केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़ा और अहम आदेश जारी किया है। अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार की गई किसी भी तरह की डिजिटल सामग्री पर साफ-साफ पहचान वाला लेबल यानी वाटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा। इसका मकसद फर्जी, भ्रामक, अश्लील और गैरकानूनी कंटेंट पर रोक लगाना है।
सरकार के आदेश के मुताबिक, ऑडियो, वीडियो, फोटो, ग्राफिक या किसी भी तरह का डिजिटल कंटेंट, जो कंप्यूटर या AI तकनीक से बनाया, बदला या एडिट किया गया हो, उस पर यह बताना जरूरी होगा कि वह AI से जनरेटेड है। एक बार यह लेबल या मेटाडाटा लगने के बाद उसे हटाया या छुपाया नहीं जा सकेगा।

सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी यूजर AI तकनीक का गलत इस्तेमाल न करे। अगर कोई व्यक्ति गैरकानूनी, अश्लील, धोखाधड़ी से जुड़ा या बच्चों के यौन शोषण वाला कंटेंट बनाता या शेयर करता है, तो प्लेटफॉर्म्स को उसे तुरंत रोकना होगा। इसके लिए कंपनियों को ऑटोमेटेड तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने यूजर्स को हर तीन महीने में नियमों की जानकारी देना और चेतावनी जारी करना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर यूजर का अकाउंट सस्पेंड किया जा सकता है और कंटेंट हटाया जा सकता है।
सरकार ने कार्रवाई की समयसीमा भी कम कर दी है। पहले जहां 36 घंटे में कार्रवाई करनी होती थी, अब किसी भी शिकायत या सूचना पर 3 घंटे के भीतर जवाब देना और उचित कदम उठाना जरूरी होगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला डिजिटल दुनिया में सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ाने के लिए लिया गया है, ताकि फर्जी खबरों, डीपफेक वीडियो और गलत जानकारी पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।