PRTC कर्मचारियों की हालिया बैठक में सबसे अहम मुद्दा कच्चे कर्मचारियों को नियमित (स्थायी) करने का रहा। इस पर सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं और पर्सोनल विभाग को कर्मचारियों का विस्तृत डेटा एकत्र करने के निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि आगे की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में यह भी तय हुआ कि विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि रिक्त पदों पर भर्ती होने से न केवल काम का बोझ कम होगा, बल्कि बस संचालन और अन्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। यूनियन ने नवंबर 2025 के आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों की रिहाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। इस पर सरकार ने सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया है कि संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। करीब 8200 कांट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग भी बैठक में प्रमुख रही। यूनियन का कहना है कि ये कर्मचारी लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किलोमीटर स्कीम के तहत प्राइवेट बसों की हायरिंग का मुद्दा भी चर्चा में रहा। यूनियन ने इस टेंडर प्रक्रिया का विरोध करते हुए इसे पूरी तरह रद्द करने की मांग रखी है। सरकार ने इस पर समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी बैठकों में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगे बड़े आंदोलन या अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद बनी हुई है।


साथियों का मुक्त होना
किलोमीटर योजना का विरोध
पीआरटीसी यूनियन ने एक बार फिर किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को किराए पर लेने की टेंडर प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह नीति सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों के हितों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। यूनियन का मानना है कि इस स्कीम के कारण सरकारी बस संचालन पर असर पड़ सकता है और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। इसी कारण संगठन लगातार इस टेंडर प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहा है। बैठक के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष यह मुद्दा मजबूती से रखा और स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह से इस योजना को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए सरकारी ढांचे को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि यदि उच्च स्तरीय बैठक में उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इस स्थिति में पूरे राज्य में परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों की अनदेखी होने पर वे राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। इससे न केवल विभागीय कामकाज प्रभावित होगा, बल्कि आम यात्रियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
1300 बसें और 4500 से अधिक कर्मचारी
पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) का मुख्यालय पटियाला में स्थित है, जो राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के संचालन और प्रबंधन का प्रमुख केंद्र है। यहीं से पूरे नेटवर्क की निगरानी और बस सेवाओं से जुड़ी नीतियों का संचालन किया जाता है। वर्तमान में पीआरटीसी के पास 1,300 से अधिक बसों का मजबूत बेड़ा मौजूद है। इस बेड़े में साधारण बसें, मिडी बसें और किलोमीटर योजना के तहत अनुबंधित बसें शामिल हैं, जो विभिन्न रूटों पर यात्रियों को सुविधाजनक परिवहन सेवा प्रदान करती हैं। इन बसों के संचालन और प्रबंधन के लिए लगभग 4,000 से 4,500 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें ड्राइवर, कंडक्टर, तकनीकी स्टाफ और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं, जो पूरे सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें से करीब 1,022 कर्मचारी नियमित (पक्के) रूप से कार्यरत हैं, जबकि शेष लगभग 75 प्रतिशत कर्मचारी आउटसोर्स या कांट्रैक्ट आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। यह ढांचा पीआरटीसी की कार्यप्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीआरटीसी की बसें पंजाब और चंडीगढ़ में स्थित लगभग 9 से 10 प्रमुख डिपो के माध्यम से संचालित होती हैं। ये डिपो पूरे राज्य में बस सेवाओं के समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह परिवहन नेटवर्क रोजाना लगभग 577 से 600 रूटों पर सेवाएं प्रदान करता है और करीब 3.5 लाख किलोमीटर का सफर तय करता है। इसके अलावा, पीआरटीसी की बस सेवाएं दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे पड़ोसी राज्यों को भी जोड़ती हैं, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होती है।










