मन की बात में PM मोदी ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धियां

PM नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देश की उपलब्धियों और आत्मनिर्भर भारत अभियान की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के पहले छह महीने भारत के लिए कई महत्वपूर्ण सफलताएं लेकर आए हैं, जिन पर प्रत्येक नागरिक को गर्व होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता का उल्लेख किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने वाला देश नहीं रहा, बल्कि कई क्षेत्रों में स्वयं नई तकनीक विकसित कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि देश को मजबूत और सक्षम बनाने का राष्ट्रीय संकल्प है। हाल ही में कोलकाता में आयोजित एक नौसैनिक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने भारतीय नौसेना में शामिल किए गए नए स्वदेशी जहाजों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इन जहाजों का डिजाइन, निर्माण और तकनीकी विकास पूरी तरह भारत में हुआ है। यह उपलब्धि देश के रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की मेहनत का परिणाम है कि देश आज आधुनिक रक्षा उपकरणों और युद्धपोतों के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। स्थानीय उद्योगों को नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। सरकार लगातार ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दे रही है जिससे भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। प्रधानमंत्री ने युवाओं और नवाचार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आज देश के युवा नई तकनीकों और शोध कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। यही युवा शक्ति भारत को आने वाले वर्षों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश की क्षमताओं पर विश्वास बढ़ाना भी है। जब देश अपने संसाधनों और प्रतिभाओं के बल पर आगे बढ़ता है, तब विकास की गति और अधिक तेज हो जाती है। पीएम मोदी ने नागरिकों से भी आह्वान किया कि वे स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें और स्थानीय उद्योगों को समर्थन दें। इससे देश की आर्थिक मजबूती के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में विज्ञान, रक्षा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा। उन्होंने कहा कि देश की सामूहिक शक्ति और जनभागीदारी ही आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की सबसे बड़ी ताकत है।

विमानन क्षेत्र में बड़ी कामयाबी

भारत के विमानन क्षेत्र ने हाल के दिनों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसने देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई पहचान दी है। स्वदेशी निर्माण के तहत तैयार किए गए C-295 विमान की सफल उड़ान ने भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के लिए एक नया अध्याय खोल दिया है। इस उपलब्धि को देश के रक्षा और औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। C-295 परियोजना केवल एक विमान निर्माण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत के बढ़ते विनिर्माण सामर्थ्य का प्रतीक भी है। इस पहल के तहत बड़ी संख्या में विमान देश के भीतर तैयार किए जा रहे हैं, जिससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। इससे भारत वैश्विक एयरोस्पेस सप्लाई चेन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बड़ा लाभ मिलेगा। विमान निर्माण से जुड़े विभिन्न पुर्जों और तकनीकी सेवाओं की मांग बढ़ने से हजारों छोटे उद्योगों को नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। रोजगार के क्षेत्र में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। विमान निर्माण, इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं और सप्लाई चेन से जुड़े अनेक क्षेत्रों में नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे कुशल और प्रशिक्षित युवाओं को देश में ही बेहतर अवसर मिल सकेंगे। सरकार और उद्योग जगत का मानना है कि C-295 जैसे स्वदेशी कार्यक्रम भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत बनाएंगे। यह उपलब्धि न केवल देश की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य में रक्षा और विमानन क्षेत्र में भारत को एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।

मिसाइल का किया टेस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की रक्षा क्षमताओं में हो रही प्रगति का उल्लेख करते हुए स्वदेशी तकनीक की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार ऐसे रक्षा उपकरण विकसित कर रहा है जो देश की सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं। हाल ही में स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह मिसाइल भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत का परिणाम है। इसके विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की विभिन्न प्रयोगशालाओं और देश के औद्योगिक साझेदारों ने मिलकर काम किया है। इस सहयोग ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत जटिल रक्षा तकनीकों के विकास में आत्मनिर्भर बनने की क्षमता रखता है। लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने में सक्षम ऐसी मिसाइलें किसी भी देश की सामरिक शक्ति को मजबूत बनाती हैं। स्वदेशी तकनीक से विकसित होने के कारण यह परियोजना भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ विदेशी निर्भरता को भी कम करने में मदद करेगी। रक्षा क्षेत्र में लगातार हो रहे नवाचार से देश के उद्योग जगत को भी लाभ मिल रहा है। मिसाइल, विमान, युद्धपोत और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ रही है। इससे देश में उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को प्रोत्साहन मिल रहा है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। भारत की यह उपलब्धि दर्शाती है कि देश अब रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। समुद्री सुरक्षा से लेकर वायु और भूमि आधारित रक्षा प्रणालियों तक, स्वदेशी तकनीक का विस्तार राष्ट्रीय सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। आने वाले वर्षों में ऐसे प्रयास भारत को वैश्विक रक्षा क्षेत्र में और अधिक मजबूत पहचान दिला सकते हैं।

इंटरनेशनल योगा डे को लेकर कही ये बात

जून महीने में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने एक बार फिर दुनिया को भारत की प्राचीन योग परंपरा की शक्ति से परिचित कराया। इस अवसर पर विश्व के अनेक देशों में बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लाखों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। योग के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि भारत की सांस्कृतिक विरासत की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाती है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दौरान दुनिया के विभिन्न शहरों, सार्वजनिक स्थलों और संस्थानों में विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इन कार्यक्रमों में हर आयु वर्ग के लोगों ने भागीदारी निभाई। योग अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का हिस्सा बन चुका है। भारत में भी योग दिवस को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए। करोड़ों लोगों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। खेल और योग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। भारतीय प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में पदक हासिल किए। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत योग और उससे जुड़े खेलों में विश्व स्तर पर मजबूत स्थिति बनाए हुए है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का भी माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बढ़ती लोकप्रियता यह साबित करती है कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी दुनिया को स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दे रही है। योग के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक नेतृत्व की एक मजबूत पहचान बनाई है।

सोना ना खरीदने की अपील पर बोले पीएम

पीएम ने कहा कि वेस्ट एशिया में युद्ध जैसे हालात को देखते हुए, मैंने नागरिकों से कुछ मामलों पर अपील की थी. मैंने लोगों से यह कहा था कि वे कुछ समय के लिए, जितना संभव हो, सोना खरीदने से दूरी बनाएं। मैं राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का आभारी हूं। उन्होंने केवल मेरी अपील का समर्थन नहीं किया है, बल्कि हर संभव तरीके से सक्रिय रूप से सहयोग भी कर रहे हैं। कई परिवारों ने संदेश के माध्यम से अपने अनुभव मेरे साथ बांटे हैं। लोगों ने कारपूलिंग के विषय में भी कई अनुभव साझा किए हैं। जो लोग पहले रोज एक ही दिशा में अपनी गाड़ियों से यात्रा करते थे, वे अब एक साथ आना-जाना शुरू कर चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देश की हालिया सफलता पर चर्चा की और आत्मनिर्भर भारत अभियान की उपलब्धियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के पहले छः महीनों में भारत ने कई ऐसे लक्ष्य प्राप्त किए हैं, जिन पर हर नागरिक को गर्व होना चाहिए। विशेष रूप से रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में मिली सफलताओं ने देश की क्षमता को नई पहचान दी है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में कोलकाता में आयोजित नौसेना कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना में शामिल किए गए नए युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित हैं। उन्होंने बताया कि इन जहाजों का डिजाइन, निर्माण और तकनीकी विकास भारत में ही हुआ है, जो देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता का संकेत है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण से देश की सुरक्षा क्षमता को मजबूती मिलने के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं।
विमानन क्षेत्र की उपलब्धियों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में निर्मित C-295 विमान ने अपनी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की है। यह परियोजना देश के एयरोस्पेस उद्योग को नई दिशा देने के साथ ही घरेलू विनिर्माण क्षमता को भी सशक्त कर रही है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है। पीएम मोदी ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित लंबी दूरी की स्वदेशी क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं और नवाचार की ताकत का प्रतीक है। देश के वैज्ञानिकों और उद्योगों के सहयोग से निर्मित यह तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत समुद्र से आसमान तक अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। यह बदलाव केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक भी है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सफलता का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष विश्वभर में हजारों स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लाखों लोगों ने भाग लिया। योग के प्रति वैश्विक उत्साह भारत की सांस्कृतिक विरासत की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि खेलों में देश का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ाया है। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नागरिकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि देशहित में की गई अपीलों को लोगों ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के सहयोग और सहभागिता से ही आत्मनिर्भर भारत का सपना तेजी से साकार हो रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया।
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