Amritsar पुलिस ने 255 गुम मोबाइल खोजकर लौटाए

कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने एक बार फिर तकनीकी दक्षता और जनसेवा का उदाहरण पेश करते हुए 255 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंप दिया है। यह कार्रवाई विभिन्न राज्यों में फैले एक विशेष ट्रेसिंग अभियान के तहत की गई, जिससे सैकड़ों लोगों को बड़ी राहत मिली है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बरामद किए गए मोबाइल फोन जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों से ट्रेस किए गए। आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी के जरिए इन मोबाइल फोनों की लोकेशन का पता लगाया गया और उन्हें सुरक्षित रूप से बरामद किया गया। पुलिस कमिश्नर आईपीएस गुरप्रीत सिंह भुल्लर के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान में थाना साइबर क्राइम और सब-डिवीजन सेंट्रल की टीमों ने अहम भूमिका निभाई। कुल 255 मोबाइल फोनों में से 220 मोबाइल फोन साइबर क्राइम टीम ने जबकि 35 मोबाइल फोन सब-डिवीजन सेंट्रल ने ट्रेस किए। पुलिस की इस उपलब्धि को लोगों ने काफी सराहा है। बरामद मोबाइल फोनों में आईफोन सहित कई नामी कंपनियों के स्मार्टफोन शामिल हैं। इनकी अनुमानित कुल कीमत करीब 41.40 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस का कहना है कि कई मोबाइल फोन ऐसे थे जो राज्य से बाहर पहुंच चुके थे, लेकिन तकनीकी जांच और सीईआईआर प्रणाली की सहायता से उन्हें खोज निकाला गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मोबाइल फोन गुम होने की स्थिति में तुरंत इसकी शिकायत दर्ज करवाएं और सीईआईआर पोर्टल पर भी जानकारी अपलोड करें। अधिकारियों का कहना है कि समय पर शिकायत मिलने से मोबाइल फोन को ट्रैक करने और उसके गलत इस्तेमाल को रोकने में काफी मदद मिलती है। कमिश्नरेट पुलिस ने भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रखने का भरोसा दिलाया है।

मोबाइल फोन ट्रेसिंग का विवरण

कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर द्वारा चलाए गए विशेष मोबाइल ट्रेसिंग अभियान में कुल 255 गुम हुए मोबाइल फोन सफलतापूर्वक बरामद किए गए। इस अभियान में थाना साइबर क्राइम टीम ने सबसे अधिक योगदान देते हुए 220 मोबाइल फोन ट्रेस किए, जबकि सब-डिवीजन सेंट्रल की टीम ने 35 मोबाइल फोन बरामद किए। दोनों टीमों के संयुक्त प्रयासों, तकनीकी निगरानी और सीईआईआर प्रणाली की मदद से इन मोबाइल फोनों को विभिन्न राज्यों और शहरों से खोजकर उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल लोगों को राहत मिली है, बल्कि साइबर अपराधों और गुमशुदा मोबाइल फोन की बरामदगी में तकनीक की प्रभावशीलता भी साबित हुई है।
यह अभियान अमृतसर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा चलाए जा रहे विशेष ट्रेसिंग अभियान का चौथा चरण था। पहले तीन चरणों में कुल 700 मोबाइल फोन वापस मिल चुके हैं। अब चौथे चरण में 255 मोबाइल फोन की रिकवरी के साथ यह संख्या बढ़ गई है। पुलिस कमिश्नर आईपीएस गुरप्रीत सिंह भुल्लर के दिशानिर्देशों पर साइबर क्राइम और अन्य टीमों ने आधुनिक तकनीक का उपयोग कर मोबाइल फोन की लोकेशन और उपयोग से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया। निरंतर निगरानी और तकनीकी जांच के बाद इन उपकरणों को पहचानने में सफलता प्राप्त हुई। इस अभियान में थाना साइबर क्राइम टीम ने सबसे ज्यादा योगदान दिया। टीम ने अकेले 220 मोबाइल फोन ट्रेस किए, जबकि सब-डिवीजन सेंट्रल की टीम ने 35 मोबाइल फोन बरामद किए। दोनों टीमों के संयुक्त प्रयासों से यह अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। बरामद मोबाइल फोन में कई महंगे स्मार्टफोन्स शामिल हैं। इनमं आईफोन के साथ सैमसंग, वनप्लस, वीवो, ओप्पो, रेडमी, रियलमी, पोको और शाओमी जैसे प्रसिद्ध ब्रांडों के फोन शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन सभी मोबाइल फोनों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 41.40 लाख रुपये है। मोबाइल फोन को ट्रेस करने के लिए पुलिस ने केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) प्रणाली और अन्य तकनीकी साधनों का सहारा लिया। इसी तकनीक की मदद से मोबाइल फोन विभिन्न राज्यों और शहरों में उपयोग होने के बावजूद खोजे गए। यह प्रणाली गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन की पहचान और ट्रैकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मोबाइल फोन वापस मिलने पर लोगों ने अमृतसर पुलिस को धन्यवाद दिया। कई नागरिकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका खोया हुआ फोन वापस मिलेगा, लेकिन पुलिस की मेहनत और तकनीकी जांच के कारण उनके कीमती उपकरण सुरक्षित लौट आए। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल फोन गुम होने की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या सांझ केंद्र में शिकायत करें। साथ ही सीईआईआर पोर्टल पर भी जानकारी दर्ज करें, ताकि फोन को जल्द ब्लॉक और ट्रेस किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों का संचालन होगा और आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुम हुए मोबाइल फोन तथा साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य लोगों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करना और तकनीक के माध्यम से अपराध नियंत्रण को और प्रभावी बनाना है।
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