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PRTC कर्मचारियों की मांगों पर सहमति के संकेत, हड़ताल टली और कई मुद्दों पर आगे बातचीत जारी

पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) से जुड़े कर्मचारियों की प्रस्तावित 20 मई की हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। इस फैसले के बाद राज्य के यात्रियों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि हड़ताल की स्थिति में परिवहन सेवाएं प्रभावित होने की आशंका थी। सरकार और कर्मचारी यूनियन के बीच हुई बातचीत को इस निर्णय का मुख्य आधार बताया जा रहा है। ट्रांसपोर्ट मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी यूनियन की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। यूनियन प्रतिनिधियों ने अपनी लंबित मांगों को मजबूती से रखा, जिस पर सरकार की ओर से सकारात्मक रुख अपनाया गया। बैठक को दोनों पक्षों के बीच संतुलित और समाधान की दिशा में बढ़ता हुआ कदम बताया गया है। यह ट्रांसपोर्ट मंत्री के साथ उनकी पहली औपचारिक बैठक थी, जिसमें कई विषयों पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं। कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर सरकार ने आगे विचार करने का आश्वासन दिया है, जिससे कर्मचारियों में उम्मीद की भावना बढ़ी है। बैठक के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि कच्चे कर्मचारियों को स्थायी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पर्सोनल विभाग से आवश्यक डेटा मंगवाया जाएगा। इसके आधार पर आगे की नीति तैयार की जाएगी, जिससे योग्य कर्मचारियों के रेगुलर होने की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। खाली पदों पर भर्ती करने को लेकर भी सहमति बनी है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल विभागीय कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि परिवहन सेवाओं को भी अधिक सुचारू बनाया जा सकेगा। कर्मचारियों की संख्या और कार्यभार के बीच संतुलन बनाने पर भी जोर दिया गया। एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा संगरूर जेल में बंद कुछ कर्मचारियों की रिहाई से जुड़ा रहा। इस पर भी सकारात्मक चर्चा हुई और यूनियन के अनुसार, सरकार की ओर से इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया है। जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आवेदन देने की बात भी सामने आई है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण दोनों पक्षों ने सहमति जताई है कि विस्तृत चर्चा आगे की बैठक में की जाएगी। इसके लिए 30 और 31 मई की संभावित तारीख तय की गई है, जिसमें लंबित मुद्दों पर फिर से विस्तार से विचार किया जाएगा PRTC यूनियन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आगामी बैठकों में उनकी मांगों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो भविष्य में आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि अभी के लिए हड़ताल टलने से आम जनता और परिवहन व्यवस्था को बड़ी राहत मिली है।

PRTC कर्मचारियों की हालिया बैठक में सबसे अहम मुद्दा कच्चे कर्मचारियों को नियमित (स्थायी) करने का रहा। इस पर सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं और पर्सोनल विभाग को कर्मचारियों का विस्तृत डेटा एकत्र करने के निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि आगे की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में यह भी तय हुआ कि विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि रिक्त पदों पर भर्ती होने से न केवल काम का बोझ कम होगा, बल्कि बस संचालन और अन्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। यूनियन ने नवंबर 2025 के आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों की रिहाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। इस पर सरकार ने सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया है कि संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। करीब 8200 कांट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग भी बैठक में प्रमुख रही। यूनियन का कहना है कि ये कर्मचारी लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किलोमीटर स्कीम के तहत प्राइवेट बसों की हायरिंग का मुद्दा भी चर्चा में रहा। यूनियन ने इस टेंडर प्रक्रिया का विरोध करते हुए इसे पूरी तरह रद्द करने की मांग रखी है। सरकार ने इस पर समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी बैठकों में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगे बड़े आंदोलन या अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद बनी हुई है।

साथियों का मुक्त होना

नवंबर 2025 में हुए आंदोलन के दौरान पटियाला और संगरूर से गिरफ्तार किए गए यूनियन कर्मचारियों की रिहाई का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। यूनियन का कहना है कि पहले हुए समझौते के बावजूद उनके साथियों को अभी तक जेल से रिहा नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है। यूनियन नेताओं का आरोप है कि समझौते के बाद उम्मीद थी कि सभी गिरफ्तार कर्मचारियों को जल्द रिहा कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि यह स्थिति कर्मचारियों के भरोसे को कमजोर कर रही है। इसके साथ ही यूनियन ने लंबे समय से विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की स्थायीकरण की मांग को भी दोहराया है। उनका कहना है कि करीब 8200 कर्मचारी पिछले कई वर्षों से कांट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग आधार पर सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उन्हें अब नियमित किया जाना चाहिए। कर्मचारियों का तर्क है कि लगातार सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी लाभ और सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। यूनियन का मानना है कि स्थायीकरण से न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली भी अधिक मजबूत होगी। इस मुद्दे पर कर्मचारियों ने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो आंदोलन की स्थिति फिर से बन सकती है, जिससे परिवहन सेवाएं प्रभावित होने की संभावना रहेगी।

किलोमीटर योजना का विरोध

पीआरटीसी यूनियन ने एक बार फिर किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को किराए पर लेने की टेंडर प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह नीति सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों के हितों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। यूनियन का मानना है कि इस स्कीम के कारण सरकारी बस संचालन पर असर पड़ सकता है और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। इसी कारण संगठन लगातार इस टेंडर प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहा है। बैठक के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष यह मुद्दा मजबूती से रखा और स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह से इस योजना को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए सरकारी ढांचे को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि यदि उच्च स्तरीय बैठक में उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इस स्थिति में पूरे राज्य में परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों की अनदेखी होने पर वे राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। इससे न केवल विभागीय कामकाज प्रभावित होगा, बल्कि आम यात्रियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

1300 बसें और 4500 से अधिक कर्मचारी

पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) का मुख्यालय पटियाला में स्थित है, जो राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के संचालन और प्रबंधन का प्रमुख केंद्र है। यहीं से पूरे नेटवर्क की निगरानी और बस सेवाओं से जुड़ी नीतियों का संचालन किया जाता है। वर्तमान में पीआरटीसी के पास 1,300 से अधिक बसों का मजबूत बेड़ा मौजूद है। इस बेड़े में साधारण बसें, मिडी बसें और किलोमीटर योजना के तहत अनुबंधित बसें शामिल हैं, जो विभिन्न रूटों पर यात्रियों को सुविधाजनक परिवहन सेवा प्रदान करती हैं। इन बसों के संचालन और प्रबंधन के लिए लगभग 4,000 से 4,500 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें ड्राइवर, कंडक्टर, तकनीकी स्टाफ और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं, जो पूरे सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें से करीब 1,022 कर्मचारी नियमित (पक्के) रूप से कार्यरत हैं, जबकि शेष लगभग 75 प्रतिशत कर्मचारी आउटसोर्स या कांट्रैक्ट आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। यह ढांचा पीआरटीसी की कार्यप्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीआरटीसी की बसें पंजाब और चंडीगढ़ में स्थित लगभग 9 से 10 प्रमुख डिपो के माध्यम से संचालित होती हैं। ये डिपो पूरे राज्य में बस सेवाओं के समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह परिवहन नेटवर्क रोजाना लगभग 577 से 600 रूटों पर सेवाएं प्रदान करता है और करीब 3.5 लाख किलोमीटर का सफर तय करता है। इसके अलावा, पीआरटीसी की बस सेवाएं दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे पड़ोसी राज्यों को भी जोड़ती हैं, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होती है।

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