पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों के समर्थक सोनम वांगचुक ने अपने लंबे समय से जारी भूख हड़ताल को समाप्त करने की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पत्र के माध्यम से बताया कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी गई हैं। वांगचुक का कहना है कि यदि इन शर्तों में से कोई एक भी पूरी होती है, तो वह अपना उपवास समाप्त कर देंगे। अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने लिखा कि कई लोग लगातार उनसे पूछ रहे थे कि वह भूख हड़ताल कब खत्म करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी अपने समर्थकों को बताया था कि 20 जुलाई को अनशन समाप्त करने की योजना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि उनकी ओर से रखी गई शर्तों पर भी निर्भर करेगा। वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उनका मानना है कि इन विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और संबंधित पक्षों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल होगी और सार्थक संवाद का रास्ता निकलेगा। अपने बयान में उन्होंने यह भी दावा किया कि वह फिलहाल “अवैध हिरासत” जैसी परिस्थितियों में हैं और उनकी आवाजाही तथा लोगों से मिलने-जुलने की स्वतंत्रता सीमित है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार और जनता तक पहुंचाना है। सोनम वांगचुक के इस ऐलान के बाद उनके आंदोलन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के बीच इस मामले पर राजनीतिक हलकों की भी नजर बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी ओर से रखी गई शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या इसके बाद उनका लंबे समय से जारी अनशन समाप्त हो पाता है।
सोनम वांगचुक की 3 शर्तें, पूरी हुई तो खत्म होगा अनशन
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वह भूख हड़ताल तभी समाप्त करेंगे, जब उनकी ओर से रखी गई शर्तों में से कम से कम एक पूरी होगी। पहली शर्त के तहत उन्होंने कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सामने आई हालिया नाकामियों, विशेष रूप से पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए सुधार का भरोसा देती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। दूसरी शर्त में वांगचुक ने कहा कि यदि उन्हें और उनके संगठन (CJP) के नेतृत्व को संसद तक जाने की अनुमति दी जाती है और वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद तथा नेता यह आश्वासन देते हैं कि वे शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद में गंभीरता से उठाएंगे, तो भी वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर देंगे। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद जनता की आवाज उठाने का सबसे प्रभावी मंच है। उन्होंने तीसरी शर्त के रूप में कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या अन्य परिस्थितियों की वजह से उनका संसद पहुंचना संभव नहीं हो पाता, तो अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसद और नेता अस्पताल आकर उनसे मुलाकात करें और सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दें कि वे इन मुद्दों को संसद में उठाएंगे। वांगचुक का कहना है कि ऐसा आश्वासन मिलने पर भी वह अपना उपवास समाप्त करने के लिए तैयार हैं। अपने पत्र के अंत में सोनम वांगचुक ने दावा किया कि वह सफदरजंग अस्पताल में “गैर-कानूनी नजरबंदी” जैसी स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आवाजाही, लोगों से मिलने और बातचीत करने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। इस बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं। प्रदर्शन स्थल के आसपास बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। अब सभी की नजर इस बात पर है कि वांगचुक की मांगों पर सरकार और राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं और उनका लंबे समय से जारी अनशन कब समाप्त होता है।











