Kerala कांग्रेस में शक्ति संतुलन का नया समीकरण

Kerala की राजनीति में नई सरकार के गठन से पहले कई दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिले। मुख्यमंत्री पद की शपथ से ठीक पहले कांग्रेस की केरल प्रभारी Deepa Dasmunsi का अचानक वरिष्ठ नेता K. C. Venugopal के आवास पर पहुंचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। सुबह करीब 9 बजे जब V. D. Satheesan शपथ ग्रहण समारोह के लिए अपने घर से रवाना हो रहे थे, उसी समय दीपा दासमुंशी वेणुगोपाल के निवास पहुंचीं। मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेरने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और सीधे अंदर चली गईं। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केसी वेणुगोपाल का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल था। हालांकि अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने वीडी सतीशन के नाम पर सहमति बनाई। इसके बाद से ही पार्टी के अंदर वेणुगोपाल के समर्थकों में हल्की नाराजगी की चर्चा होने लगी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दीपा दासमुंशी की यह मुलाकात सरकार गठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए हो सकती है। नई कैबिनेट में किन नेताओं को जगह मिलेगी और संगठन में किसे क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, इसे लेकर भी बातचीत की अटकलें लगाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने के बावजूद केसी वेणुगोपाल का प्रभाव नई सरकार में साफ दिखाई दे रहा है।

उनके करीबी कई नेताओं को मंत्रिमंडल और संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी में उनकी राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। शपथ ग्रहण समारोह से पहले कांग्रेस नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर चला। पार्टी नेतृत्व चाहता था कि नई सरकार के गठन के समय किसी भी प्रकार का असंतोष सार्वजनिक रूप से सामने न आए। यही कारण है कि वरिष्ठ नेताओं के बीच संवाद बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले पार्टी एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई सरकार राज्य के विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ सरकार को मिलेगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी नई सरकार को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व ने संतुलन बनाते हुए ऐसा फैसला लिया है, जिससे संगठन और सरकार दोनों मजबूत होंगे। दीपा दासमुंशी और केसी वेणुगोपाल की मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे नई सरकार की रणनीति और शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नई सरकार में किस नेता की भूमिका कितनी प्रभावशाली रहने वाली है।

सतीशन के समर्थन में एकजुट हुई कांग्रेस

जहां तक नाराज़गी की बात है, हाल ही में वेणुगोपाल ने मीडिया से स्पष्ट तौर पर कहा था कि अब पार्टी हाईकमान ने निर्णय कर लिया है। वीडी सतीशन मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। हमारे यहां जो भी पार्टी नेतृत्व निर्णय करता है, निष्ठावान कांग्रेसी होने के नाते हम उसे स्वीकार करने के लिए विवश होते हैं। संपूर्ण केरल एक सक्षम यूडीएफ सरकार की आकांक्षा रखता है। केरल और देश भर के लोग नई सरकार की ओर आशा भरी नजरें गड़ाए हुए हैं। कृपया, ध्यान मत लगाइए। हमारी एक लोकतांत्रिक पार्टी है, भाजपा और सीपीएम की भांति नहीं है। हमारी पार्टी की खूबी यह है कि इसमें विचार भिन्न हो सकते हैं, कल भी हो सकता है, लेकिन जब भी पार्टी नेतृत्व निर्णय करता है तो सभी कांग्रेसी एकजुट हो जाते हैं। इसके बाद सीएम बनने वाले वीडी सतीशन ने वेणुगोपाल से मिलने की योजना बनाई। दोनों की हंसते हुए फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं. कांग्रेस ने संदेश भेजा

तो अब केरलम में वेणुगोपाल का क्या हाल रहा?

हालांकि वह मुख्यमंत्री बनने में असफल रहे, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नई UDF सरकार के निर्माण में एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभर कर सामने आए हैं। उनके दल को कैबिनेट में काफी महत्वपूर्ण स्थान मिला है और कई प्रमुख मंत्रालय भी उनके पास आए हैं। अंदरखाने कहा जा रहा है कि वी.डी. सतीशन की सरकार में रह रहे कांग्रेस के 11 मंत्रियों में से सात को वेणुगोपाल का निकटतम समझा जाता है. कहा जा रहा है कि मंत्रालयों का विभाजन भी उन पर काफी प्रभाव डाल रहा है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण विभाग उन्हीं चेहरों को मिले हैं जिनके पास वेणुगोपाल का समर्थन है। इस पर कुछ असहमति भी सामने आई, विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग के संदर्भ में। अब प्रश्न यह है कि शपथ लेने से पहले दीपा दास मुंशी क्यों गई? इस मुद्दे पर कहा जा रहा है कि संभवतः वे दोनों एकसाथ शपथ लेने के लिए मिले होंगे या कोई और चर्चा की होगी, लेकिन चेहरे पर मुस्कान लिए वेणुगोपाल ने मतभेद या नाराजगी की अटकलों को खत्म कर दिया है। इससे पहले, दीपा दास ने भी वेणुगोपाल की नाराजगी की अटकलों पर स्पष्ट कहा था कि पार्टी में किसी प्रकार का मतभेद नहीं है. केसी वेणुगोपाल या किसी अन्य नेता को कोई समस्या नहीं है. उन्होंने रमेश चेन्निथला से भी बातचीत की थी, जिन्हें नाराज समझा जा रहा था क्योंकि वह भी मुख्यमंत्री की दौड़ में थे।

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