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चुड़धार में प्लास्टिक संकट, सफाई अभियान तेज

Himachal Pradesh के प्रसिद्ध धार्मिक और ट्रैकिंग स्थल चुड़धार में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के इस केंद्र पर पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ कचरे का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही बलजीत कौर और उनकी संस्था क्लिम ज़ील एडवेंचर एलएलपी ने क्षेत्र में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य चुड़धार को प्लास्टिक मुक्त बनाना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। हाल ही में चलाए गए अभियान के दौरान टीम ने शिखर और मंदिर परिसर सहित आसपास के क्षेत्रों से लगभग 70 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्र किया। इसमें प्लास्टिक बोतलें, खाने के रैपर और अन्य गैर-जैविक अपशिष्ट शामिल थे। यह केवल वह कचरा है जो सतह पर दिखाई दे रहा था, जबकि ट्रैकिंग मार्गों और जंगलों में अभी भी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक फैला हुआ है, जो धीरे-धीरे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संस्था ने अब हर सप्ताह नियमित सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यटकों से भी इस मुहिम में जुड़ने और क्षेत्र को स्वच्छ बनाए रखने की अपील की गई है।

चुड़धार में बढ़ता प्लास्टिक संकट, पर्यावरण संरक्षण की जरूरत

हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध धार्मिक और ट्रैकिंग स्थल चुड़धार हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण विशेष पहचान रखता है, लेकिन हाल के वर्षों में यहां प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। बढ़ती पर्यटक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बोतलें, खाने के पैकेट, रैपर और अन्य गैर-जैविक कचरा धीरे-धीरे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। हाल ही में चलाए गए एक सफाई अभियान के दौरान टीम ने लगभग 70 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया। यह कचरा मुख्य रूप से चुड़धार के शिखर और आसपास के मंदिर परिसर से हटाया गया, जहां सबसे अधिक पर्यटक गतिविधि देखी जाती है। टीम के सदस्यों का कहना है कि यह मात्रा केवल उस कचरे की है जो सतह पर दिखाई दे रहा था। वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर है, क्योंकि जंगलों, ढलानों और ट्रैकिंग मार्गों में अभी भी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक फैला हुआ है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो चुड़धार की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जागरूकता और नियमित सफाई अभियान बेहद जरूरी हो गए हैं।

चुड़धार में बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण, सख्त कार्रवाई की मांग

अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही बलजीत कौर ने चुड़धार क्षेत्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण और लापरवाही पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है, जहां पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष नियम लागू हैं, इसके बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर प्लास्टिक कचरे को खुले में जलाया जा रहा है, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि वन्यजीवों के जीवन के लिए भी खतरा बन गया है। यह स्थिति लंबे समय में पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बताया कि ट्रैकिंग मार्गों और धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ के कारण कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। उचित व्यवस्था न होने के कारण पर्यटक और श्रद्धालु अक्सर प्लास्टिक कचरा वहीं छोड़ देते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान स्थापित किए जाएं और कचरा संग्रहण की स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कचरे को नियंत्रित तरीके से निस्तारित किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन और जनता मिलकर जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक चुड़धार को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना संभव नहीं होगा।

चुड़धार में 70 किलो कचरा हटाया गया, स्थायी समाधान की मांग

अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही बलजीत कौर ने बताया कि उनकी टीम द्वारा चुड़धार शिखर और मंदिर परिसर के आसपास चलाए गए सफाई अभियान में लगभग 70 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया। यह कचरा केवल उस हिस्से का है जो आसानी से दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर है, क्योंकि जंगलों, ढलानों और ट्रैकिंग मार्गों में अभी भी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा फैला हुआ है, जो धीरे-धीरे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। चुड़धार केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर भी है, जिसे स्वच्छ और संरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बढ़ता कचरा इस पवित्र स्थल की सुंदरता और पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि क्षेत्र में ठोस कचरा प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि कचरे को सही तरीके से एकत्रित और निस्तारित किया जा सके। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे जिम्मेदारी का परिचय देते हुए अपने साथ लाया गया कचरा वापस ले जाएं, ताकि चुड़धार को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सके।

चुड़धार में प्लास्टिक संकट, हर सप्ताह चलेगा स्वच्छता अभियान

पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए क्लिम ज़ील एडवेंचर एलएलपी ने हर शनिवार और रविवार को नियमित स्वच्छता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। संस्था ने स्थानीय युवाओं, सामाजिक संगठनों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। उनका मानना है कि जनभागीदारी के बिना चुड़धार को प्लास्टिक-मुक्त बनाना संभव नहीं। समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो हिमाचल की इस महत्वपूर्ण धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर की सुंदरता और पारिस्थितिक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस मामले में प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है कि चुड़धार को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक-मुक्त बनाए रखें। हाल ही में किए गए सफाई अभियान में टीम ने लगभग 70 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया। इसमें प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट, रैपर और अन्य गैर-जैविक अपशिष्ट शामिल थे, जो शिखर और मंदिर परिसर के आसपास फैले हुए थे। टीम के सदस्यों का कहना है कि यह केवल सतह पर दिखने वाला कचरा है, जबकि ट्रैकिंग रास्तों और घने जंगलों में अब भी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक मौजूद है, जो धीरे-धीरे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। चुड़धार क्षेत्र वन्यजीव अभयारण्य के अधीन है, जहां पर्यावरण संरक्षण के विशेष नियम लागू हैं। हालांकि, कई स्थानों पर खुले में कचरा जलाने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे जहरीला धुआं वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए खतरा बना हुआ है। बलजीत कौर ने प्रशासन सआग्रह किया है कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त कूड़ेदान स्थापित किए जाएं और ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए, ताकि इस पवित्र स्थल को स्वच्छ और सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कचरा वापस ले जाने की आदत अपनानी चाहिए, ताकि प्राकृतिक धरोहर को नुकसान से बचाया जा सके।

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