Gujarat के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) ने अपने शैक्षणिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए समाजशास्त्र के छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के तहत “मोदी तत्व” नाम का एक विशेष मॉड्यूल जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य समकालीन नेतृत्व और समाज के बीच संबंधों को समझना है। विश्वविद्यालय का मानना है कि बदलते समय के साथ शिक्षा को भी वर्तमान संदर्भों से जोड़ना जरूरी है। इस नए पाठ्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, उनकी कार्यशैली और उनके सामाजिक प्रभावों का गहन अध्ययन कराया जाएगा। यह अध्ययन पारंपरिक सिद्धांतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के साथ जोड़कर किया जाएगा। इससे छात्रों को वास्तविक दुनिया की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। पाठ्यक्रम का एक अहम हिस्सा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के इतिहास और उसके सामाजिक योगदान पर आधारित है। इसमें छात्रों को यह बताया जाएगा कि संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में किस प्रकार सामाजिक कार्यों में भागीदारी निभाई है। यह अध्ययन समाज में संगठनों की भूमिका को समझने में सहायक होगा।
समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह के अनुसार, इस कोर्स को एमए समाजशास्त्र के “देशभक्ति का समाजशास्त्र” विषय के अंतर्गत शामिल किया गया है। इसमें ऐतिहासिक और आधुनिक नेतृत्व की तुलना के माध्यम से छात्रों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया जाएगा। साथ ही, छत्रपति शिवाजी महाराज और सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान का भी अध्ययन कराया जाएगा। इस पाठ्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें जर्मन समाजशास्त्री मैक्स वेबर के “करिश्माई नेतृत्व” सिद्धांत के आधार पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का विश्लेषण किया जाएगा। यह वही सिद्धांत है जिसके जरिए पहले महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेताओं के प्रभाव को समझा गया था। पाठ्यक्रम में नीतिगत निर्णयों का भी विश्लेषण शामिल किया गया है। इसमें नोटबंदी, डिजिटल पहल, फास्टैग और जल शक्ति मंत्रालय जैसी योजनाओं के प्रभावों को समझाया जाएगा। छात्रों को यह बताया जाएगा कि इन नीतियों ने समाज और अर्थव्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित किया है और इनके पीछे की सोच क्या रही है।
पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के इतिहास और उसके सामाजिक योगदान को भी शामिल किया गया है। छात्रों को यह समझाया जाएगा कि किस प्रकार यह संगठन विभिन्न सामाजिक गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों में भागीदारी निभाता है। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक संगठनों की भूमिका का वस्तुनिष्ठ अध्ययन करना है। समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह के अनुसार, यह कोर्स एमए समाजशास्त्र के अंतर्गत “देशभक्ति का समाजशास्त्र” शीर्षक के तहत पढ़ाया जाएगा। इसमें ऐतिहासिक और आधुनिक नेतृत्व के बीच तुलना करते हुए छात्रों को व्यापक दृष्टिकोण दिया जाएगा। साथ ही, इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज और सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय जैसे व्यक्तित्वों के योगदान का भी अध्ययन शामिल किया गया है। इस कोर्स की एक खास विशेषता यह है कि इसमें प्रसिद्ध समाजशास्त्री मैक्स वेबर के “करिश्माई नेतृत्व” सिद्धांत के आधार पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का विश्लेषण किया जाएगा। यह वही सिद्धांत है जिसके माध्यम से पहले महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेताओं को समझा गया था। पाठ्यक्रम में केवल नेतृत्व ही नहीं, बल्कि विभिन्न नीतिगत निर्णयों का भी अध्ययन शामिल किया गया है। इसमें नोटबंदी, डिजिटल इंडिया, फास्टैग और जल शक्ति मंत्रालय जैसी पहलों का विश्लेषण किया जाएगा। छात्रों को यह समझाया जाएगा कि इन नीतियों का समाज और अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा और किस तरह ये निर्णय आम जनता से जुड़े हुए हैं।











