मंत्री अरोड़ा मामला ED ने अधिकारियों को नोटिस जारी हाईकोर्ट में सुनवाई जारी

मंत्री अरोड़ा के बाद अधिकारियों तक पहुंची ED की जांच: 2 अधिकारियों सहित 4 को नोटिस, सोमवार को होंगे उपस्थित; हाईकोर्ट में भी मामला सुनवाई के लिए है। पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने अपनी जांच को और विस्तारित कर दिया है। ईडी ने अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर बसंत गर्ग को आमंत्रित किया है। इसके साथ ही 3 अन्य व्यक्तियों को भी सोमवार को पेश होने के लिए कहा गया है। इनमें पावरकॉम की डायरेक्टर (कमर्शियल) हरशरण कौर त्रेहन, 2 कारोबारी सहयोगी हेमंत सूद और चंद्रशेखर शामिल हैं। यह मामला मंत्री संजीव अरोड़ा की एक निजी कंपनी को करोड़ों रुपये की बैंक गारंटी कथित तौर पर अवैध तरीके से लौटाकर लाभ पहुंचाने से संबंधित है। सोमवार को इस मामले में संजीव अरोड़ा की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां ईडी की ओर से जवाब पेश किया जाएगा। पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच को और व्यापक कर दिया है। एजेंसी ने अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर बसंत गर्ग को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, तीन अन्य व्यक्तियों को भी सोमवार को एजेंसी के सामने उपस्थित होने के लिए कहा गया है।

अरोड़ा मामले में ED की जांच और हाईकोर्ट सुनवाई

 

फाइलें जमा करने की तैयारी

एजेंसी द्वारा जारी नोटिस के बाद पावरकॉम ने अपने कार्यालय से इस मामले से जुड़ी सभी फाइलें और रिकॉर्ड ईडी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि आवश्यक दस्तावेज़ों को समय पर एजेंसी को उपलब्ध कराया जाएगा ताकि जांच में किसी प्रकार की देरी न हो। यह कदम मामले की पारदर्शिता और तथ्यपूर्ण जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पंजाब सरकार ने हाल ही में आईएएस अधिकारी बसंत गर्ग को PSPCL का चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया था। अधिकारियों के अनुसार, बसंत गर्ग को मंत्री अरोड़ा का करीबी माना जाता है। इस नियुक्ति के बाद एजेंसी ने यह संज्ञान लिया कि इस निर्णय से जुड़े मामलों में अवैध लाभ मिलने की संभावना हो सकती है। मंत्री संजीव अरोड़ा का रिमांड दो दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। इस दौरान उनके वकील लगातार अदालत में यह तर्क पेश कर रहे हैं कि गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई अनुचित थी। वहीं, ईडी के वकील ने अदालत में स्पष्ट किया कि एजेंसी का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक जांच करना है।

जांच की पारदर्शिता और

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में संजीव अरोड़ा के मामले की सुनवाई लगातार तीन दिनों तक चली। अदालत में अरोड़ा के वकील अपनी दलीलों के माध्यम से यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि गिरफ्तारी और ईडी द्वारा की गई कार्रवाई अनुचित और कानून के खिलाफ है। अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों की सुनवाई सुनिश्चत करने के लिए लगातार तीन दिनों तक सुनवाई जारी रखी।मामले की गंभीरता को देखते हुए संजीव अरोड़ा का रिमांड दो दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके तहत उन्हें ईडी की हिरासत में रखा गया है ताकि एजेंसी गहन जांच कर सके और सभी आवश्यक दस्तावेज़ और सबूत इकट्ठा कर सके। इस रिमांड का उद्देश्य जांच को बाधित किए बिना प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।अरोड़ा के वकील अदालत में यह तर्क दे रहे हैं कि गिरफ्तारी और ईडी की कार्रवाई विधिक रूप से सही नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी केवल राजनीतिक दबाव या गलतफहमी का परिणाम हो सकती है। वकीलों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली और नोटिस जारी करने के तरीके पर भी सवाल उठाए।वहीं, ईडी के वकील ने अदालत में साफ़ किया कि संजीव अरोड़ा के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह तथ्यों और दस्तावेज़ों पर आधारित है। एजेंसी ने सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की है और अपनी दलीलें अदालत में पेश की हैं। ईडी का कहना है कि कार्रवाई का मकसद केवल जांच प्रक्रिया को पूरा करना और कानून के अनुसार निष्पक्ष निर्णय लेना है।इस मामले में GST चोरी और अन्य कई आरोपों की जांच की गई, लेकिन अधिकांश आरोपों को फिलहाल खारिज कर दिया गया है। एजेंसी ने यह भी कहा कि आरोपों की समीक्षा के बाद ही किसी पर कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल निर्दोष व्यक्तियों को बचाना और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।सोमवार को हाईकोर्ट में एजेंसी अपनी पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। अदालत द्वारा सभी पक्षों की सुनवाई पूरी की जाएगी और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और कानून के अनुसार सभी कदम उठाए जाएंगे।

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