गड़बड़ी का मामला नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार यह उन लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से भी जुड़ा विषय है, जिन्होंने पूर्ण श्रद्धा के साथ अपना योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। लोगों का विश्वास बनाए रखना सभी संबंधित संस्थाओं और प्रबंधकों की जिम्मेदारी है। श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ भगवान श्रीराम से प्रार्थना करते हुए कहा कि समाज में सद्भाव और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिले। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग धर्म और आस्था से जुड़े मामलों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करते हैं, उन्हें आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। एसआईटी जांच से जुड़े सवालों पर सुक्खू ने कहा कि कानून अपना कार्य स्वतंत्र रूप से करता है और जांच एजेंसियां तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक मामले में व्यक्ति की नीयत, ईमानदारी और भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है। साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर से जुड़ी प्रक्रिया में उनकी भूमिका को भी याद किया जाना चाहिए।

बीजेपी को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले खुद करना चाहिए आत्ममंथन 

हिमाचल बीजेपी के अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के आरोपों का प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भी भगवान राम के प्रति उतनी ही श्रद्धा से पूजा करते हैं और वर्षों से उनके दिखाए सत्य, ईमानदारी और सेवा के रास्ते पर चल रहे हैं। बीजेपी को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले आत्मआलोचना करनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जनकल्याणकारी योजनाएं रामराज्य की भावना के अनुसार लागू कर रही है, जिनका फायदा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है. उन्होंने बीजेपी को श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करने और अपनी मंशा व भावना पर पुनर्विचार करने की सलाह दी. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बताया कि भगवान राम भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्शों के प्रतीक हैं। उनके नाम पर किसी भी प्रकार की राजनीति या आस्था सछेड़छाड़ उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता ने श्रद्धा और विश्वास के साथ राम मंदिर निर्माण में योगदान दिया था। सुक्खू ने कहा कि जब राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में चंदा अभियान चलाया गया था, तब उन्होंने भी एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी श्रद्धानुसार सहयोग किया था। उनका मानना है कि धार्मिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भगवान राम के आदर्शों को शासन व्यवस्था में उतारने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि भगवान राम का संदेश सत्य, न्याय, सेवा और समर्पण का है। जो लोग सच में राम के आदर्शों को मानते हैं, उन्हें समाज में सद्भाव और सेवा की भावना बढ़ानी चाहिए, न कि धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाना चाहिए।
चढ़ावे और दान से संबंधित विवादों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में अर्पित की गई धनराशि, गहने और अन्य चीजें आस्था का संकेत हैं। ऐसे में यदि इनके प्रबंधन मं किसी प्रकार की कमी या गड़बड़ी होती है तो लोगों का भरोसा टूटता है। एसआईटी जांच के संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून स्वतंत्र रूप से काम करता है और जांच एजेंसियां तथ्यों के आधार पर कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि हर मामले में प्रमुखता नीयत और ईमानदारी की होती है। बीजेपी नेताओं के आरोपों का उत्तर देते हुए सुक्खू ने कहा कि वखुद वर्षों से भगवान राम की पूजा करते आ रहे हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय आत्म-विश्लेषण करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार जनकल्याण और पारदर्शिताे लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि रामराज्य की भावना केवल नारों से नहीं, बल्कि जनता की भलाई के लिए किए गए कार्यों से प्रकट होती है। साथ ही, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से धार्मिक आस्था का सम्मान करनऔर समाज में सकारात्मक संदेश देने की अपील की।
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