Anant Ambani ने एक बार फिर अपनी धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। रविवार, 28 जून 2026 को उन्होंने आंध्र प्रदेश स्थित विश्व प्रसिद्ध तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में भगवान के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर की पवित्र सुप्रभात सेवा में भाग लिया और पारंपरिक केश दान (मुंडन संस्कार) भी कराया। यह परंपरा तिरुपति मंदिर में गहरी धार्मिक आस्था और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। तिरुमला मंदिर में केश दान का विशेष महत्व है। भक्त अपने बाल भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित करते हैं, जिसे अहंकार त्यागने और पूर्ण विनम्रता के साथ ईश्वर को समर्पित होने का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं। अनंत अंबानी की यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश भी शामिल रहे। उन्होंने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उनकी इस यात्रा ने श्रद्धालुओं की सुविधा, पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को भी उजागर किया, जिससे यह दौरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण बन गया।
केश दान कर निभाई सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा
Anant Ambani ने आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में एक बार फिर अपनी गहरी धार्मिक आस्था का परिचय दिया। इस पवित्र स्थल पर उन्होंने पारंपरिक केश दान (मुंडन संस्कार) कर सदियों पुरानी परंपरा का पालन किया। तिरुमला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए हर वर्ष लाखों भक्त अपने बाल अर्पित करते हैं। यह परंपरा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। हिंदू धर्म में केश दान को अहंकार त्यागने और विनम्रता अपनाने का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि भक्त अपने बाल अर्पित करके स्वयं को पूरी तरह ईश्वर को समर्पित करते हैं और सांसारिक अहंकार से मुक्त होने का संकल्प लेते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए अनंत अंबानी ने भी मंदिर में मुंडन संस्कार कराया, जिसे श्रद्धालुओं के बीच आस्था और सम्मान के रूप में देखा गया। उनका यह कदम धार्मिक विश्वास और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाता है। उनकी यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि यह संदेश भी देती है कि परंपराएं और संस्कृति आधुनिक जीवन के साथ भी गहराई से जुड़ी रह सकती हैं।

TTD को ₹27.5 करोड़ की 25 इलेक्ट्रिक बसों का बड़ा उपहार
Anant Ambani ने तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था जरूरी है। इस पहल के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की ओर से लगभग ₹27.5 करोड़ मूल्य की 25 इलेक्ट्रिक बसें तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को दान करने की घोषणा की गई है। इन बसों का उपयोग तिरुमला की पहाड़ियों में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए किया जाएगा। यह इलेक्ट्रिक बसें पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होंगी, जिससे तिरुमला क्षेत्र में प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। धार्मिक पर्यटन स्थल पर हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज़ इन बसों के संचालन के लिए 50 ड्राइवरों के वेतन और अन्य सुविधाओं का खर्च भी वहन करेगी। यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी। इसके अलावा कंपनी इलेक्ट्रिक बसों के लिए आवश्यक EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में भी सहयोग करेगी, जिससे यह पहल लंबे समय तक टिकाऊ और प्रभावी बनी रहे। यह कदम धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का एक उदाहरण माना जा रहा है।
गौशाला के आधुनिकीकरण और पशु कल्याण का भी लिया संकल्प
Anant Ambani लंबे समय से अपने वन्यजीव संरक्षण प्रोजेक्ट Vantara के कारण चर्चा में रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए वे पशु कल्याण और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयासों से जुड़े हुए हैं। तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर यात्रा के दौरान उन्होंने एक बार फिर पशु कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। उन्होंने तिरुमला स्थित गौशाला के आधुनिकीकरण में सहयोग देने की घोषणा की, जिससे वहां की सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सके। इस पहल का उद्देश्य गौवंश की देखभाल, उनके स्वास्थ्य प्रबंधन और रहने की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। इसे धार्मिक स्थलों पर पशु कल्याण को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यात्रा के दौरान अनंत अंबानी ने मंदिर परिसर में मौजूद हाथियों को अपने हाथों से भोजन भी खिलाया। यह क्षण श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उनका यह व्यवहार न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि पशु संरक्षण और संवेदनशीलता के प्रति उनकी गहरी रुचि को भी उजागर करता है। यह पहल सेवा, करुणा और जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है।
वैदिक विद्वानों से मिला वेद आशीर्वचनम्, रेशमी शॉल से हुआ सम्मान
Anant Ambani ने तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में अपने धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने के बाद मंदिर परिसर में विशेष सम्मान प्राप्त किया। यह सम्मान मंदिर की परंपराओं के अनुसार वैदिक विधियों के साथ प्रदान किया गया। मंदिर के रंगनायकुला मंडपम में वैदिक विद्वानों ने उन्हें पारंपरिक “वेद आशीर्वचनम्” प्रदान किया। इस दौरान मंत्रोच्चार के बीच उन्हें आशीर्वाद दिया गया, जिसे अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। इसके बाद मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें श्रीवारी तीर्थ प्रसादम् भेंट किया गया। यह प्रसाद तिरुमला मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। सम्मान के रूप में उन्हें पारंपरिक रेशमी शॉल भी ओढ़ाया गया, जो विशेष अतिथियों और श्रद्धालुओं को विशिष्ट अवसरों पर प्रदान किया जाता है। यह शॉल सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे सम्मान समारोह ने न केवल धार्मिक परंपराओं की गरिमा को दर्शाया, बल्कि मंदिर की समृद्ध संस्कृति और अतिथियों के प्रति सम्मान की परंपरा को भी उजागर किया।
जून में दूसरी बार पहुंचे तिरुमला, पहले परिवार संग किए थे दर्शन
Anant Ambani की यह यात्रा जून महीने में तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की दूसरी यात्रा रही, जिसने एक बार फिर उनकी गहरी धार्मिक आस्था को उजागर किया। इस दौरान वे भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे और विशेष अनुष्ठानों में शामिल हुए। इससे पहले 12 जून 2026 को भी अनंत अंबानी अपने परिवार के साथ तिरुमला पहुंचे थे। उस समय उनके साथ उनके पिता Mukesh Ambani और पत्नी Radhika Merchant भी मौजूद थे। उस यात्रा के दौरान पूरे परिवार ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और पवित्र अभिषेकम सेवा में भाग लिया। यह सेवा तिरुमला मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसमें भगवान वेंकटेश्वर का विशेष अभिषेक किया जाता है। परिवार की यह उपस्थिति उस समय श्रद्धालुओं और मीडिया दोनों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। बड़ी संख्या में लोगों ने इस धार्मिक यात्रा को एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक क्षण के रूप में देखा। लगातार मंदिर यात्राओं और धार्मिक अनुष्ठानों में भागीदारी यह दर्शाती है कि यह परिवार भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था रखता है, जो समय-समय पर उनकी धार्मिक गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
द्वारका पदयात्रा से भी दिखाई थी अपनी गहरी आस्था
Anant Ambani की धार्मिक यात्राएं केवल तिरुमला या तिरुपति तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि उनकी आस्था देश के कई प्रमुख तीर्थ स्थलों से जुड़ी रही है। समय-समय पर उनकी आध्यात्मिक यात्राएं चर्चा का विषय बनती रही हैं। पिछले वर्ष अपनी शादी से पहले उन्होंने अपनी धार्मिक आस्था का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। उस दौरान उन्होंने गुजरात स्थित द्वारकाधीश मंदिर तक लंबी पदयात्रा की थी। यह पदयात्रा भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त करने के उद्देश्य से की गई थी। यात्रा के दौरान उन्होंने साधना और भक्ति के माध्यम से अपनी आस्था को सार्वजनिक रूप से दर्शाया। उनकी इस यात्रा ने देशभर में व्यापक ध्यान आकर्षित किया था। लोगों ने इसे एक साधारण लेकिन आध्यात्मिक रूप से गहरी सोच वाला कदम माना, जो भक्ति और समर्पण का प्रतीक था। इस प्रकार उनकी धार्मिक यात्राएं केवल व्यक्तिगत आस्था का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि उन्हें भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने और समाज में भक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने के रूप में भी देखा जाता है।
आस्था और सेवा का संतुलित संदेश
तिरुमला में अनंत अंबानी की यह यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह भारतीय परंपराओं, पर्यावरण संरक्षण, पशु कल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी का एक संतुलित उदाहरण बनकर सामने आई. एक ओर उन्होंने सदियों पुरानी केश दान की परंपरा निभाई, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये की इलेक्ट्रिक बसों का दान, गौशाला के विकास में सहयोग, मंदिर के हाथियों की सेवा और हरित परिवहन को बढ़ावा देने जैसी घोषणाएं भी कीं. लगातार दूसरी बार तिरुपति पहुंचना और इससे पहले द्वारकाधीश मंदिर तक पदयात्रा करना इस बात का संकेत देता है कि अनंत अंबानी के जीवन में आध्यात्मिकता केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत आस्था और जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यही कारण है कि उनकी यह यात्रा धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रेरणादायक संदेश देती है.