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Cockroach Janata Party CJP विवाद सोशल मीडिया अकाउंट बैन मामला

Delhi High Court में शुक्रवार को एक अहम मामले की सुनवाई हुई, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक राजनीतिक संगठन के अकाउंट को लेकर विवाद सामने आया। इस मामले में अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता बताई है। यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ा है, जिसे लेकर संगठन ने अदालत का रुख किया था। पार्टी का आरोप है कि उसका एक्स अकाउंट बिना पर्याप्त कारण के प्रभावित हुआ है और उसे तुरंत बहाल किया जाना चाहिए। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने शुरुआती तौर पर कुछ पोस्टों की सामग्री पर सवाल उठाए और उन्हें आपत्तिजनक करार दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में केवल एक पक्ष की बात सुनकर कोई भी त्वरित आदेश देना उचित नहीं होगा। इसलिए पहले सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की दलीलों को विस्तार से सुना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया से जुड़े ऐसे मामलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था दोनों का संतुलन जरूरी है। इसलिए इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से दलील दी गई कि उनका अकाउंट राजनीतिक गतिविधियों और विचारों को साझा करने का माध्यम है, और उसे बहाल न करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने फिलहाल इस दलील पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया और कहा कि मामले की पूरी जांच और सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। कोर्ट के रुख को संगठन के लिए शुरुआती झटका माना जा रहा है, क्योंकि उसे तत्काल राहत नहीं मिली है। अब अगली सुनवाई में सरकार और एक्स प्लेटफॉर्म की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल किया जाएगा।

HC ने केंद्र सरकार को दिया नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को लेकर चल रहा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में केंद्र सरकार द्वारा पार्टी के एक्स हैंडल को बैन करने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कार्रवाई बिना पर्याप्त अवसर दिए की गई और इससे उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है। सरकार की ओर से इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ कदम बताया गया है। केंद्र सरकार का पक्ष है कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट पर की गई कुछ गतिविधियां देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए संवेदनशील मानी गई थीं, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल कोई त्वरित राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगी। कोर्ट ने फिलहाल एक्स हैंडल पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा गया है, ताकि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा सके।

21 मई को ब्लॉक हुआ था CJP का एक्स हैंडल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का सोशल मीडिया एक्स हैंडल 21 मई को भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद संगठन ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करते हुए “कॉकरोच इज बैक” नाम से नया एक्स हैंडल बनाया, जो अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मौजूदा समय में इस नए अकाउंट के 2.27 लाख से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद संगठन की ऑनलाइन गतिविधियां और अधिक सक्रिय हो गई हैं। समर्थकों के बीच नए हैंडल को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है और लगातार पोस्ट के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, जो पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं, उन्होंने यह संगठन एक खास राजनीतिक और सामाजिक बयान के तौर पर शुरू किया था। बताया जा रहा है कि इसकी शुरुआत एक विवादित टिप्पणी के बाद हुई राजनीतिक बहस के बीच की गई थी। दीपके ने 15 मई को वकील के सीनियर पद से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कथित तौर पर “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद के बीच इस पार्टी की नींव रखी थी। इसी पृष्ठभूमि ने इस संगठन को और अधिक चर्चा में ला दिया। यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर इसके समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्ष सक्रिय हैं, जिससे यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

16 मई को हुई सीजेपी की शुरुआत

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य युवाओं की आवाज को मजबूत करना और एक स्वतंत्र जनआंदोलन खड़ा करना है। संगठन खुद को एक ऐसे मंच के रूप में प्रस्तुत कर रहा है जो सरकार को जवाबदेह बनाने और युवा मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का काम करेगा। पार्टी ने हाल ही में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी कथित खामियों और सिस्टम की नाकामी को लेकर अभियान तेज किया है। इसी क्रम में संगठन ने NEET-UG 2026 पेपर लीक जैसे गंभीर आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए हैं, जिससे राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे को लेकर CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग भी की है। संगठन का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और बार-बार सामने आने वाली गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसी बीच, 16 मई को सामने आए एक अन्य घटनाक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी को लेकर स्पष्टिकरण जारी किया था। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और वह इस तरह की रिपोर्टिंग से आहत हैं।

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