PM नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में देश के अलग-अलग मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं की भूमिका, भारतीय इतिहास को समझने और नई तकनीक के जरिए ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने जैसे विषयों पर बात की। प्रधानमंत्री ने ऐसी पहलों का जिक्र किया, जिनके जरिए युवा देश के इतिहास और विरासत को आसान तरीके से जान सकते हैं। पीएम मोदी ने भारतीय इतिहास को समझने के लिए डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने एक ऐसी वेबसाइट का उल्लेख किया, जहां अलग-अलग वर्षों के आधार पर भारत के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी हासिल की जा सकती है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस तरह के डिजिटल संसाधन युवाओं के लिए इतिहास को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे रोचक तरीके से समझने का अवसर देते हैं। प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्णा शेषाद्रि की ओर से तैयार की गई इस पहल की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि इतिहास से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित और सरल रूप में प्रस्तुत करने की ऐसी कोशिश विद्यार्थियों के साथ-साथ सामान्य लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। खासकर युवा किसी खास वर्ष को चुनकर उस दौर की घटनाओं और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परिस्थितियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। पीएम मोदी ने युवाओं को देश के अतीत से जुड़ने और इतिहास को गहराई से समझने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने संकेत दिया कि अपनी विरासत और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी नई पीढ़ी को देश के विकास की यात्रा को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म इस काम को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने उन नागरिकों की कोशिशों को सामने लाने की अपनी परंपरा को भी आगे बढ़ाया, जो अपने स्तर पर समाज और देश के लिए उपयोगी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रयास जब व्यापक जनभागीदारी से जुड़ते हैं, तो उनका प्रभाव काफी बड़ा हो सकता है। इतिहास को डिजिटल तरीके से लोगों तक पहुंचाने वाली पहल भी इसी सोच का उदाहरण है। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब युवा पीढ़ी जानकारी के लिए तेजी से डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो रही है। ऐसे में इतिहास, संस्कृति और देश की विरासत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी को तकनीक के जरिए सरल भाषा में उपलब्ध कराना ज्ञान को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है। ‘मन की बात’ में इस पहल का उल्लेख इसी बदलते डिजिटल दौर में इतिहास की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर सामने आया।
नशा मुक्ति अभियान तेजी से चल रहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान देश में चल रहे नशामुक्ति अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को इससे दूर रखने के लिए देशभर में प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस अभियान को स्वस्थ और सशक्त भारत की दिशा में जरूरी कदम बताया। पीएम मोदी ने ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य देश की युवा आबादी को नशे की गिरफ्त से बचाना है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में उन्हें नशे जैसी समस्याओं से दूर रखना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने चिंता जताई कि नशे की लत का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार इससे प्रभावित होता है। सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए युवाओं को समय रहते सही मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल देना जरूरी है। नशामुक्ति की मुहिम को केवल सरकारी अभियान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें परिवार, स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संगठन और आम नागरिक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें बेहतर विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं के स्वस्थ जीवन और उज्ज्वल भविष्य को देश की प्रगति से जोड़ते हुए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना है कि यदि युवा नशे से मुक्त रहेंगे और अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएंगे, तो इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार से लेकर समाज और देश तक दिखाई देगा। नशामुक्ति को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच प्रधानमंत्री का यह संदेश युवाओं की भागीदारी पर केंद्रित रहा। अभियान का व्यापक उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और ऐसे वातावरण को बढ़ावा देना है, जहां युवा अपनी क्षमता का इस्तेमाल शिक्षा, रोजगार, खेल और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में कर सकें।

बहनों को ‘PM स्वनिधि योजना‘ से नई ताकत मिल रही है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता से जुड़े मुद्दे पर बात की। उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इस योजना से बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़ रही हैं और अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के इस पहलू पर अपेक्षित स्तर पर चर्चा नहीं हो पाती। पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 46 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भाग ले रही हैं। इनमें कई महिलाएं छोटे स्तर पर कारोबार शुरू कर या पहले से चल रहे काम को बढ़ाकर अपनी आमदनी का जरिया मजबूत कर रही हैं। पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य छोटे कारोबार और स्ट्रीट वेंडिंग से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के जरिए ऐसे लोगों को अपने काम के लिए पूंजी जुटाने में मदद मिलती है। महिलाओं की बड़ी भागीदारी यह संकेत देती है कि आर्थिक अवसर मिलने पर वे कारोबार और स्वरोजगार के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता परिवार और समाज दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब महिलाएं अपने व्यवसाय से आय अर्जित करती हैं, तो इससे उनके निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हो सकती है। छोटे कारोबार से जुड़ी महिलाएं स्थानीय स्तर पर रोजगार और सेवाओं की जरूरत को पूरा करने में भी योगदान देती हैं। प्रधानमंत्री ने महिला लाभार्थियों की संख्या का उल्लेख करते हुए इस पहलू को ज्यादा चर्चा में लाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका संदेश यह रहा कि महिला सशक्तिकरण को केवल सामाजिक भागीदारी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना जरूरी है। पीएम स्वनिधि योजना से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी देश में छोटे कारोबार और स्वरोजगार के बदलते स्वरूप को भी दर्शाती है। आर्थिक सहायता और अवसर मिलने पर महिलाएं अपने कौशल के आधार पर अलग-अलग तरह के काम को आगे बढ़ा रही हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका और मजबूत होने की संभावना रहती है। ‘मन की बात’ में पीएम मोदी का यह उल्लेख महिला सशक्तिकरण के आर्थिक पक्ष को सामने लाने वाला रहा। बड़ी संख्या में महिलाओं का योजना से जुड़ना इस बात को रेखांकित करता है कि छोटे कारोबार के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। आने वाले समय में ऐसे प्रयास महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक भूमिका को विस्तार देने में मददगार हो सकते हैं।
पीएम मोदी ने Mission ShaktiSAT की चर्चा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अंतरिक्ष विज्ञान और छात्राओं की भागीदारी से जुड़ी Mission ShaktiSAT पहल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस मिशन के माध्यम से दुनिया के अलग-अलग देशों की हजारों छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और नवाचार के क्षेत्र को समझने का अवसर मिल रहा है। इस पहल को विज्ञान और तकनीक में युवतियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। Mission ShaktiSAT के जरिए 108 देशों की करीब 12 हजार छात्राएं अंतरिक्ष से जुड़ी तकनीक सीखने और नए विचारों पर काम करने का अवसर पा रही हैं। इसका उद्देश्य छात्राओं को केवल अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी क्षेत्र में प्रयोग और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना भी है। प्रधानमंत्री ने इस पहल का जिक्र करते हुए कहा कि आज की बेटियां विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में नए अवसर खुलने के साथ छात्राओं के लिए भी इस क्षेत्र में अपनी क्षमता दिखाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। ऐसे कार्यक्रम युवा प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर ही तकनीकी ज्ञान से जोड़ने में मदद कर सकते हैं। 23 अगस्त को मनाए गए नेशनल स्पेस डे के अवसर पर भी Mission ShaktiSAT से जुड़ी गतिविधियों को प्रमुखता मिली। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में इस मिशन की झलक का जिक्र किया। इस दौरान अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और छात्राओं की भागीदारी को एक साथ सामने लाने का प्रयास दिखाई दिया। अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल वैज्ञानिक संस्थानों तक सीमित विषय नहीं रह गया है। सैटेलाइट, रॉकेट, डेटा और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में युवाओं के लिए करियर और रिसर्च के नए रास्ते बन रहे हैं। ऐसे में छात्राओं को इन क्षेत्रों की शुरुआती जानकारी देना उन्हें भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करने में मददगार हो सकता है। Mission ShaktiSAT की खासियत इसका अंतरराष्ट्रीय स्वरूप भी है। अलग-अलग देशों की छात्राओं को एक साझा तकनीकी मंच से जोड़ने के जरिए विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की संभावनाएं मजबूत होती हैं। इससे छात्राओं को नई तकनीकों को समझने के साथ विभिन्न देशों की युवा प्रतिभाओं के साथ सीखने और विचार साझा करने का अवसर भी मिल सकता है। प्रधानमंत्री के संबोधन में इस पहल का उल्लेख भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों के साथ युवा शक्ति को जोड़ने के संदेश के तौर पर भी सामने आया। देश में अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार के साथ नई पीढ़ी को रिसर्च, इनोवेशन और तकनीकी शिक्षा से जोड़ना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छात्राओं की बढ़ती भागीदारी इस बदलाव को और व्यापक बना सकती है। Mission ShaktiSAT जैसी पहलें यह संकेत देती हैं कि अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाली छात्राओं के लिए अवसरों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। यदि युवा प्रतिभाओं को सही प्रशिक्षण, संसाधन और मार्गदर्शन मिले, तो वे आने वाले समय में सैटेलाइट तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। ‘मन की बात’ में Mission ShaktiSAT का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने विज्ञान के प्रति युवाओं की रुचि और छात्राओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया। 108 देशों की छात्राओं को जोड़ने वाली यह पहल अंतरिक्ष विज्ञान को वैश्विक युवा समुदाय से जोड़ने का एक प्रयास है, जो आने वाले समय में तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है।
कभी-कभी हमारा एक छोटा सा शौक बड़ी संभावना का रास्ता खोल देता है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरो की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कई बार किसी व्यक्ति का साधारण-सा शौक आगे चलकर उसके लिए नई संभावनाओं का दरवाजा खोल सकता है। वेसालु पुरो की कहानी भी इसी सोच को दर्शाती है, जिन्होंने फूलों के प्रति अपने लगाव को धीरे-धीरे एक काम के रूप में विकसित किया। वेसालु पुरो का बचपन किसान परिवार में बीता। उन्होंने बचपन से ही अपने परिवार को खेती-किसानी से जुड़े काम करते हुए देखा। खेत और कृषि उनके जीवन का हिस्सा रहे, वहीं फूलों के प्रति उनका व्यक्तिगत लगाव भी समय के साथ बना रहा। इसी रुचि ने आगे चलकर उन्हें खेती के एक अलग तरीके की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। साल 2021 में वेसालु ने छोटे स्तर पर फूलों की खेती शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत किसी बड़े व्यावसायिक लक्ष्य के साथ नहीं, बल्कि अपने शौक को आजमाने के उद्देश्य से हुई। उन्होंने फूल उगाने की प्रक्रिया को समझा और धीरे-धीरे इस काम में अपनी संभावनाओं को तलाशना शुरू किया। समय के साथ फूलों की खेती उनके लिए केवल पसंद का विषय नहीं रही। उन्हें महसूस हुआ कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की गुंजाइश है और इससे एक बेहतर आजीविका का रास्ता भी तैयार किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने अपने शुरुआती अनुभवों को आधार बनाकर इस काम को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया। वेसालु की कहानी यह भी बताती है कि ग्रामीण और कृषि आधारित क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्पों को अपनाने की काफी संभावनाएं हैं। फूलों की खेती जैसे क्षेत्र किसानों और युवाओं को कृषि से जुड़े अलग-अलग व्यवसाय तलाशने का अवसर दे सकते हैं। स्थानीय परिस्थितियों और व्यक्तिगत रुचि को ध्यान में रखकर शुरू किया गया छोटा प्रयास आगे चलकर बड़ा रूप ले सकता है। प्रधानमंत्री ने वेसालु पुरो का उदाहरण देते हुए इस बात पर ध्यान दिलाया कि अपने शौक को नजरअंदाज करने के बजाय उसे अवसर में बदलने की कोशिश की जा सकती है। कई बार किसी रुचि के पीछे छिपी व्यावसायिक संभावना समय के साथ दिखाई देती है। इसके लिए लगातार सीखने और अपने काम को बेहतर बनाने की जरूरत होती है। वेसालु की यात्रा नागालैंड के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद संभावनाओं की ओर भी ध्यान खींचती है। खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ नए कृषि व्यवसायों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर आय के अतिरिक्त साधन तैयार किए जा सकते हैं। ऐसे प्रयास युवाओं और किसानों को अपने क्षेत्र में ही नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। फूलों की खेती में आगे बढ़ने का वेसालु का फैसला इस बात का उदाहरण है कि शुरुआत छोटी हो तो भी उसका महत्व कम नहीं होता। किसी काम की शुरुआत अनुभव हासिल करने के लिए की जाए और उसमें लगातार सुधार किया जाए, तो वही प्रयास भविष्य में बड़े अवसर में बदल सकता है। ‘मन की बात’ में वेसालु पुरो की कहानी का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने इसी सकारात्मक सोच को सामने रखा। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि रुचि, मेहनत और अवसर की पहचान एक साथ मिल जाए तो छोटा-सा शौक भी जीवन में नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
स्वच्छता अभियान पूरी जगह की पहचान और चरित्र को बदल देता है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के दौरान स्वच्छता को लेकर नागरिकों की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब साफ-सफाई केवल सरकारी अभियान न रहकर लोगों की रोजमर्रा की आदत और जिम्मेदारी बन जाती है, तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। इससे किसी इलाके की तस्वीर के साथ-साथ उसकी पहचान और वातावरण में भी बदलाव आ सकता है। प्रधानमंत्री ने नशे की समस्या को लेकर भी चिंता जाहिर की और युवाओं को इससे बचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति को नशे से दूर रखना जरूरी है। युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें सकारात्मक दिशा देने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि नशे की समस्या का असर केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवारों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नशामुक्ति की मुहिम में परिवार और समाज की भूमिका भी अहम हो जाती है। युवाओं के लिए ऐसा माहौल तैयार करना जरूरी है, जहां उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलें। ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने इतिहास को नई पीढ़ी तक सरल तरीके से पहुंचाने की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने एक डिजिटल पहल का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से अलग-अलग वर्षों को चुनकर भारत के विभिन्न हिस्सों के इतिहास और उस समय की परिस्थितियों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। पीएम मोदी ने इस प्रयास को इतिहास को समझने का रोचक माध्यम बताया। इस डिजिटल पहल को तैयार करने वाले मुंबई के कृष्णा शेषाद्रि की प्रधानमंत्री ने सराहना की। उन्होंने कहा कि तकनीक के जरिए इतिहास को आसान और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने वाली ऐसी कोशिशें विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। इससे युवा केवल पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि डिजिटल संसाधनों के जरिए भी देश के अतीत को समझने की कोशिश कर सकते हैं। महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना आत्मनिर्भरता के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी भूमिका निभा सकता है। पीएम मोदी ने विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने Mission ShaktiSAT का जिक्र करते हुए बताया कि अलग-अलग देशों की छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और नवाचार से जुड़ी जानकारी हासिल करने का अवसर मिल रहा है। ऐसी पहलें छात्राओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने और नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन में इन सभी विषयों को अलग-अलग सामाजिक और विकासात्मक पहलुओं से जोड़कर देखा गया। स्वच्छता को नागरिक जिम्मेदारी, नशामुक्ति को युवा भविष्य, डिजिटल इतिहास को ज्ञान और महिला सशक्तिकरण को आर्थिक भागीदारी से जोड़ते हुए उन्होंने जनभागीदारी के महत्व को सामने रखा। ‘मन की बात’ के इस संबोधन में पीएम मोदी का संदेश व्यापक रूप से देश के नागरिकों, खासकर युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर केंद्रित रहा। स्वच्छता से लेकर विज्ञान और आर्थिक आत्मनिर्भरता तक, विभिन्न क्षेत्रों में छोटे-छोटे प्रयासों को बड़े सामाजिक बदलाव से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही प्रेरक पहलों और सामाजिक बदलाव की कहानियों को साझा किया। उन्होंने नागालैंड की वेसालु पुरो का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी व्यक्ति की रुचि और मेहनत किस तरह आगे चलकर आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती है। फूलों के प्रति लगाव से शुरू हुई उनकी पहल ने स्थानीय स्तर पर एक नए अवसर का रूप लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं और आम नागरिकों को अपने आसपास मौजूद संभावनाओं को पहचानने की जरूरत है। छोटे स्तर से शुरू किया गया कोई काम यदि लगातार प्रयास, सीखने और सही योजना के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो वह रोजगार का साधन बन सकता है। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक गतिविधियों को आधुनिक सोच के साथ जोड़ने से ग्रामीण और छोटे इलाकों में भी नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। स्वच्छता के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री ने नागरिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक साफ-सफाई केवल किसी अभियान या कार्यक्रम तक सीमित रहने वाली गतिविधि नहीं होनी चाहिए। जब लोग इसे अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारी मानते हैं, तो इसका असर पूरे मोहल्ले, गांव या शहर की व्यवस्था और वातावरण पर दिखाई देता है। स्वच्छता की आदत किसी स्थान की पहचान को बेहतर बनाने में भी भूमिका निभा सकती है। ‘मन की बात’ के इस संबोधन में युवाओं, महिलाओं, विज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को एक साथ जोड़ने की कोशिश नजर आई। प्रधानमंत्री ने अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में बदलाव केवल बड़े स्तर की योजनाओं से नहीं आता, बल्कि व्यक्तिगत पहल और सामूहिक भागीदारी भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। प्रधानमंत्री के संदेश में आत्मनिर्भरता और सकारात्मक सोच पर भी जोर दिखाई दिया। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि अपने हुनर, रुचि और स्थानीय अवसरों को पहचानकर व्यक्ति आगे बढ़ सकता है। साथ ही, स्वच्छता जैसी जिम्मेदारियों में आम लोगों की भागीदारी बढ़ने से समाज में लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव कायम किया जा सकता है।










